{"_id":"586397744f1c1b5b26eec588","slug":"chandigarh-administration-year-ender-2016-special-report-on-work-process-with-ups-and-downs","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बाय बाय 2016: चंडीगढ़ प्रशासन के उतार चढ़ाव भरा रहा, देखिए रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाय बाय 2016: चंडीगढ़ प्रशासन के उतार चढ़ाव भरा रहा, देखिए रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 28 Dec 2016 04:14 PM IST
विज्ञापन
चंडीगढ़ के एडवाइजर परिमल राय
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूटी प्रशासन के नजरिए से साल 2016 उतार चढ़ाव से भरा रहा। एक नजर डालिए, पूरे साल घटे ऐसे ही उतार-चढ़ाव की रिपोर्ट पर। जनवरी में ही प्रशासन का चेहरा बदल गया और एक साथ एडवाइजर विजय देव समेत पांच आईएएस अधिकारी ट्रांसफर हो गए। इस्तांबुल से कैपिटल कॉम्प्लेक्स को वर्ल्ड हेरिटेज का स्टेटस मिलने की अच्छी खबर आई। पूरे साल घटे ऐसे ही उतार-चढ़ाव की एक रिपोर्ट।
जनवरी में वीवीआईपी विजिट ने बढ़ाया पारा
वर्ष 2016 बड़ी वीवीआईपी विजिट का गवाह बना। साल के शुरुआती माह जनवरी से ही इसकी शुरुआत हो गई। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने प्रतिनिधिमंडल के साथ चंडीगढ़ का दौरा किया। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलांद को चंडीगढ़ पहुंचने पर रिसीव किया।
इस दौरान रॉक गार्डन, कैपिटल काम्प्लेक्स और गवर्नमेंट आर्ट म्यूजियम एंड गैलरी का दौरा भी किया। साथ ही कई एमओयू भी साइन हुए। इसके बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भी प्रधानमंत्री ने 30 हजार से अधिक लोगों के साथ कैपिटल कॉम्प्लेक्स में योग किया। इससे पहले हुए योग उत्सव में बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर भी चंडीगढ़ आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
जनवरी में वीवीआईपी विजिट ने बढ़ाया पारा
वर्ष 2016 बड़ी वीवीआईपी विजिट का गवाह बना। साल के शुरुआती माह जनवरी से ही इसकी शुरुआत हो गई। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने प्रतिनिधिमंडल के साथ चंडीगढ़ का दौरा किया। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलांद को चंडीगढ़ पहुंचने पर रिसीव किया।
विज्ञापन
इस दौरान रॉक गार्डन, कैपिटल काम्प्लेक्स और गवर्नमेंट आर्ट म्यूजियम एंड गैलरी का दौरा भी किया। साथ ही कई एमओयू भी साइन हुए। इसके बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भी प्रधानमंत्री ने 30 हजार से अधिक लोगों के साथ कैपिटल कॉम्प्लेक्स में योग किया। इससे पहले हुए योग उत्सव में बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर भी चंडीगढ़ आए।
विज्ञापन
17 जुलाई को विश्व पटल पर मिली नई पहचान
Capitol Complex Building, chandigarh
कैपिटल कॉम्प्लेक्स को वर्ल्ड हेरिटेज का स्टेटस मिलने से चंडीगढ़ को विश्व पटल पर नई पहचान मिली। यह अच्छी खबर इस्तांबुल में आयोजित हुई यूनेस्को की मीटिंग से आई। जहां कॉम्प्लेक्स के नाम पर मुहर लगी। ली कार्बूजिए की डिजाइन 7 देशों की 17 साइट विश्व धरोहर बनीं, जिसमें कैपिटल कॉम्प्लेक्स भी एक है। ली कार्बूजिए फाउंडेशन ने इन सभी साइट्स की कॉमन एंट्री यूनेस्को के पास हेरिटेज स्टेटस केलिए भेजी थी। जिसमें भारत से कैपिटल कॉम्प्लेक्स और अकेले फ्रांस से 10 साइट्स थीं। 6 अन्य साइट्स स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी, अर्जेंटिना और जापान से थी।
