चंडीगढ़ में बिजली संकट मामला: प्रशासन ने कहा- हड़ताली कर्मियों से होगी वसूली, नुकसान के आकलन में जुटी प्रशासन की टीम
बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ यूटी पावरमैन यूनियन 22 फरवरी को हड़ताल पर चली गई थी। इसके बाद कुछ शरारती तत्वों ने शहर में जगह-जगह बिजली के भूमिगत तार काट कर पूरे शहर को अंधेरे में झोंक दिया।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से कड़ी फटकार के बाद हरकत में आए चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर को गुप अंधेरे में झोंकने वालों से ही अब इस दौरान हुए नुकसान की वसूली का निर्णय लिया है। यह जानकारी चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट को दी है। हड़ताली कर्मचारियों को नुकसान की भरपाई के लिए तैयार रहना होगा। इस बीच, सख्ती के बाद कर्मचारी यूनियन ने हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि वे आगे से हड़ताल पर नहीं जाएंगे।
चंडीगढ़ के डीसी ने हलफनामे के माध्यम से कोर्ट को बताया कि बिजली विभाग की संपत्ति की तोड़फोड़ और नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज एकत्रित की गई हैं। उनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के अनुरूप नुकसान की भरपाई दोषियों से ही की जाएगी।
इस बारे में पुलिस को शिकायत दी जा चुकी है। पुलिस हाजिरी का रजिस्टर भी कब्जे में ले चुकी है। जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 की बिजली की सप्लाई को प्रभावित करने के मामले में भी प्रशासन ने जिन दो जेई को इनकी जिम्मेदारी सौंपी थी, उन्हें निलंबित कर दिया है। डीसी ने हाईकोर्ट को बताया कि कर्मचारियों के खिलाफ एस्मा के तहत दर्ज एफआईआर की जांच के लिए एसपी (सिटी) केतन बंसल की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया है।
हड़ताल को लेकर यूटी पावरमैन यूनियन और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच समझौता हुआ था। उस समझौते के बावजूद जो कर्मी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे थे ऐसे 143 कर्मचारियों के खिलाफ एस्मा के तहत करवाई की जा रही है। इनमें से 17 को बर्खास्त किया जा चुका है। बाकी 126 कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कर्मचारी यूनियन को भी जमकर फटकार लगाई। यूटी पावरमैन यूनियन ने हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि वह आगे हड़ताल पर नहीं जाएंगे और इस हड़ताल के लिए प्रशासन कर्मियों के खिलाफ जो कार्रवाई कर रहा है, उसमे कोई दखल नहीं देंगे।
यूटी पावरमैन यूनियन की हड़ताल पर हाईकोर्ट ने लिया था संज्ञान
बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ यूटी पावरमैन यूनियन 22 फरवरी को हड़ताल पर चली गई थी। इसके बाद कुछ शरारती तत्वों ने शहर में जगह-जगह बिजली के भूमिगत तार काट कर पूरे शहर को अंधेरे में झोंक दिया। इसका संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के चीफ इंजीनियर को तलब कर लिया था।
चीफ इंजीनियर ने बताया कि प्रशासन का यूनियन से समझौता हो गया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि एक तरफ एस्मा लगा कार्रवाई की बात हो रही है और दूसरी ओर प्रशासन कर्मचारियों के सामने घुटने टेक रहा है। यह तो यूनियन के पैरों पर गिरने जैसा है। अगर समझौता ही करना है तो निजीकरण के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रहे मामले को भी अपने पास भेज देते हैं उसका भी समझौता कर लो। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने 23 फरवरी की शाम को एस्मा भी लगा दिया।