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बेमिसालः परिजनों ने कराए ब्रेनडेड मनोज के अंगदान, एक शख्स को मिली नई जिंदगी

Fri, 11 Jan 2019 02:56 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 11 Jan 2019 02:56 PM IST
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Chandigarh Boy Manoj Kumar Organs Donated by Family
अंगदान
परिजनों ने अंगदान कराए और मनोज दुनिया से जाते-जाते एक शख्स को नई जिंदगी दे गया। इस हिम्मत भरे काम के लिए परिवार को सलाम। खरड़ के मनोज कुमार के लिवर ने दिल्ली के अस्पताल में दाखिल 47 वर्षीय एक मरीज को नया जीवन दिया है। उनके लिवर को विशेष विमान से दिल्ली भेजा गया था। मरीज नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आफ लिवर एंड बाइलेरी इंस्टीट्यूट (आईएलबीएस) में दाखिल था। चंडीगढ़ और दिल्ली में दोनों जगह ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
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लिवर पहुंचते ही डॉक्टरों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद उसे मरीज में ट्रांसप्लांट कर दिया। पीजीआई के मुताबिक डोनर खरड़ के माजरी गांव का रहने वाला था। सात जनवरी को वह साइकिल से जा रहा था, तभी उसका कार से एक्सीडेंट हो गया। पहले उसे प्राथमिक केंद्र और फिर पीजीआई ले जाया गया। काफी मशक्कत के बाद भी उसकी रिकवरी नहीं हुई तो नौ जनवरी को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। परिजनों से स्वीकृति मिलने के बाद उसका लिवर ठीक पाया गया और उसका मैचिंग ढूंढना शुरू  किया।
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चंडीगढ़ और आसपास कहीं भी उसका मैचिंग वाला मरीज नहीं मिला। बाद में पीजीआई ने नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) से संपर्क किया। काफी कोशिशों के बावजूद आईएलबीएस में दिल्ली का 47 वर्षीय मरीज मिला। दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद पीजीआई में तैयारी शुरू हुई। नौ जनवरी की रात को पीजीआई के डॉक्टरों ने उसका लिवर निकाला और रात करीब साढ़े तीन बजे दिल्ली के लिए रवाना हुए। वहां पहुंचते ही डाक्टरों ने लिवर को एक दूसरे मरीज में ट्रांसप्लांट कर दिया गया।
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इसके अतिरिक्त पीजीआई में दो अन्य ट्रांसप्लांट किए गए। एक एक्सीडेंट में घायल बच्चा कोमा में चला गया। उसकी किडनी एक युवा मरीज में ट्रांसप्लांट की गई, जबकि कोर्निया सुरक्षित रख दी गई। तीसरा मामला कालका के उत्तम चंद का है। दो जनवरी को वह अपने घर पर गिर गए थे। उन्हें पहले सिविल हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, बाद में पीजीआई रेफर कर दिया गया। उत्तम चंद की किडनी सुरक्षित निकालकर जरूरतमंद मरीज में ट्रांसप्लांट की गई।
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