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चंडीगढ़: बिना किसी खर्च के छत पर लगेगा सोलर पैनल, शहर में जल्द लागू होगा रेस्को मॉडल 

Fri, 15 Apr 2022 04:43 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 15 Apr 2022 04:43 PM IST
सार

क्रेस्ट बिना खर्च घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने के लिए रेस्को मॉडल लेकर आया था लेकिन अब तक इसे शहर में लागू नहीं किया गया है क्योंकि मॉडल को लागू करने से पहले क्रेस्ट को जेईआरसी से मंजूरी लेनी थी।

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Chandigarh Environment Department may soon implement Renewable Energy Services Company model
सोलर पैनल - फोटो : फाइल

विस्तार

चंडीगढ़ पर्यावरण विभाग जल्द ही अक्षय ऊर्जा सेवा कंपनी (रेस्को) मॉडल को लागू कर सकता है क्योंकि संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर ली है। तय हुआ है कि सोलर प्लांट लगाने के लिए चंडीगढ़ रिन्यूअल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट), बिजली विभाग, कंपनी और उपभोक्ता के बीच समझौता होगा।

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बता दें कि क्रेस्ट बिना खर्च घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने के लिए रेस्को मॉडल लेकर आया था लेकिन अब तक इसे शहर में लागू नहीं किया गया है क्योंकि मॉडल को लागू करने से पहले क्रेस्ट को जेईआरसी से मंजूरी लेनी थी। क्रेस्ट ने जेईआरसी के पास याचिका दायर की थी। पिछले काफी समय से इस मामले में सुनवाई चल रही थी जो अब समाप्त हो गई है। फैसला हुआ है कि क्रेस्ट, बिजली विभाग, कंपनी और उपभोक्ता के बीच समझौता होने के बाद ही सोलर प्लांट लगाया जाएगा। 
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दरअसल, विभाग ने जेईआरसी के कहने पर रेस्को मॉडल को लेकर एक सर्वे किया था। इसमें करीब 550 लोगों ने सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने की इच्छा जताई है। इस मॉडल के तहत बिना किसी खर्च के लोगों के घर की छत पर कंपनी की तरफ से सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे घर में रहने वाले उस बिजली को इस्तेमाल भी कर सकेंगे और उसे बेच कर कमाई भी कर सकेंगे। यह प्रोजेक्ट उन लोगों के लिए है जो सोलर प्रोजेक्ट तो लगवाना चाहते हैं लेकिन निवेश नहीं करना चाहते।

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यह है रेस्को मॉडल की खासियत

  • सोलर पैनल लगाने का सारा खर्चा निजी कंपनी उठाएगी
  • 15 साल तक पैनल की देखरेख का जिम्मा भी कंपनी का होगा
  • भवन मालिक को मंजूरी देनी होगी, सरकार कंपनी को सब्सिडी देगी
  • भवन मालिक को बिजली विभाग से भी कम दर यानी करीब 3.44 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी
  • अतिरिक्त बिजली को विभाग को सौंपा जा सकेगा, जेईआरसी के तहत कंपनी भवन मालिक को पैसे देगी
  • 15 साल के बाद सोलर प्लांट भवन मालिक का हो जाएगा
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