साइक्लिंग को बढ़ावा देने का चलन
पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव ने शहर में साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए खुद साइकिल से सचिवालय आना शुरू किया। लगभग एक महीना तक वह साइकिल पर ऑफिस आए। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जजों ने भी महीने के पहले दिन साइकिल से आने की शुरुआत की।
स्मार्ट सिटी में आया नाम
स्मार्ट सिटी की दूसरी सूची में चंडीगढ़ का भी नाम आया, जिसके बाद एसपीवी का गठन हो गया। साथ ही इस प्रोजेक्ट के तहत शुरुआती तौर पर 70 करोड़ रुपये का बजट भी मिल गया। इस प्रोजेक्ट के तहत ही सेक्टर-8 से बिजली लाइन को अंडरग्राउंड करने का काम भी शुरू हो गया। हालांकि इससे पहले साल-2016 के शुरुआती दिनों में जारी स्मार्ट शहरों की पहली सूची में चंडीगढ़ का नाम नहीं आया, लेकिन प्रस्ताव में बदलाव करने के बाद यह सौगात शहर को मिली।
साइक्लिंग को बढ़ावा देने का चलन
पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव ने शहर में साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए खुद साइकिल से सचिवालय आना शुरू किया। लगभग एक महीना तक वह साइकिल पर ऑफिस आए। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जजों ने भी महीने के पहले दिन साइकिल से आने की शुरुआत की।
स्मार्ट सिटी में आया नाम
स्मार्ट सिटी की दूसरी सूची में चंडीगढ़ का भी नाम आया, जिसके बाद एसपीवी का गठन हो गया। साथ ही इस प्रोजेक्ट के तहत शुरुआती तौर पर 70 करोड़ रुपये का बजट भी मिल गया। इस प्रोजेक्ट के तहत ही सेक्टर-8 से बिजली लाइन को अंडरग्राउंड करने का काम भी शुरू हो गया। हालांकि इससे पहले साल-2016 के शुरुआती दिनों में जारी स्मार्ट शहरों की पहली सूची में चंडीगढ़ का नाम नहीं आया, लेकिन प्रस्ताव में बदलाव करने के बाद यह सौगात शहर को मिली।
दोगुनी पेंशन का मिला तोहफा
विजय देव, सलाहकार
- फोटो : amar ujala
अप्रैल में बुढ़ापा और विधवा पेंशन को 500 से बढ़ाकर 1 हजार रुपये कर दिया गया। इसके अलावा पेंशन के लिए पारिवारिक वार्षिक आय की शर्त को भी 12 हजार से बढ़ाकर डेढ़ लाख कर दिया गया, जिससे बहुत से नए लोगों को भी पेंशन का लाभ मिलने लगा। पेंशन दोगुनी होने के साथ ही एटीएम से ही पेंशन निकालने के लिए पेंशन धारकों को रुपये एटीएम कार्ड दिए गए।
प्रशासन का बदला चेहरा
मार्च में प्रशासन का चेहरा ही बदल गया। 8 मार्च को एक साथ 4 आईएएस ट्रांसफर होने के आदेशों ने खलबली पैदा कर दी। इससे पहले की कुछ समझ आता अगले ही दिन 9 मार्च को एडवाइजर विजय कुमार देव के भी ट्रांसफर आर्डर आ गए। एक साथ इतने अधिकारियों खासकर विजय देव के ट्रांसफर करवाने का सीधा आरोप सांसद किरण और भाजपा पर लगा। बाद में सांसद खेर ने उनके ट्रांसफर करवाने की बात को स्वीकार भी किया। उनके ट्रांसफर का मुख्य कारण तत्कालीन प्रशासक कप्तान सिंह सोलंकी से बिगड़ना और उनकी बढ़ती लोकप्रियता भी रही।
दशकों से जमे बाबुओं की पहली बार ट्रांसफर
इंटर डिपार्टमेंटल ट्रांसफर पॉलिसी के तहत पहली बार 348 बाबुओं की एक साथ ट्रांसफर कर दी गई। इनमें बहुत से ऐसे थे जो दशकों से इन सीटों पर जमे थे। इसके विरोध में बाबू कैट भी गए लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। सेवानिवृत्ति नजदीक होने वाले कर्मचारियों को वापस उसी डिपार्टमेंट भेज दिया गया। इसके बाद के महीने ट्रांसफर की अगली सूची आने की सुगबुगाहट में ही गुजर गए।
