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फरमान जारी.. कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाने पर पुलिसकर्मियों पर होगी कार्रवाई
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चंडीगढ़। कोरोना वैक्सीन लगवाने में तेजी बरतने के लिए चंडीगढ़ पुलिस विभाग अब नया तरीका अपनाया है। विभाग ने अपने मुलाजिमों के लिए फरमान जारी कर कहा है कि अब सभी पुलिसकर्मियों को कोरोना वैक्सीन टीकाकरण जरूरी हो गया है। अगर कोई पुलिसकर्मी टीका नहीं लगवाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेवारी यूनिट इंचार्ज की होगी। सूचना मिलने वाले पुलिसकर्मियों को सेक्टर-26 पुलिस लाइन अस्पताल में टीका लगवाना होगा।
पुलिस मुख्यालय एसपी मनोज कुमार मीणा की तरफ से फरमान जारी होने पर ज्यादातर पुलिसकर्मियों में डर का माहौल है, क्योंकि ज्यादातर पुलिसकर्मी नहीं चाहते हैं कि उनका टीकाकरण हो। नाम न छपने की शर्त पर कई मुलाजिमों ने अपना तर्क दिया है कि कोरोना टीकाकरण करने से पहले विकल्प पूछा जाना सही तरीका था, लेकिन अब उनके साथ धक्केशाही हो रही है। टीका सिर्फ कोरोना संक्रमित, वरिष्ठ नागरिक के अलावा अपनी इच्छा से लगवाने वालों को ही लगना चाहिए।
वहीं, आदेश में कहा गया है कि स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों का टीकाकरण जरूरी है। जिन पुलिसवालों को टीका लगवाने की सूचना दी गई है वह 23 से 26 फरवरी तक नहीं पहुंचते हैं तो उन्हें शनिवार को पुलिस लाइन अस्पताल पहुंचना होगा। बीते महीने स्वास्थ्य विभाग ने फ्रंटलाइन कर्मचारियों को सबसे पहले टीकाकरण की घोषणा की थी। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से कोविड-19 के लिए पुलिस मुख्यालय व एसपी क्राइम ब्रांच मनोज कुमार मीणा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। फ्रंटलाइन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का टीका लगने के बाद पुलिसकर्मियों का टीकाकरण होना था, लेकिन औसत से कम पुलिसकर्मियों के आने पर विभाग की भी सिरदर्दी बढ़ गई है।
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बॉक्स
जागरूक करने के बावजूद पुलिसकर्मी नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
19 व 20 फरवरी को सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन मल्टीपर्पज हॉल में कोविड-19 टीकाकरण के फायदे और अफवाहों से बचने के लिए दो दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया गया था। मकसद था कि ज्यादा से पुलिसकर्मियों का टीकाकरण हो, ताकि उनकी सेहत बेहतर रह सके। इस अभियान में दो दिनों में करीब 320 पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें टीकाकरण से होने वाले फायदे के बारे में बताया गया था। बावजूद इसके पुलिसकर्मी टीकाकरण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
520 पुलिसकर्मियों को लगा टीका
बता दें कि 3 फरवरी से डीजीपी संजय बेनीवाल, एसपी मनोज कुमार मीणा, एसपी केतन बंसल, एएसपी श्रुति अरोड़ा से सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन अस्पताल में कोरोना टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से औसतन 30 से 40 पुलिसकर्मियों को टीका लग रहा है, जो औसत से काफी कम है। आंकड़ों के मुताबिक चंडीगढ़ पुलिस 5975 पुलिसकर्मियों को टीका लगना था, लेकिन सोमवार तक करीब 520 पुलिस वालों ने ही टीका लगवाया है।
बॉक्स
एसपी समेत 208 पुलिसकर्मी हुए थे कोरोना संक्रमित
मार्च 2020 के महीने से कोरोना के इस प्रकोप से मलोया थाना, सेक्टर-61 पुलिस चौकी, पंजाब विश्वविद्यालय पुलिस बीट बॉक्स व सेक्टर-26 पुलिस लाइन, सेक्टर-9 पुलिस मुख्यालय को सील तक कर दिया गया था, ताकि कोरोना को फैलने से रोका जा सके। एसपी सिटी विनीत कुमार, डीएसपी दिलशेर सिंह चंदेल, डीएसपी राजीव अंबस्ता, इंस्पेक्टर दिलबाग सिंह समेत कुल 208 पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमित हुए थे।
कोट-
दबाव की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए
कोरोना से बचाव के लिए लगाए जा रहे टीके की दोनों डोज सभी के लिए बेहद जरूरी है। टीका लगवाने का निर्णय जागरूकता के आधार पर लिया जाना चाहिए। इसके लिए दबाव बनाने जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए थी।
-अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक
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पुलिस मुख्यालय एसपी मनोज कुमार मीणा की तरफ से फरमान जारी होने पर ज्यादातर पुलिसकर्मियों में डर का माहौल है, क्योंकि ज्यादातर पुलिसकर्मी नहीं चाहते हैं कि उनका टीकाकरण हो। नाम न छपने की शर्त पर कई मुलाजिमों ने अपना तर्क दिया है कि कोरोना टीकाकरण करने से पहले विकल्प पूछा जाना सही तरीका था, लेकिन अब उनके साथ धक्केशाही हो रही है। टीका सिर्फ कोरोना संक्रमित, वरिष्ठ नागरिक के अलावा अपनी इच्छा से लगवाने वालों को ही लगना चाहिए।
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वहीं, आदेश में कहा गया है कि स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों का टीकाकरण जरूरी है। जिन पुलिसवालों को टीका लगवाने की सूचना दी गई है वह 23 से 26 फरवरी तक नहीं पहुंचते हैं तो उन्हें शनिवार को पुलिस लाइन अस्पताल पहुंचना होगा। बीते महीने स्वास्थ्य विभाग ने फ्रंटलाइन कर्मचारियों को सबसे पहले टीकाकरण की घोषणा की थी। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से कोविड-19 के लिए पुलिस मुख्यालय व एसपी क्राइम ब्रांच मनोज कुमार मीणा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। फ्रंटलाइन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का टीका लगने के बाद पुलिसकर्मियों का टीकाकरण होना था, लेकिन औसत से कम पुलिसकर्मियों के आने पर विभाग की भी सिरदर्दी बढ़ गई है।
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जागरूक करने के बावजूद पुलिसकर्मी नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
19 व 20 फरवरी को सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन मल्टीपर्पज हॉल में कोविड-19 टीकाकरण के फायदे और अफवाहों से बचने के लिए दो दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया गया था। मकसद था कि ज्यादा से पुलिसकर्मियों का टीकाकरण हो, ताकि उनकी सेहत बेहतर रह सके। इस अभियान में दो दिनों में करीब 320 पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें टीकाकरण से होने वाले फायदे के बारे में बताया गया था। बावजूद इसके पुलिसकर्मी टीकाकरण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
520 पुलिसकर्मियों को लगा टीका
बता दें कि 3 फरवरी से डीजीपी संजय बेनीवाल, एसपी मनोज कुमार मीणा, एसपी केतन बंसल, एएसपी श्रुति अरोड़ा से सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन अस्पताल में कोरोना टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से औसतन 30 से 40 पुलिसकर्मियों को टीका लग रहा है, जो औसत से काफी कम है। आंकड़ों के मुताबिक चंडीगढ़ पुलिस 5975 पुलिसकर्मियों को टीका लगना था, लेकिन सोमवार तक करीब 520 पुलिस वालों ने ही टीका लगवाया है।
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एसपी समेत 208 पुलिसकर्मी हुए थे कोरोना संक्रमित
मार्च 2020 के महीने से कोरोना के इस प्रकोप से मलोया थाना, सेक्टर-61 पुलिस चौकी, पंजाब विश्वविद्यालय पुलिस बीट बॉक्स व सेक्टर-26 पुलिस लाइन, सेक्टर-9 पुलिस मुख्यालय को सील तक कर दिया गया था, ताकि कोरोना को फैलने से रोका जा सके। एसपी सिटी विनीत कुमार, डीएसपी दिलशेर सिंह चंदेल, डीएसपी राजीव अंबस्ता, इंस्पेक्टर दिलबाग सिंह समेत कुल 208 पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमित हुए थे।
कोट-
दबाव की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए
कोरोना से बचाव के लिए लगाए जा रहे टीके की दोनों डोज सभी के लिए बेहद जरूरी है। टीका लगवाने का निर्णय जागरूकता के आधार पर लिया जाना चाहिए। इसके लिए दबाव बनाने जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए थी।
-अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक