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NDPC का फर्जी केस बनाया, 6 पुलिसवालों पर जुर्माना
अमरीश शर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 27 Feb 2016 09:31 AM IST
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फर्जी केस बनाने के मामले में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अनुभव शर्मा की अदालत ने दो एसआई समेत छह पुलिसकर्मियों पर जुर्माना लगाया है। साथ ही केस के शिकायतकर्ता हेड कांस्टेबल को एनडीपीएस के केस में आरोपी बनाए गए व्यक्ति को पांच हजार रुपये बतौर मुआवजा देने के भी आदेश दिए हैं।
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वहीं कोर्ट ने एक पुलिसकर्मी को माफ भी किया है। मामले में अदालत ने पुलिस के केस को प्लांट (योजनाबद्ध) बताते हुए आरोपी मनोज शर्मा को जनवरी में बरी कर दिया था। अदालत ने उस वक्त कहा था कि पुलिसकर्मियों के बयानों में अंतर है। इससे साफ लगता है कि केस प्लांट है।
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इसके बाद अदालत ने केस से जुड़े पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्यों न कार्रवाई करने और पीड़ित (आरोपी) को मुआवजा देने के लिए केस से जुड़े गवाह और अन्य पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किया था।
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पुलिसकर्मियों के जवाब के बाद शुक्रवार को अदालत ने सभी पर जुर्माना लगाया। साथ ही शिकायतकर्ता हेड कांस्टेबल विजेंदर सिंह पर जुर्माने के अलावा आरोपी बनाए गए पीड़ित को 5000 रुपये बतौर मुआवजा देने को कहा है।
इन्हें हुआ जुर्माना
नाम-----------------------------------------------राशि
एसआई रणधीर सिंह-------------------------------500 रुपये
एसआई हवा सिंह--------------------------------500 रुपये
हेड कांस्टेबल विजेंदर सिंह (शिकायतकर्ता)---------5000 और 500 रुपये
हेड कांस्टेबल नरेश कुमार---------------------------500 रुपये
हेड कांस्टेबल राजाराम-----------------------------500 रुपये
हेड कांस्टेबल राजिंदर सिंह---------------------------500 रुपये
पुलिस की कहानी
सेक्टर-17 थाना पुलिस ने 9 दिसंबर, 2008 को न्यू शिमला निवासी मनोज कुमार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस की कहानी के अनुसार, घटना वाले दिन सुबह 10:30 बजे सेक्टर-18 के प्रेस लाइट प्वाइंट के पास हेड कांस्टेबल राजा राम और उस वक्त कांस्टेबल विजेंदर सिंह ड्यूटी पर तैनात थे।
इसी दौरान एपी चौक से मध्य मार्ग पर गलत टर्न लेने पर एक कार को उन्होंने रोका। इसमें पांच युवक बैठे थे। कांस्टेबल विजेंदर ने एसआई हवा सिंह को बुलाया और चालान करने के लिए कार ड्राइवर से कागजात मांगे। इसी बीच कार से उतरकर एक युवक प्रेस लाइट प्वाइंट की ओर जाने लगा।
पुलिसकर्मी उसके पीछे दौड़े और पकड़ लिया। मामला संदिग्ध लगने पर पुलिसकर्मियों ने उसकी तलाशी ली तो उसके पास से 50 ग्राम चरस बरामद हुई। उसकी पहचान मनोज शर्मा, न्यू शिमला निवासी के रूप में हुई। इसके बाद सेक्टर-17 थाना पुलिस ने उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में केस दर्ज कर लिया।
दिसंबर में दिया गया कोर्ट का आदेश
मनोज शर्मा के खिलाफ केस के ट्रायल के बाद सीजेएम अनुभव शर्मा ने सात दिसंबर 2015 को सुनाए फैसले में कहा कि केस में पुलिसकर्मियों के बयानों में बहुत मतभेद हैं।
शिकायतकर्ता और गवाह में से किसी के भी बयान आपस में मेल नहीं खाते हैं। ऐसा लगता है कि पुलिसकर्मियों ने योजनाबद्ध तरीके से फर्जी केस बनाया है। सीजेएम ने 250 सीआरपीसी के तहत केस के शिकायतकर्ता और बतौर गवाह पेश हुए छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ शोकॉज नोटिस जारी किया था।
इसमें कहा गया था कि मनोज शर्मा को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करने पर क्यों न उन सभी पर 10-10 हजार रुपये बतौर मुआवजा देने के लिए जुर्माना लगाया जाए। कोर्ट के आदेश की कॉपी आईजी, एसएसपी को भी भेजी गई थी।