प्रशासन का बदला चेहरा
मार्च में प्रशासन का चेहरा ही बदल गया। 8 मार्च को एक साथ 4 आईएएस ट्रांसफर होने के आदेशों ने खलबली पैदा कर दी। इससे पहले की कुछ समझ आता अगले ही दिन 9 मार्च को एडवाइजर विजय कुमार देव के भी ट्रांसफर आर्डर आ गए। एक साथ इतने अधिकारियों खासकर विजय देव के ट्रांसफर करवाने का सीधा आरोप सांसद किरण और भाजपा पर लगा। बाद में सांसद खेर ने उनके ट्रांसफर करवाने की बात को स्वीकार भी किया। उनके ट्रांसफर का मुख्य कारण तत्कालीन प्रशासक कप्तान सिंह सोलंकी से बिगड़ना और उनकी बढ़ती लोकप्रियता भी रही।
दशकों से जमे बाबुओं की पहली बार ट्रांसफर
इंटर डिपार्टमेंटल ट्रांसफर पॉलिसी के तहत पहली बार 348 बाबुओं की एक साथ ट्रांसफर कर दी गई। इनमें बहुत से ऐसे थे जो दशकों से इन सीटों पर जमे थे। इसके विरोध में बाबू कैट भी गए लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। सेवानिवृत्ति नजदीक होने वाले कर्मचारियों को वापस उसी डिपार्टमेंट भेज दिया गया। इसके बाद के महीने ट्रांसफर की अगली सूची आने की सुगबुगाहट में ही गुजर गए।
नौकरियों में आयु सीमा बढ़ने की सौगात
दाखिला
4 नवंबर को सरकारी नौकरियों में अधिकतम आयु सीमा को 25 वर्ष से बढ़ाकर पंजाब की तर्ज पर 37 वर्ष करने की अच्छी खबर आई। इस फैसले से यूटी के हजारों वह लोग जिनकी आयु सीमा 25 से अधिक हो चुकी थी अब सरकारी नौकरियों में आवेदन करने के योग्य हो गए। सांसद किरण खेर ने संसद में यह मामला उठाने के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से इसे मंजूर करवाया। इस फैसले के बाद स्टेनो, क्लर्क और जूनियर इंजीनियर जैसे टेकिभनकल और नॉन टेकिभनकल पदों के लिए 37 वर्ष तक आवेदन करने की छूट मिल गई।
पीएनजी गैस पाइपलाइन की मिली सौगात
11 नवंबर को शहरवासियों को इंडियन ऑयल कंपनी (आईओसी) और अदानी गैस के संयुक्त प्रोजेक्ट ‘पीएनजी गैस पाइप लाइन कनेक्शन’ की सौगात मिली। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसका उद्घाटन किया। सबसे पहले इस पाइप लाइन की शुरुआत सेक्टर-49 की ईडब्ल्यूएस कॉलोनी से हुई। कॉलोनी में कनेक्शन देने का काम जारी है। मोहाली के पीसीए स्टेडियम और सेक्टर-55-56 की ओर से होते हुए दो जगह से पाइप लाइन चंडीगढ़ पहुंची है।
ट्रिब्यून चौक क्लोवरलीफ फ्लाइओवर को मिली मंजूरी
ट्रिब्यून चौक पर बनने वाले शहर के पहले क्लोवरलीफ फ्लाइओवर के निर्माण पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अंतिम मुहर लगा दी। मंत्रालय ने सभी तरह की मंजूरी देने के साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन को लेटर जारी कर इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट रखने की मंजूरी भी प्रदान कर दी। मंजूरी मिलने के बाद अब प्रशासन कंसल्टेंट के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट भी मांगने वाला है। यह कंसल्टेंट ही पूरे प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगा। दो साल के अंदर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 300 करोड़ रुपये की लागत आएगी। बढ़ती ट्रैफिक समस्या के कारण लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी।
पीएनजी गैस पाइपलाइन की मिली सौगात
