चंडीगढ़ः प्रशासक ने पलटा निगम का फैसला, कहा पीपीपी मॉड पर चलाएं टायलेट्स
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चंडीगढ़ के करीब 300 पब्लिक टायलेट्स के रखरखाव और संचालन के संबंध में लिए गए फैसले को चंडीगढ़ प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने पलट दिया है। प्रशासक ने बुधवार को नगर निगम कमिश्नर को निर्देश जारी किए हैं कि शहर के जो पब्लिक टायलेट्स हैं उनकी खस्ता हालत को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर ही सुधारा जाए। नगर निगम ने पिछले माह हुई सदन की बैठक में पब्लिक टायलेट्स को रखरखाव और संचालन पर पीपीपी मॉड पर देने के लिए जो रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) निकाला था उसे खारिज कर दिया था।
उसके स्थान पर यह फैसला लिया था कि पब्लिक टायलेट्स पर लगने वाले विज्ञापन और संचालन के लिए अलग-अलग टेंडर बनाया जाए। हालांकि इस फैसले के समर्थन में जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं थे। फैसला लेने के बावजूद नगर निगम ने प्रपोजल करने की तारीख को आगे बढ़ा दिया था। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने बुधवार को नगर निगम कमिश्नर को जो पत्र भेजा है उसमें कहा है कि शहर के पब्लिक टायलेट्स की हालत इस समय काफी खस्ता है।
इनमें कई खामियां है, जिसको लेकर आलोचना हो रही है। पब्लिक को काफी परेशानी हो रही है। अगर नगर निगम पब्लिक टायलेट्स की हालत सुधारने के बाद खुद रखरखाव करेगी तो इस पर काफी फंड की जरूरत पड़ेगी। नगर निगम में इस समय फंड का अभाव है। ऐसे में नगर निगम को जनहित में शहर के पब्लिक टायलेट्स पीपीपी मॉड पर चलाने चाहिए। ऐसा होने पर जहां पब्लिक टायलेट्स की रेनोवेशन होगी वहीं नगर निगम को कमाई भी होगी। प्रशासक ने पब्लिक टायलेट्स की सुविधा लोगों को निशुल्क देने की बात की है।
सलाहकार के हस्तक्षेप के बाद हुआ ऐसा
इन पब्लिक टायलेट्स की हालत 4 साल से खस्ता है। लोगों के लिए इनका प्रयोग करना मुश्किल हो गया है। सूत्रों का कहना है कि सदन में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल का टेंडर खारिज करने के बावजूद चंद पार्षद सलाहकार परिमल राय को मिले। परिमल राय ने भी समझा कि अगर पीपीपी मॉड न देकर नगर निगम खुद टायलेट्स के रनोवेशन और रखरखाव करता है तो काफी खर्चा होगा। सलाहकार ने प्रशासक से बात की जिसके बाद प्रशासक ने यह निर्देश दिए हैं।
गुटबाजी से नहीं हो पा रहा था फैसला : बबला
कांग्रेस पार्षद दल के नेता देवेंद्र सिंह बबला का कहना है कि लोगों को सिर्फ इस बात से मतलब है कि उन्हें साफ सुथरे पब्लिक टायलेट्स मिलें। लेकिन लंबे समय से इस पर भाजपा पार्षदों की आपसी गुटबाजी के कारण राजनीति हो रही है। इस कारण पब्लिक टायलेट्स के संचालन और रखरखाव पर देने का फैसला नहीं हो पा रहा था।
प्रशासक का समर्थन : कैंथ
भाजपा पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर ही टायलेट्स का रखरखाव और संचालन हो सकता है। जो पहले इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल निकाला गया था वह उसके खिलाफ नहीं थे, बल्कि इस प्रपोजल में कई खामियां थीं। वे उसके लिए सदन में आवाज उठाते थे। प्रशासक ने जो सलाह दी है वे उसका समर्थन करते हैं।