चंडीगढ़: कोरोना प्रभावित वकीलों का सहारा बनी बार काउंसिल, 2800 से अधिक वकीलों को दी 3.28 करोड़ रुपये की मदद
बार काउंसिल ने मानक तय कर वकीलों को मदद दी है। इनमें वकील के पास पांच एकड़ से कम जमीन और खुद की गाड़ी न होना मुख्य आधार था। इसके अलावा परिवार का कोई भी सदस्य किसी सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।
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चंडीगढ़ में कोरोना के कारण वकीलों के सामने जब रोजी-रोटी का संकट आया तो बार कांउसिल उनके सामने मसीहा बनकर आई। काउंसिल ने पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के 2800 से अधिक वकीलों को 3.28 करोड़ रुपये की मदद की। कुछ को यह मदद चेक के रूप में दी गई तो कुछ को सीधे खातों में पैसे भेजे गए। वकीलों ने अपनी माली हालत के बारे में बार काउंसिल को अवगत कराया था।
बार काउंसिल ने मृतक वकीलों के परिवारों के अलावा आर्थिक संकट झेल रहे वकीलों और संक्रमण से पीड़ित वकीलों को सहायता दी। वकीलों को आर्थिक सहायता देने के मानक काउंसिल की ओर से तय किए गए थे। इनमें वकील के पास पांच एकड़ से कम जमीन और खुद की गाड़ी न होना मुख्य आधार था। इसके अलावा परिवार का कोई भी सदस्य किसी सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए। वकीलों की मदद के लिए बार काउंसिल को हरियाणा एडवोकेट फंड से 71.30 लाख मिले। इसके अलावा पंजाब एडवोकेट फंड से एक करोड़ रुपये मिले थे।
इस प्रकार वकीलों को अदा की राशि
- आर्थिक रूप से कमजोर वकीलों को 90.70 लाख रुपये बांटे
- कोरोना से पीड़ित वकीलों को 11 लाख रुपये की सहायता दी
- कोरोना से मरने वाले 55 वकीलों के परिवारों को 55 लाख रुपये की सहायता दी
केस नंबर- 1
फरीदाबाद के एक वरिष्ठ वकील अजय पराशर ने भी बार काउंसिल से सहायता मांगी थी। पहले उनकी पत्नी, फिर बेटा कोरोना संक्रमित हो गए, फिर एक-एक कर दोनों की मौत हो गई। इसके बाद बार कांउसिल ने खुद अजय पराशर की सहायता की।
केस नंबर-2
जालंधर के एक वकील की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। उनकी पत्नी और दो बेटियां बिल्कुल अकेली पड़ गईं। उनके पास आय का कोई साधन नहीं था। इसके बाद वकील की पत्नी रेनु (बदला हुआ नाम) ने ऑटो चलाकर अपनी बेटियों का खर्च उठाना शुरू किया। बार कांउसिल ने उनकी भी सहायता की।
केंद्र से मांगे हैं 100 करोड़ रुपये
तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए पहले से ही तैयारी कर रहे हैं। भारत सरकार से सौ करोड़ रुपये की मांग की गई है। मैंने सरकार को एक पत्र लिखा है। इसके अलावा दिल्ली सरकार की तर्ज पर केंद्र से अस्पतालों में वकीलों की सीट रिजर्व रखने के लिए भी पत्र लिखा गया है। ताकि वकीलों को स्वास्थ्य सेवाओं का सही से लाभ मिल सके। -मिंदरजीत यादव, चेयरमैन, बार काउंसिल
पीड़ित वकीलों से तालमेल बनाकर की सहायता
आवेदन आने के बाद सभी पीड़ित वकीलों से तालमेल के बाद जरूरतमंदों को सहायता प्रदान की गई। वकीलों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि वकालत एक ऐसा पेशा है, जिसमें वकीलों का जनता के साथ सीधा संपर्क होता है, इसलिए वकीलों की सहायता के लिए सरकार से मांग की जा रही है। - बलजिंदर सिंह, सचिव, बार काउंसिल
30 जुलाई के बाद ओर दी जाएगी राशि
हमने दूसरी लहर के बाद भी कोरोना से संक्रमित वकीलों के आवेदन मांगे हैं। अभी 30 जुलाई तक आवेदन की अंतिम तिथि तय की गई है। इसके बाद मृतक वकीलों को एक लाख, कोरोना संक्रमण का अस्पताल में इलाज कराने वाले वकीलों को 50 हजार और एकांतवास में रहने वाले वकीलों को 20 हजार रुपये की राशि देकर सहायता की जाएगी। -प्रताप सिंह, सदस्य बार कांउसिल ऑफ इंडिया