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पेट दर्द से बेहाल बुजुर्ग को इधर-उधर दौड़ाया, बिना इलाज घर लौटना पड़ा
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चंडीगढ़। सेक्टर-45 निवासी वरिष्ठ नागरिक सुभाष चंद्र गुप्ता (69) जीएमएसएच-16 में अव्यवस्था से बेहद दुखी हैं। उन्होंने अस्पताल में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई भी व्यवस्था न होने की शिकायत की है। उनका कहना है कि आधी रात को इमरजेंसी में जाने पर उन्हें इलाज के नाम पर घंटों यहां से वहां चक्कर लगवाया गया। इतना ही नहीं एक्स-रे की सुविधा इमरजेंसी भवन में उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें दूसरे भवन में भेजा गया।
सुभाष चंद्र 19 सितंबर की रात 2.52 बजे पर पेट दर्द की शिकायत पर जीएमएसएच-16 की इमरजेंसी में पहुंचे थे। उनके साथ उनके दामाद भी थे। पेट दर्द के कारण वह छटपटा रहे थे। डॉक्टर ने इमरजेंसी में देखने के बाद एक्स-रे कराने को कहा। पूछने पर पता चला कि इमरजेंसी से बाहर जाना होगा। सुभाष चंद्र कहते हैं कि दामाद ने मुझे स्ट्रेचर पर लिटाया और बाहर निकलकर एक्स-रे यूनिट ढूंढने लगा। वहां जाने पर पता चला एक्स-रे करने वाला ही कोई नहीं है। पांच मरीज पहले से लाइन में लगे थे। आधे घंटे बाद कर्मचारी आया फिर एक्स-रे हुआ जबकि इमरजेंसी केस के लिए इमरजेंसी भवन में ही एक्स-रे की व्यवस्था की गई है।
इसके बाद डॉक्टर ने एक्स-रे रिपोर्ट देखी और नीमा लगवाने के लिए कमरा नंबर 109 में भेज दिया। वहां जाने पर स्टाफ ने कहा कि कमरा नंबर 107 में जाइए। वहां जाने पर वापस कमरा नंबर 109 में वापस भेजा गया। नाराजगी जताने पर कमरा नंबर 109 में अंदर बुलाया गया। स्टाफ ने नीमा लगाने का प्रयास किया लेकिन वह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया। सुभाष चंद ने आगे बताया कि मुझे दर्द की हालत में बाहर निकाल दिया गया। डॉक्टर ने कहा कि अब अल्ट्रासांउड कराकर आइए। इतनी परेशानी झेलने के बाद वह बिना इलाज के ही घर लौट आए। सुभाष चंद्र का आरोप है कि इलाज के नाम पर अस्पताल में मरीजों को परेशान किया जा रहा है।
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कोट
अस्पताल में वरिष्ठ नागरिकों को मानक के अनुसार सुविधाएं प्रदान की जा रहीं हैं। अगर किसी बुजुर्ग को इस तरह की समस्या हुई है तो इसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. वीके नागपल, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमएसएच 16
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सुभाष चंद्र 19 सितंबर की रात 2.52 बजे पर पेट दर्द की शिकायत पर जीएमएसएच-16 की इमरजेंसी में पहुंचे थे। उनके साथ उनके दामाद भी थे। पेट दर्द के कारण वह छटपटा रहे थे। डॉक्टर ने इमरजेंसी में देखने के बाद एक्स-रे कराने को कहा। पूछने पर पता चला कि इमरजेंसी से बाहर जाना होगा। सुभाष चंद्र कहते हैं कि दामाद ने मुझे स्ट्रेचर पर लिटाया और बाहर निकलकर एक्स-रे यूनिट ढूंढने लगा। वहां जाने पर पता चला एक्स-रे करने वाला ही कोई नहीं है। पांच मरीज पहले से लाइन में लगे थे। आधे घंटे बाद कर्मचारी आया फिर एक्स-रे हुआ जबकि इमरजेंसी केस के लिए इमरजेंसी भवन में ही एक्स-रे की व्यवस्था की गई है।
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इसके बाद डॉक्टर ने एक्स-रे रिपोर्ट देखी और नीमा लगवाने के लिए कमरा नंबर 109 में भेज दिया। वहां जाने पर स्टाफ ने कहा कि कमरा नंबर 107 में जाइए। वहां जाने पर वापस कमरा नंबर 109 में वापस भेजा गया। नाराजगी जताने पर कमरा नंबर 109 में अंदर बुलाया गया। स्टाफ ने नीमा लगाने का प्रयास किया लेकिन वह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया। सुभाष चंद ने आगे बताया कि मुझे दर्द की हालत में बाहर निकाल दिया गया। डॉक्टर ने कहा कि अब अल्ट्रासांउड कराकर आइए। इतनी परेशानी झेलने के बाद वह बिना इलाज के ही घर लौट आए। सुभाष चंद्र का आरोप है कि इलाज के नाम पर अस्पताल में मरीजों को परेशान किया जा रहा है।
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अस्पताल में वरिष्ठ नागरिकों को मानक के अनुसार सुविधाएं प्रदान की जा रहीं हैं। अगर किसी बुजुर्ग को इस तरह की समस्या हुई है तो इसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. वीके नागपल, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमएसएच 16