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फरमानः कितना खर्चा बजट, अब हर महीने देना होगा ऑनलाइन ब्यौरा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 14 Mar 2016 08:57 AM IST
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ऑनलाइन ट्यूशन
- फोटो : getty
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पिछले साल बजट में कटौती होने से सबक लेते हुए प्रशासन ने विभागों को हर महीने बजट खर्च का ब्यौरा देने का फरमान सुनाया है। सभी विभागों को अपने बजट खर्च का ब्यौरा अब हर महीने सार्वजनिक करना होगा। बाकायदा खर्च रिपोर्ट महीने दर महीने प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।
सही तरीके से समय पर बजट खर्च न करने वाले विभागों की पहचान करने के लिए प्रशासन ने यह जरूरी कदम उठाया है। फरवरी का बजट वेबसाइट पर अपलोड कर इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। सितंबर में रिवाइज्ड बजट रिपोर्ट तैयार होनी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर वित्त मंत्रालय यह तय करता है कि बजट काटा जाए या नहीं।
इसी रिपोर्ट के आधार पर ही काफी हद तक अगले वित्त वर्ष का बजट भी निर्धारित होता है। इस साल इसी रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने सितंबर-2015 में प्लान हेड के कुल 860 करोड़ में से 226 करोड़ का बजट काट लिया था। जिसके बाद प्रशासन को अपने खर्चों में 26 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ी।
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वित्त वर्ष 2016-17 में ऐसे हालात न हों इसके लिए प्रशासन ने पहले से तैयारी कर ली है। जिस भी विभाग की मासिक रिपोर्ट ठीक नहीं रहेगी, उसकेएचओडी से भी जवाब मांगा जाएगा। एडवाइजर विजय कुमार देव पहले ही बजट परफॉर्मेंस को एसीआर (एनुएल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट) में दर्ज करने के दिशानिर्देश जारी कर चुके हैं।
इस बार 700 करोड़ बजट मिला
वित्त मंत्रालय ने पिछले साल के मुकाबले इस साल प्लान हेड बजट में 160 करोड़ रुपये कम कर दिए। प्रशासन ने मंत्रालय से प्लान हेड में 2 हजार 95 करोड़ की मांग की थी, जबकि मिले सिर्फ 700 करोड़ रुपये। वहीं नॉन प्लान हेड में 3 हजार 394 करोड़ रुपये मांगे गए थे लेकिन इसमें से प्रशासन को मंत्रालय ने 2 हजार 894 करोड़ रुपये ही दिए हैं।
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सही तरीके से समय पर बजट खर्च न करने वाले विभागों की पहचान करने के लिए प्रशासन ने यह जरूरी कदम उठाया है। फरवरी का बजट वेबसाइट पर अपलोड कर इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। सितंबर में रिवाइज्ड बजट रिपोर्ट तैयार होनी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर वित्त मंत्रालय यह तय करता है कि बजट काटा जाए या नहीं।
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इसी रिपोर्ट के आधार पर ही काफी हद तक अगले वित्त वर्ष का बजट भी निर्धारित होता है। इस साल इसी रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने सितंबर-2015 में प्लान हेड के कुल 860 करोड़ में से 226 करोड़ का बजट काट लिया था। जिसके बाद प्रशासन को अपने खर्चों में 26 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ी।
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वित्त वर्ष 2016-17 में ऐसे हालात न हों इसके लिए प्रशासन ने पहले से तैयारी कर ली है। जिस भी विभाग की मासिक रिपोर्ट ठीक नहीं रहेगी, उसकेएचओडी से भी जवाब मांगा जाएगा। एडवाइजर विजय कुमार देव पहले ही बजट परफॉर्मेंस को एसीआर (एनुएल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट) में दर्ज करने के दिशानिर्देश जारी कर चुके हैं।
इस बार 700 करोड़ बजट मिला
वित्त मंत्रालय ने पिछले साल के मुकाबले इस साल प्लान हेड बजट में 160 करोड़ रुपये कम कर दिए। प्रशासन ने मंत्रालय से प्लान हेड में 2 हजार 95 करोड़ की मांग की थी, जबकि मिले सिर्फ 700 करोड़ रुपये। वहीं नॉन प्लान हेड में 3 हजार 394 करोड़ रुपये मांगे गए थे लेकिन इसमें से प्रशासन को मंत्रालय ने 2 हजार 894 करोड़ रुपये ही दिए हैं।