डेपुटेशन की सजा भुगत रहा चंडीगढ़: यूटी प्रशासन में अधिकारियों की कमी, विशेषज्ञों की राय-अब तलाशना होगा विकल्प
चंडीगढ़ में डेपुटेशन व्यवस्था पर शहरवासियों के मत अलग-अलग हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डेपुटेशन सिर्फ अस्थायी व्यवस्था थी, इसलिए अब चंडीगढ़ को अपने कैडर के अधिकारियों को महत्व देना शुरू कर देना चाहिए। जबकि कुछ लोग डेपुटेशन व्यवस्था के पक्ष में हैं, लेकिन तीन साल के नियमों का सख्ती से पालन हो।
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चंडीगढ़ को डेपुटेशन व्यवस्था की वजह से काफी नुकसान झेलना पड़ा है। अधिकारी आते हैं, अपने अनुसार योजना बनाते हैं और उसे लागू करने से पहले ही मूल कैडर में चले जाते हैं। दूसरे अधिकारी आते हैं, पुरानी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालकर नई योजनाओं पर काम शुरू कर देते हैं। इन कागजी योजनाओं के बीच शहर के लोग अपने मुद्दों को लेकर केवल प्रशासन की ओर ताकते रह जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूटी प्रशासन में अधिकारियों की कमी है, इसलिए अब समय आ गया है कि प्रशासन को विकल्प तलाशना होगा। कब तक प्रशासन 60:40 के अनुपात के बोझ को ढोएगा, जिसका पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 में जिक्र तक नहीं है।
शहर में डेपुटेशन व्यवस्था पर शहरवासियों के मत अलग-अलग हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डेपुटेशन सिर्फ अस्थायी व्यवस्था थी, इसलिए अब चंडीगढ़ को अपने कैडर के अधिकारियों को महत्व देना शुरू कर देना चाहिए। जबकि कुछ लोग डेपुटेशन व्यवस्था के पक्ष में हैं, लेकिन तीन साल के नियमों का सख्ती से पालन हो। इस मामले में प्रशासन सुस्त है। प्रशासन न तो विकल्प तलाश रहा है और न ही जो अधिकारी वर्षों से बैठे हैं, उन्हें वापस भेज रहा है। चंडीगढ़ में डेपुटेशन व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की है। वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एस्टेट ऑफिस वर्सेस चरणजीत कौर के मामले में कहा था कि प्रशासन में मुश्किल यह है कि चंडीगढ़ प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारी पंजाब या हरियाणा राज्यों से डेपुटेशन पर हैं। लगभग तीन वर्ष की डेपुटेशन अवधि पूरी करने के बाद अधिकारी अपने मूल कैडर में वापस चले जाते हैं। इस केस में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी।
60:40 का अनुपात सिर्फ एक पारंपरिक व्यवस्था, कागजों में नहीं
अधिकतर शहरवासियों को लगता है कि प्रशासन में अधिकारियों के बीच 60:40 का अनुपात होना एक नियम है और इसका पालन करना जरूरी है जबकि ये सच नहीं है। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री एसबी चव्हाण ने संसद में एक तारांकित प्रश्न संख्या 208 के जवाब में कहा था कि पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट 1966 में कहीं पर भी यह प्रावधान नहीं है कि चंडीगढ़ में पदों को भरने के लिए पंजाब व हरियाणा से किसी अनुपात में कर्मचारियों को भर्ती किया जाएगा।
कई पीसीएस अधिकारी कई सालों में चंडीगढ़ में जमे
शहर में पीसीएस अधिकारी कई सालों से चंडीगढ़ में जमे हुए हैं। कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जो डेपुटेशन के तीन-तीन साल के दो कार्यकाल को पूरा कर चुके हैं। नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डेपुटेशन पूरा होने के बाद भी पंजाब सरकार अधिकारियों को वापस नहीं बुलाती। कई मामलों में प्रशासन भी अधिकारियों को वापस नहीं भेजना चाहता। दूसरी तरफ एचसीएस अधिकारियों का तीन साल का कार्यकाल पूरा होते ही हरियाणा सरकार उन्हें वापिस बुला लेती है। कुछ महीने पहले कुछ एचसीएस अधिकारियों ने हरियाणा सरकार से एक्सटेंशन मांगी थी। प्रशासन को भी कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन हरियाणा सरकार ने उनकी एक्सटेंशन को खारिज कर दिया और हरियाणा वापस बुला लिया।
शहर में पीसीएस अधिकारी
केपीएस माही : वर्ष 2016 से डेपुटेशन प
नवजोत कौर : जून 2015 से डेपुटेशन पर
तेजदीप सिंह सैनी : अक्तूबर 2017 से डेपुटेशन पर
राकेश पोपली : वर्ष 2015 से डेपुटेशन पर
रुबिंदरजीत सिंह बराड़ : जून 2015 से डेपुटेशन पर
जगजीत सिंह : वर्ष 2019 से डेपुटेशन पर
हरजीत सिंह संधू : अक्तूबर 2018 से डेपुटेशन पर
सौरभ अरोड़ा : जुलाई 2020 से डेपुटेशन पर
पालिका अरोड़ा : सितंबर 2021 से डेपुटेशन पर
एचसीएस अधिकारी
प्रद्युमन सिंह : 3 मार्च 2021
शालिनी चेतल : 10 फरवरी 2022
एचसीएस अधिकारी गए, इनकी जगह नहीं आया कोई
विराट, रुचि सिंह बेदी, राधिका सिंह, मनीश लोहान, एसके जैन, तिलक राज, राजीव प्रसाद, डॉ. इंदर जीत।
वर्तमान यूटी प्रशासन में कैडर अनुसार आईएएस अधिकारी
यूटी कैडर: प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, सीएचबी सीईओ यशपाल गर्ग, शिक्षा सचिव एसएस गिल, कार्मिक सचिव नितिका पवार, खाद्य सचिव विनोद पी कावले, एसडीएम साउथ रुपेश कुमार, निदेशक आईटी पूर्वा गर्ग।
पंजाब: वित्त सचिव विजय नामदेवराव जड़े, एमडी सिटको जसविंदर कौर, नगर निगम कमिश्नर आनिंदिता मित्रा, विशेष सचिव वित्त हरगुनजीत कौर।
हरियाणा: गृह सचिव नितिन यादव, डीसी विनय प्रताप सिंह।