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डेंगू का डंक: मरीजों की संख्या हैरान करने वाले, बचने के ये हैं उपाय
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 28 Sep 2016 04:27 PM IST
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GMCH 16 Chandigarh
- फोटो : अमर उजाला
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सिटीब्यूटीफुल में डेंगू का डंक बढ़ गया है। एक ही दिन में डेंगू के 55 नए केस रिकार्ड किए गए हैं। इनमें से 40 केस सिर्फ मनीमाजरा की लैब में टेस्ट किए गए हैं, जबकि 15 अलग-अलग जगहों से केस कंफर्म हुए हैं। मनीमाजरा की लैब में सेक्टर 45 हास्पिटल, सेक्टर 22 और अन्य जगहों से डेंगू के सैंपल भेजे जाते हैं।
इस सीजन में पहली बार है कि एक साथ इतने ज्यादा केस आए हों। इन केसों को मिलाकर चंडीगढ़ में डेंगू के कुल केसों की संख्या 314 पार हो गई है। इन केसों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर में डेंगू का डंक बढ़ गया है।
हालांकि एंटी मलेरिया अधिकारी डा. गौरव अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने 44 सैंपल मनीमाजरा की लैब में भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई। बुधवार तक इसकी रिपोर्ट आ सकती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय डेंगू का सीजन पीक में है। तापमान में गिरावट होने के बजाए उसमें बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो डेंगू के मच्छरों के लिए अनुकूल है।
सोमवार दोपहर हुई बारिश के बाद शहर में उमस बढ़ गई है। उमस बढ़ने से लारवा का मच्छरों से कन्वर्जन मात्र तीन से चार दिन में हो रहा है। आमतौर पर लारवा से एडल्ट मच्छर बनने में कम से कम सात से आठ दिन का वक्त लगता है।
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इस सीजन में पहली बार है कि एक साथ इतने ज्यादा केस आए हों। इन केसों को मिलाकर चंडीगढ़ में डेंगू के कुल केसों की संख्या 314 पार हो गई है। इन केसों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर में डेंगू का डंक बढ़ गया है।
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हालांकि एंटी मलेरिया अधिकारी डा. गौरव अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने 44 सैंपल मनीमाजरा की लैब में भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई। बुधवार तक इसकी रिपोर्ट आ सकती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय डेंगू का सीजन पीक में है। तापमान में गिरावट होने के बजाए उसमें बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो डेंगू के मच्छरों के लिए अनुकूल है।
सोमवार दोपहर हुई बारिश के बाद शहर में उमस बढ़ गई है। उमस बढ़ने से लारवा का मच्छरों से कन्वर्जन मात्र तीन से चार दिन में हो रहा है। आमतौर पर लारवा से एडल्ट मच्छर बनने में कम से कम सात से आठ दिन का वक्त लगता है।
ऐसे करें डेंगू से बचाव
Dengue
- फोटो : Demo Pic
1. अपने घरों के आसपास पानी न जमा होने दें।
2. कूलरों का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य निकालें व रगड़ कर साफ करें।
3. घरों की छतों पर बेकार बर्तन, टिन, टायर, घड़े, टूटे हुए गमले व ड्रम न फेंकें।
4. छत पर बनी पानी की टंकी का ढक्कन बंद कर रखें।
5. जमीन के अंदर पानी की हौदी को हर हफ्ते साफ करें व हमेशा ढक कर रखें।
6. घर में रखे गमले, बोतलों में लगाए गए पौधों के पानी को हफ्ते में एक बार बदलें।
7. बुखार आने पर तुरंत निकट की डिस्पेंसरी या अस्पताल में संपर्क करें।
2. कूलरों का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य निकालें व रगड़ कर साफ करें।
3. घरों की छतों पर बेकार बर्तन, टिन, टायर, घड़े, टूटे हुए गमले व ड्रम न फेंकें।
4. छत पर बनी पानी की टंकी का ढक्कन बंद कर रखें।
5. जमीन के अंदर पानी की हौदी को हर हफ्ते साफ करें व हमेशा ढक कर रखें।
6. घर में रखे गमले, बोतलों में लगाए गए पौधों के पानी को हफ्ते में एक बार बदलें।
7. बुखार आने पर तुरंत निकट की डिस्पेंसरी या अस्पताल में संपर्क करें।