11 नवंबर को शहरवासियों को इंडियन ऑयल कंपनी (आईओसी) और अदानी गैस के संयुक्त प्रोजेक्ट ‘पीएनजी गैस पाइप लाइन कनेक्शन’ की सौगात मिली। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसका उद्घाटन किया। सबसे पहले इस पाइप लाइन की शुरुआत सेक्टर-49 की ईडब्ल्यूएस कॉलोनी से हुई। कॉलोनी में कनेक्शन देने का काम जारी है। मोहाली के पीसीए स्टेडियम और सेक्टर-55-56 की ओर से होते हुए दो जगह से पाइप लाइन चंडीगढ़ पहुंची है।
ट्रिब्यून चौक क्लोवरलीफ फ्लाइओवर को मिली मंजूरी
ट्रिब्यून चौक पर बनने वाले शहर के पहले क्लोवरलीफ फ्लाइओवर के निर्माण पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अंतिम मुहर लगा दी। मंत्रालय ने सभी तरह की मंजूरी देने के साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन को लेटर जारी कर इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट रखने की मंजूरी भी प्रदान कर दी। मंजूरी मिलने के बाद अब प्रशासन कंसल्टेंट के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट भी मांगने वाला है। यह कंसल्टेंट ही पूरे प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगा। दो साल के अंदर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 300 करोड़ रुपये की लागत आएगी। बढ़ती ट्रैफिक समस्या के कारण लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी।
सपने जो अधूरे रह गए
मेट्रो ट्रेनें
फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई मेट्रो
मेट्रो प्रोजेक्ट के अड़ंगे दूर करना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा। लगातार माथापच्ची के बाद भी मेट्रो फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई। हालत यह हो गई है कि मेट्रो सपना बनकर ही रह गई है। प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान के तहत इस प्रोजेक्ट में 200 एकड़ जमीन का नया पेंच फंस गया है। जमीन न दे पाने की स्थिति में 1 हजार करोड़ रुपये सालाना की व्यवस्था करनी है। दोनों ही मामलों ने मेट्रो पर रोक लगा रखी है। प्रशासन के पास इस समय अधिग्रहित की गई जमीन में से 600 एकड़ के करीब ही जमीन बची है। यह भी विभिन्न संस्थानों केलिए आरक्षित है। पंजाब और हरियाणा भी इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार हैं इसलिए उन्हें भी यह जानकारी दी जा चुकी है।
नहीं बन पाए वाई-फाई जोन
शहर में वाई-फाई जोन बनाने का सपना भी साकार नहीं हो सका। वाई-फाई जोन के लिए कई बार टेंडर हुए पर किसी कंपनी ने इंटरेस्ट नहीं दिखाया। सुखना लेक, सेक्टर-17 प्लाजा, आईएसबीटी और रेलवे स्टेशन पर वाई-फाई सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रोजेक्ट था, लेकिन कोई न कोई अड़चन इस प्रोजेक्ट में भी अड़ती रही।
मिलते-मिलते रह गए चंडीगढ़ को अलग एडमिनिस्ट्रेटर
केंद्र सरकार की ओर से चंडीगढ़ को अलग से एडमिनिस्ट्रेटर मिलने की खबर आई। केंद्र सरकार ने एलफोंस कन्नानथानम के नाम को मंजूरी दी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद पंजाब सरकार की नाराजगी की वजह से इस फैसले को वापस ले लिया गया। ऐसे में चंडीगढ़ को 32 साल बाद अलग से एडमिनिस्ट्रेटर मिलते-मिलते रह गए। बाद में पहले की ही तरह पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को ही एडमिनिस्ट्रेटर बनाया गया।
वित्त सचिव की कार उठवा ले गए घर
एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों और बाबुओं ने रिटायर्ड जज जेआर मजीठिया के बेटे संजय मजीठिया के नाम उनकी पुश्तैनी कोठी का हिस्सा ट्रांसफर नहीं किया था। कोर्ट के आदेशों केबाद भी बाबू फाइल दबाए बैठे रहे। इस कारण कोर्ट ने अवमानना केकारण पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव सहित 7 अधिकारियों की गाड़ियां और ऑफिस फर्नीचर अटैच करने के आदेश दिए। आदेशों के बाद संजय मजीठिया वित्त सचिव की गाड़ी को अपने घर ही उठवा ले गए थे। कई दिन यह गाड़ी मजीठिया के घर ही खड़ी रही। नौबत यहां तक आ गई थी कि एडवाइजर सहित दूसरे अधिकारियों की गाड़ियों को गैराज में छिपाना पड़ा था। इस पूरे मामले में प्रशासन की जमकर फजीहत हुई थी।
मेट्रो प्रोजेक्ट के अड़ंगे दूर करना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा। लगातार माथापच्ची के बाद भी मेट्रो फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई। हालत यह हो गई है कि मेट्रो सपना बनकर ही रह गई है। प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान के तहत इस प्रोजेक्ट में 200 एकड़ जमीन का नया पेंच फंस गया है। जमीन न दे पाने की स्थिति में 1 हजार करोड़ रुपये सालाना की व्यवस्था करनी है। दोनों ही मामलों ने मेट्रो पर रोक लगा रखी है। प्रशासन के पास इस समय अधिग्रहित की गई जमीन में से 600 एकड़ के करीब ही जमीन बची है। यह भी विभिन्न संस्थानों केलिए आरक्षित है। पंजाब और हरियाणा भी इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार हैं इसलिए उन्हें भी यह जानकारी दी जा चुकी है।
नहीं बन पाए वाई-फाई जोन
शहर में वाई-फाई जोन बनाने का सपना भी साकार नहीं हो सका। वाई-फाई जोन के लिए कई बार टेंडर हुए पर किसी कंपनी ने इंटरेस्ट नहीं दिखाया। सुखना लेक, सेक्टर-17 प्लाजा, आईएसबीटी और रेलवे स्टेशन पर वाई-फाई सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रोजेक्ट था, लेकिन कोई न कोई अड़चन इस प्रोजेक्ट में भी अड़ती रही।
मिलते-मिलते रह गए चंडीगढ़ को अलग एडमिनिस्ट्रेटर
केंद्र सरकार की ओर से चंडीगढ़ को अलग से एडमिनिस्ट्रेटर मिलने की खबर आई। केंद्र सरकार ने एलफोंस कन्नानथानम के नाम को मंजूरी दी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद पंजाब सरकार की नाराजगी की वजह से इस फैसले को वापस ले लिया गया। ऐसे में चंडीगढ़ को 32 साल बाद अलग से एडमिनिस्ट्रेटर मिलते-मिलते रह गए। बाद में पहले की ही तरह पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को ही एडमिनिस्ट्रेटर बनाया गया।
वित्त सचिव की कार उठवा ले गए घर
एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों और बाबुओं ने रिटायर्ड जज जेआर मजीठिया के बेटे संजय मजीठिया के नाम उनकी पुश्तैनी कोठी का हिस्सा ट्रांसफर नहीं किया था। कोर्ट के आदेशों केबाद भी बाबू फाइल दबाए बैठे रहे। इस कारण कोर्ट ने अवमानना केकारण पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव सहित 7 अधिकारियों की गाड़ियां और ऑफिस फर्नीचर अटैच करने के आदेश दिए। आदेशों के बाद संजय मजीठिया वित्त सचिव की गाड़ी को अपने घर ही उठवा ले गए थे। कई दिन यह गाड़ी मजीठिया के घर ही खड़ी रही। नौबत यहां तक आ गई थी कि एडवाइजर सहित दूसरे अधिकारियों की गाड़ियों को गैराज में छिपाना पड़ा था। इस पूरे मामले में प्रशासन की जमकर फजीहत हुई थी।