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खुलासाः 'साहब' बनने के लिए सब फायर ऑफिसर ने पदनाम में किया ‘खेल’, विभागीय जांच में दोषी
Fri, 31 Jul 2020 01:23 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 31 Jul 2020 01:23 PM IST
सार
- शिकायत के बाद विभागीय जांच में पाए गए दोषी
- अब आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में होगी जांच
- एसटीओ के कोर्स के लिए किया था गड़बड़झाला
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विस्तार
चंडीगढ़ फायर ब्रिगेड विभाग में तैनात फायर ऑफिसर व मनीमाजरा में पहले सब फायर ऑफिसर के रूप में तैनात रहे अनिल शर्मा ने एसटीओ के कोर्स के लिए खुद को लीडिंग फायरमैन बताकर फार्म भर दिया। उसके बाद नागपुर में कोर्स भी कर लिया। इस मामले में जब प्रशासन को शिकायत मिली तो नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर तिलकराज की जांच में अनिल शर्मा दोषी पाए गए।
प्रशासन ने मामले में फिर से आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में जांच कर रिपोर्ट देने के साथ ही कार्रवाई के लिए कहा है। वर्तमान में सेक्टर-17 स्थित फायर स्टेशन में फायर ऑफिसर के पद पर तैनात अनिल शर्मा वर्ष 2004 में मनीमाजरा स्थित फायर स्टेशन में सब फायर ऑफिसर के पद पर तैनात थे। इस दौरान स्टेशन फायर ऑफिसर के पद के लिए ट्रेनिंग करने वालों के नाम मांगे गए थे।
इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता लीडिंग फायरमैन थी। अनिल शर्मा ने फार्म में स्वयं को लीडिंग फायरमैन बताया। इसके बाद नागपुर स्थित नेशनल फायर सर्विस कॉलेज (एनएफएसए) से एसटीओ का कोर्स कर लिया। उसके बाद कुछ लोगों ने इस धोखाधड़ी की शिकायत प्रशासन को कर दी। प्रशासन ने निगम से जांच के लिए कहा।
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जांच एडिशनल कमिश्नर तिलकराज को सौंपी गई। जांच में अनिल शर्मा दोषी पाए गए। हालांकि प्रशासन ने एक आईएएस ऑफिसर से जांच कराकर मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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प्रशासन ने मामले में फिर से आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में जांच कर रिपोर्ट देने के साथ ही कार्रवाई के लिए कहा है। वर्तमान में सेक्टर-17 स्थित फायर स्टेशन में फायर ऑफिसर के पद पर तैनात अनिल शर्मा वर्ष 2004 में मनीमाजरा स्थित फायर स्टेशन में सब फायर ऑफिसर के पद पर तैनात थे। इस दौरान स्टेशन फायर ऑफिसर के पद के लिए ट्रेनिंग करने वालों के नाम मांगे गए थे।
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इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता लीडिंग फायरमैन थी। अनिल शर्मा ने फार्म में स्वयं को लीडिंग फायरमैन बताया। इसके बाद नागपुर स्थित नेशनल फायर सर्विस कॉलेज (एनएफएसए) से एसटीओ का कोर्स कर लिया। उसके बाद कुछ लोगों ने इस धोखाधड़ी की शिकायत प्रशासन को कर दी। प्रशासन ने निगम से जांच के लिए कहा।
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जांच एडिशनल कमिश्नर तिलकराज को सौंपी गई। जांच में अनिल शर्मा दोषी पाए गए। हालांकि प्रशासन ने एक आईएएस ऑफिसर से जांच कराकर मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
97 लोगों के हस्ताक्षर के साथ पहुंची प्रशासन के पास कॉपी
मामला जब सभी के संज्ञान में आया तो विभाग के ही 97 लोगों ने अपने हस्ताक्षर के साथ प्रशासन को कॉपी सौंप दी। साथ ही मामले में विजलेंस जांच के लिए कहा गया। उसके बाद जांच एडिशनल कमिश्नर को दी गई। प्रशासन ने कहा है कि संबंधित व्यक्ति दोषी पाए जाने पर कोर्स को कैंसिल करने के साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
अक्सर करते हैं विभागीय शिकायत
अनिल शर्मा के खिलाफ दी गई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि वह अक्सर विभाग की ही शिकायत करते रहते हैं। बाद में वह शिकायत गलत पाई जाती है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2010 में चीफ विजलेंस ऑफिसर से फायर ब्रिगेड विभाग में प्रमोशन में धांधली संबंधी शिकायत की थी। जांच के बाद वह शिकायत झूठी पाई गई थी। इसी प्रकार उनकी कई शिकायतें झूठी मिली थीं। इससे विभाग को छवि खराब हो रही है।
मामले की जांच के बाद अनिल शर्मा दोषी पाए गए हैं। इसकी फाइनल रिपोर्ट प्रशासन को भेजनी है। जल्द रिपोर्ट भेजकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
अक्सर करते हैं विभागीय शिकायत
अनिल शर्मा के खिलाफ दी गई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि वह अक्सर विभाग की ही शिकायत करते रहते हैं। बाद में वह शिकायत गलत पाई जाती है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2010 में चीफ विजलेंस ऑफिसर से फायर ब्रिगेड विभाग में प्रमोशन में धांधली संबंधी शिकायत की थी। जांच के बाद वह शिकायत झूठी पाई गई थी। इसी प्रकार उनकी कई शिकायतें झूठी मिली थीं। इससे विभाग को छवि खराब हो रही है।
मामले की जांच के बाद अनिल शर्मा दोषी पाए गए हैं। इसकी फाइनल रिपोर्ट प्रशासन को भेजनी है। जल्द रिपोर्ट भेजकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम