{"_id":"56e10cae4f1c1b58038b4568","slug":"chandigarh-budget-chandigarh-nagar-nigam-chandigarh-administration-chandigarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बजट कटने से चंडीगढ़ प्रशासन लेगा सबक, होगी सख्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट कटने से चंडीगढ़ प्रशासन लेगा सबक, होगी सख्ती
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 10 Mar 2016 11:27 AM IST
विज्ञापन
विजय कुमार देव
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बजट कटने से सबक लेते हुए प्रशासन इस बार अधिकारियों की एसीआर में एंट्री करेगा और सख्त से सख्त कदम उठाएगा। लेकिन जिन अधिकारियों की नाकामी बजट कटने का कारण बनी, उन पर किसी तरह की कार्रवाई से बच रहा है। उन्हें केवल एडवाइजरी जारी कर छोड़ दिया गया है। इन अधिकारियों की लापरवाही ने शहर के दर्जनों प्रोजेक्ट्स की चाल धीमी कर दी है। खासकर इंजीनियरिंग विभाग और चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) बजट को खर्च करने में सबसे फिसड्डी रहे।
बीते साल इंजीनियरिंग विभाग की कमान संभालने वाले पूर्व चीफ इंजीनियर एसके चड्ढा सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी विक्रम देवदत्त का दमन एंड दीव और दादर एंड नगर हवेली एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर तबादला हो चुका है। दोनों ही विभागों के कुछ और अधिकारी अच्छी परफॉर्मेंस नहीं दे पाए। सितंबर तक बजट खर्च रिपोर्ट को देखने के बाद वित्त मंत्रालय ने 226 करोड़ रुपये काटे।
इंजीनियरिंग विभाग बजट कटने से पहले तक महज 36 प्रतिशत ही खर्च कर पाया था। जबकि सीटीयू कैपिटल प्लान में 10 प्रतिशत बजट भी खर्च नहीं कर पाया था। बजट का बड़ा प्रतिशत इन दोनों विभागों को अलॉट हुआ था। सीटीयू को नई बसें खरीदने और स्टाफ भर्ती के लिए मोटा बजट अलॉट हुआ था। अकेली कोरोना कंपनी की 160 बसें खरीदने के लिए 82 करोड़ का बजट मिला था।
विज्ञापन
इसमें से सीटीयू केवल 11 बसें ही खरीद पाया। इनमें 70 एसी और 90 नॉन एसी बसें खरीदी जानी थी। इसमें एसी बस 57 लाख 20 हजार रुपये तो नॉन एसी 47 लाख 49 हजार रुपये की खरीदी जानी थी। इस बार प्रशासन को प्लान हेड में 700 करोड़ रुपये का बजट मिला है। जबकि बीते साल 860 करोड़ मिला था, जिसमें से बाद में 226 करोड़ काट लिया गया।
इस साल बजट खर्च करने को लेकर विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। अगले साल से अधिकारियों की एसीआर में एंट्री होगी। उन्हें यह साफ दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
- विजय कुमार देव, सलाहकार, यूटी प्रशासक
इन योजनाओं पर पड़ेगा असर
जीएमएसएच-16 के प्रशासनिक ब्लॉक का काम अधर में
गवर्नमेंट मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (जीएमएसएच)-16 में कुछ दिन पहले ही नए प्रशासनिक ब्लॉक का शिलान्यास हुआ है। इसके लिए अस्पताल में कुछ काम भी शुरू हो गया। लेकिन बजट के कारण यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाएगा। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच)-32 के भी कई प्रोजेक्ट अधर में हैं। ई-ब्लॉक का अब तक शुभारंभ नहीं हो पाया।
ट्रॉमा सेंटर कब बनेगा
सेक्टर-53 में ट्रॉमा सेंटर बनना है। इसके लिए प्रशासन जमीन भी आवंटित कर चुका है, लेकिन बजट की वजह से अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। इस बार भी बजट कम मिला है। इसलिए कम ही आसार हैं कि ट्रॉमा सेंटर का काम शुरू होगा। इसके अलावा कई अस्पतालों को अपग्रेड कर बेड बढ़ाने का काम भी लटक जाएगा।
सचिवालय की ग्रीन बिल्डिंग
सीएचबी और चंडीगढ़ पुलिस हेडक्वार्टर के बीच में सचिवालय की ग्रीन बिल्डिंग के लिए जगह चिह्नित की गई। 2007 में इसका शिलान्यास भी हो गया, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी बात शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ी। प्रशासन आज तक इस बिल्डिंग के लिए फंड मंजूर नहीं करवा पाया। इस बजट में भी कुछ अलग से नहीं मिला।
क्लोवरलीफ फ्लाइओवर
लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए प्रशासन ने ट्रिब्यून चौक पर क्लोवरलीफ फ्लाइओवर बनाने की योजना बनाई थी। 2014 में इसका ड्राफ्ट पास करने के बाद धौलाकुआं (दिल्ली) फ्लाईओवर बनाने वाले एक्सपर्ट से राय लेनी थी। उसके बाद इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने इस प्रोजेक्ट को डंप कर दिया। डंप करने की बड़ी वजह बजट नहीं मिलना भी है।
सेक्टर-43 मल्टीलेवल पार्किंग
सेक्टर-43 स्थित ज्यूडिशियल एकेडमी के साथ मल्टीलेवल पार्किंग के लिए जगह चिह्नित कर रखी है। इसका ड्राफ्ट प्रपोजल तक तैयार हो चुका है। पूर्व चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर के समय में ही पार्किंग बनने का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन साल बीत जाने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका। अब इस पार्किंग के लिए इंतजार और लंबा हो गया है।
विज्ञापन
बीते साल इंजीनियरिंग विभाग की कमान संभालने वाले पूर्व चीफ इंजीनियर एसके चड्ढा सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी विक्रम देवदत्त का दमन एंड दीव और दादर एंड नगर हवेली एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर तबादला हो चुका है। दोनों ही विभागों के कुछ और अधिकारी अच्छी परफॉर्मेंस नहीं दे पाए। सितंबर तक बजट खर्च रिपोर्ट को देखने के बाद वित्त मंत्रालय ने 226 करोड़ रुपये काटे।
विज्ञापन
इंजीनियरिंग विभाग बजट कटने से पहले तक महज 36 प्रतिशत ही खर्च कर पाया था। जबकि सीटीयू कैपिटल प्लान में 10 प्रतिशत बजट भी खर्च नहीं कर पाया था। बजट का बड़ा प्रतिशत इन दोनों विभागों को अलॉट हुआ था। सीटीयू को नई बसें खरीदने और स्टाफ भर्ती के लिए मोटा बजट अलॉट हुआ था। अकेली कोरोना कंपनी की 160 बसें खरीदने के लिए 82 करोड़ का बजट मिला था।
विज्ञापन
इसमें से सीटीयू केवल 11 बसें ही खरीद पाया। इनमें 70 एसी और 90 नॉन एसी बसें खरीदी जानी थी। इसमें एसी बस 57 लाख 20 हजार रुपये तो नॉन एसी 47 लाख 49 हजार रुपये की खरीदी जानी थी। इस बार प्रशासन को प्लान हेड में 700 करोड़ रुपये का बजट मिला है। जबकि बीते साल 860 करोड़ मिला था, जिसमें से बाद में 226 करोड़ काट लिया गया।
इस साल बजट खर्च करने को लेकर विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। अगले साल से अधिकारियों की एसीआर में एंट्री होगी। उन्हें यह साफ दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
- विजय कुमार देव, सलाहकार, यूटी प्रशासक
इन योजनाओं पर पड़ेगा असर
जीएमएसएच-16 के प्रशासनिक ब्लॉक का काम अधर में
गवर्नमेंट मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (जीएमएसएच)-16 में कुछ दिन पहले ही नए प्रशासनिक ब्लॉक का शिलान्यास हुआ है। इसके लिए अस्पताल में कुछ काम भी शुरू हो गया। लेकिन बजट के कारण यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाएगा। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच)-32 के भी कई प्रोजेक्ट अधर में हैं। ई-ब्लॉक का अब तक शुभारंभ नहीं हो पाया।
ट्रॉमा सेंटर कब बनेगा
सेक्टर-53 में ट्रॉमा सेंटर बनना है। इसके लिए प्रशासन जमीन भी आवंटित कर चुका है, लेकिन बजट की वजह से अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। इस बार भी बजट कम मिला है। इसलिए कम ही आसार हैं कि ट्रॉमा सेंटर का काम शुरू होगा। इसके अलावा कई अस्पतालों को अपग्रेड कर बेड बढ़ाने का काम भी लटक जाएगा।
सचिवालय की ग्रीन बिल्डिंग
सीएचबी और चंडीगढ़ पुलिस हेडक्वार्टर के बीच में सचिवालय की ग्रीन बिल्डिंग के लिए जगह चिह्नित की गई। 2007 में इसका शिलान्यास भी हो गया, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी बात शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ी। प्रशासन आज तक इस बिल्डिंग के लिए फंड मंजूर नहीं करवा पाया। इस बजट में भी कुछ अलग से नहीं मिला।
क्लोवरलीफ फ्लाइओवर
लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए प्रशासन ने ट्रिब्यून चौक पर क्लोवरलीफ फ्लाइओवर बनाने की योजना बनाई थी। 2014 में इसका ड्राफ्ट पास करने के बाद धौलाकुआं (दिल्ली) फ्लाईओवर बनाने वाले एक्सपर्ट से राय लेनी थी। उसके बाद इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने इस प्रोजेक्ट को डंप कर दिया। डंप करने की बड़ी वजह बजट नहीं मिलना भी है।
सेक्टर-43 मल्टीलेवल पार्किंग
सेक्टर-43 स्थित ज्यूडिशियल एकेडमी के साथ मल्टीलेवल पार्किंग के लिए जगह चिह्नित कर रखी है। इसका ड्राफ्ट प्रपोजल तक तैयार हो चुका है। पूर्व चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर के समय में ही पार्किंग बनने का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन साल बीत जाने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका। अब इस पार्किंग के लिए इंतजार और लंबा हो गया है।