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UPSC result 2021: गामिनी सिंगला को देशभर में तीसरी, जसपिंदर सिंह ने पाई 33वीं रैंक, पेक और पीयू के छात्रों ने लहराया परचम

Mon, 30 May 2022 10:53 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 30 May 2022 10:53 PM IST
सार

पेक की पूर्व छात्रा 23 वर्षीय गामिनी सिंगला ने अपने दूसरे प्रयास में देशभर में तीसरा स्थान हासिल किया। पेक से वर्ष 2019 में उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था। बचपन से ही वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं।

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Chandigarh Gamini Singla ranked third in country in UPSC exam
गामिनी सिंगला, गौरव डोगरा और रुद्राक्ष अपने परिजनों के साथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) की पूर्व छात्रा गामिनी सिंगला ने देशभर में तीसरी रैंक हासिल कर चंडीगढ़ और संस्थान का नाम रोशन किया है। वहीं, पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के जसपिंदर सिंह को 33वीं, रुद्राक्ष को 617वीं और पेक के गौरव डोगरा को 597वीं रैंक मिली है।

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गामिनी सिंगला, जसपिंदर सिंह, रुद्राक्ष और गौरव डोगरा ने बताया कि यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के लिए सेल्फ स्टडी बहुत जरूरी है। इसके बिना परीक्षा पास नहीं की जा सकती। साथ ही तनाव मुक्त होकर तैयारी बेहद जरूरी है। कहा कि इस परीक्षा में अधिकांश छात्र तनाव के कारण ही रह जाते हैं। 
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गामिनी का कहना है कि उनके लिए यह सपने के सच होने जैसा है। वह देश के विकास और लोगों के कल्याण के लिए काम करना चाहती हैं। अपनी सफलता का राज साझा करते हुए गामिनी ने कहा कि वह दिन में 9-10 घंटे पढ़ाई करती थीं। परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने ज्यादातर सेल्फ स्टडी की।
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पिता पढ़कर सुनाते थे अखबार, बचपन का सपना हुआ साकार
पेक की पूर्व छात्रा 23 वर्षीय गामिनी सिंगला ने अपने दूसरे प्रयास में देशभर में तीसरा स्थान हासिल किया। पेक से वर्ष 2019 में उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था। बचपन से ही वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं। इसके लिए वर्ष 2020 से घर पर ही तैयार कर रही थीं। उनकी तैयारी पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर निर्भर थी। 

तैयारी में परिवार ने बहुत सहयोग किया। पिता डॉ. आलोक सिंगला उन्हें अखबार पढ़कर सुनाते थे ताकि उनके समय की बचत हो सके। पिता डॉ. आलोक और माता डॉ. नीरज सिंगला दोनों हिमाचल प्रदेश सरकार में चिकित्सा अधिकारी हैं। भाई आईआईटी खड़गपुर से स्नातक हैं। पेक के शिक्षक प्रो. राजेश भाटिया ने बताया कि गामिनी बेहद मेहनती छात्रा थीं। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान उन्हें नौकरी का प्रस्ताव भी मिला था लेकिन सिविल सेवा के लिए उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। पहले प्रयास में सफल नहीं होने पर भी गामिनी ने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। 

सिविल सेवा में जाने वाले गांव का पहले छात्र हैं जसपिंदर 
पीयू के यूआईएलएस विभाग से वर्ष 2019 में कानून की डिग्री हासिल करने वाले 26 वर्षीय जसपिंदर सिंह अपने गांव भुल्लर (श्री मुक्तसर साहिब) के पहले छात्र हैं, जिन्होंने यह परीक्षा पास की है। जसपिंदर ने बताया कि गांव में बारहवीं के बाद यूनिवर्सिटी में कानूनी शिक्षा के लिए दाखिला लेने वाले भी वह पहले छात्र थे।

पिता नछत्तर सिंह और माता नवदीप कौर दोनों किसान हैं। वह इकलौते बेटे हैं, इसलिए परिवार उनकी इस उपलब्धि पर बहुत खुश है। यूपीएससी के लिए वह पिछले तीन साल से तैयारी कर रहे थे। इस बार दूसरे प्रयास में उन्हें 33वीं रैंक मिली है। कोरोना महामारी के दौरान परीक्षा देरी से आयोजित होने के कारण तैयारी में मुश्किल आई थी। इस दौरान शेड्यूल बिगड़ गया था। कहा कि यूपीएससी में शेड्यूल और तनावमुक्त रहकर पढ़ाई करना बहुत जरूरी है। वे छह से आठ घंटे सेल्फ स्टडी को देते थे।

नौकरी के साथ गौरव ने हासिल की 597वीं रैंक
सेक्टर-51 निवासी और पेक के पूर्व छात्र 27 वर्षीय गौरव डोगरा ने बताया कि उन्होंने नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी की और यह उपलब्धि हासिल की है। कॉलेज से बीटेक के बाद उन्होंने ढाई साल नौकरी की। इसके बाद उन्हें लगा कि सिविल सेवा की तैयारी करनी चाहिए। दो साल नौकरी छोड़कर घर पर ही सेल्फ स्टडी के जरिए सिविल सेवा की तैयारी की। 

पिछले साल वे इंटरव्यू तक गए थे लेकिन रैंक नहीं मिल पाई इसलिए उन्होंने एक निजी कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर नौकरी ज्वाइन कर लिया और साथ में प्रतिदिन तीन से चार घंटे तैयारी जारी रखी। गौरव के पिता सुदेश कुमार बुड़ैल चौकी प्रभारी और माता सुषमा देवी गृहिणी हैं।

लाइब्रेरी में सुबह से रात आठ बजे तक की तैयारी
सेक्टर-21 निवासी और पीयू के राजनीति विज्ञान विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र रुद्राक्ष ने सिविल सेवा परीक्षा में 617वीं रैंक हासिल की है। रुद्राक्ष ने बताया कि उन्होंने एक साल कोचिंग ली थी। इसके बाद सेक्टर-17 लाइब्रेरी में सुबह आठ से शाम आठ बजे तक परीक्षा के लिए तैयारी करते थे। इस परीक्षा में सफल होने के लिए निरंतरता बनाए रखना और तनाव मुक्त रहना बहुत जरूरी है। इसमें आपको अपना बहुत अधिक समय देना पड़ता है, इसलिए आत्मविश्वास जरूरी है। पिता राजिंदर कुमार रेलवे से सेवानिवृत्त हैं और माता डॉ. अपराजिता सेक्टर-6 पंचकूला सिविल अस्पताल में निदेशक हैं।

पीयू के लिए गर्व की बात
पंजाब यूनिवर्सिटी से दो छात्रों की ओर से सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करना यूनिवर्सिटी के लिए गर्व की बात है। पीयू परिवार की ओर से छात्रों और उनके परिवार को बधाई।  - प्रोफेसर राजकुमार, वाइस चांसलर, पीयू

पेक के अन्य छात्र होंगे प्रेरित
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों की ओर से सिविल सेवा परीक्षा में उच्च रैंक लेना अन्य छात्रों को भी प्रेरित करेगा। संस्थान को छात्रों पर गर्व हैं। - डॉ. बलदेव सेतिया, निदेशक, पेक

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