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चंडीगढ़ प्रशासन अगले तीन महीने में नगर निगम को देगा 90 करोड़, हो गई पांच करोड़ की कटौती
Tue, 14 Jul 2020 11:01 AM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 14 Jul 2020 11:01 AM IST
सार
- तीन महीने के बजट में पांच करोड़ की कटौती, नगर निगम की समस्या और बढ़ी
- 340 करोड़ की ग्रांट के हिसाब से प्रशासन ने अगले तीन माह के फंड को दी स्वीकृति
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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विस्तार
जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने नगर निगम को बजट की स्वीकृति दे दी है। इस बार निगम का बजट 5 करोड़ रुपये घटाकर 30 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किया गया है। इससे निगम के सामने विकास कार्यों को लेकर समस्या और बढ़ गई है। कोरोना के कारण प्रशासन ने निगम के फंड में कटौती की है। इस वित्तीय वर्ष में नगर निगम के लिए प्रशासन ने 425 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था।
कोरोना के कारण बजट में कटौती कर दी गई, जिसके बाद निगम के पास 340 करोड़ का ही बजट बचा है। प्रशासन की ओर से अप्रैल व मई के लिए 35 करोड़ रुपये जबकि जून के लिए 34 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। अब जुलाई, अगस्त व सितंबर के लिए 340 करोड़ रुपये के हिसाब से 30-30 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए गए हैं। ऐसे में निगम के सामने विकास कार्यों के लिए फिर से फंड की कमी बड़ी चुनौती बनेगी।
पहले त्रैमासिक फंड मिलता था, अब हर माह के लिए स्वीकृति
पहले निगम को हर तीसरे माह फंड स्वीकृत होता था। इस तरह पूरे वित्तीय वर्ष में निगम को चार तिमाही किस्तें मिलतीं थीं। अब प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि फंड हर माह के हिसाब से दिया जाएगा। पहले तीन माह के हिसाब से निगम ने 35 करोड़ तो अब 30 करोड़ ही स्वीकृत किया गया है। अधिकारियों का मानें तो स्थिति ठीक नहीं हुई तो फंड और भी घट सकता है।
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कोरोना के कारण बजट में कटौती कर दी गई, जिसके बाद निगम के पास 340 करोड़ का ही बजट बचा है। प्रशासन की ओर से अप्रैल व मई के लिए 35 करोड़ रुपये जबकि जून के लिए 34 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। अब जुलाई, अगस्त व सितंबर के लिए 340 करोड़ रुपये के हिसाब से 30-30 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए गए हैं। ऐसे में निगम के सामने विकास कार्यों के लिए फिर से फंड की कमी बड़ी चुनौती बनेगी।
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पहले त्रैमासिक फंड मिलता था, अब हर माह के लिए स्वीकृति
पहले निगम को हर तीसरे माह फंड स्वीकृत होता था। इस तरह पूरे वित्तीय वर्ष में निगम को चार तिमाही किस्तें मिलतीं थीं। अब प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि फंड हर माह के हिसाब से दिया जाएगा। पहले तीन माह के हिसाब से निगम ने 35 करोड़ तो अब 30 करोड़ ही स्वीकृत किया गया है। अधिकारियों का मानें तो स्थिति ठीक नहीं हुई तो फंड और भी घट सकता है।
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580 करोड़ का बजट, 597 करोड़ के खर्चे
हाल ही में आयोजित सदन की बैठक में निगम कमिश्नर केके यादव ने कहा था कि हमारे पास कुल 580 करोड़ का बजट है जबकि अनिवार्य खर्चे 597 करोड़ के हैं। इसके अलावा 121 करोड़ के कार्य जो कि आवंटित हो चुके हैं, उनके लिए भी फंड की व्यवस्था की जानी है। प्रशासन से 340 करोड़ व निगम का अपना रेवन्यू 321 करोड़ मिलाकर भी खर्च पूरा नहीं हो पा रहा है।
कोविड सेस के 20 करोड़ को एमएचए के निर्देश के बिना उपयोग नहीं कर सकते हैं। बता दें कि निगम को 420 करोड़ रुपये सैलरी के, 50 करोड़ रुपये पेंशन के जबकि 120 करोड़ रुपये बिजली बिल अनिवार्य रूप से देने ही हैं। इस प्रकार निगम को फंड से 17 करोड़ रुपये और अधिक चाहिए। ताकि जरूरी कार्यों को पूरा किया जा सके।
प्रशासन ने कहा- अपना रेवेन्यू बढ़ाए निगम प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि निगम अपना रेवेन्यू बढ़ाए। अभी सड़क निर्माण के लिए 63 करोड़ और पानी सप्लाई के लिए 39 करोड़ रुपये बचे हैं। गांव के विकास कार्यों पर 12 करोड़ खर्च हो चुके हैं जबकि 13 करोड़ बचे हैं।
वहीं डार्क स्पॉट पर 10 करोड़ खर्च हो चुके हैं और साढ़े 9 करोड़ बचे हैं। रही बात रेवेन्यू बढ़ाने की तो पानी बिल से जहां 150 करोड़ आना था अब 100 करोड़ ही रह गया है। वहीं पार्किंग, सामुदायिक केंद्र भी बड़े रेवेन्यू के माध्यम थे, अब वह भी समाप्त हो गए।
कोविड सेस के 20 करोड़ को एमएचए के निर्देश के बिना उपयोग नहीं कर सकते हैं। बता दें कि निगम को 420 करोड़ रुपये सैलरी के, 50 करोड़ रुपये पेंशन के जबकि 120 करोड़ रुपये बिजली बिल अनिवार्य रूप से देने ही हैं। इस प्रकार निगम को फंड से 17 करोड़ रुपये और अधिक चाहिए। ताकि जरूरी कार्यों को पूरा किया जा सके।
प्रशासन ने कहा- अपना रेवेन्यू बढ़ाए निगम प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि निगम अपना रेवेन्यू बढ़ाए। अभी सड़क निर्माण के लिए 63 करोड़ और पानी सप्लाई के लिए 39 करोड़ रुपये बचे हैं। गांव के विकास कार्यों पर 12 करोड़ खर्च हो चुके हैं जबकि 13 करोड़ बचे हैं।
वहीं डार्क स्पॉट पर 10 करोड़ खर्च हो चुके हैं और साढ़े 9 करोड़ बचे हैं। रही बात रेवेन्यू बढ़ाने की तो पानी बिल से जहां 150 करोड़ आना था अब 100 करोड़ ही रह गया है। वहीं पार्किंग, सामुदायिक केंद्र भी बड़े रेवेन्यू के माध्यम थे, अब वह भी समाप्त हो गए।
मेयर की गठित कमेटी पर लगी आस
रेवेन्यू बढ़ाने के लिए मेयर राजबाला मलिक ने सात सदस्यीय कमेटी गठित की है। 7 जुलाई को हुई पहली बैठक में सदस्यों ने निगम से खाली पड़ी भूमि, विवादित भूमि व निगम को आने वाले रेवेन्यू की रिपोर्ट मांगी थी। वहीं नई गाड़ी खरीदने व प्रोपर्टी खरीदने पर निगम टैक्स, बाहर से आने वाली गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स लगाने के साथ ही होटल व ढाबों के बाहर स्थायी टेबल कुर्सी लगाने की पॉलिसी लाने का भी सुझाव दिया गया है।
प्रशासन की ओर से अगले तीन माह के फंड की स्वीकृति मिल गई है। इस बार प्रत्येक माह के लिए 30 करोड़ रुपये का ही फंड मिला है। रेवेन्यू बढ़ाने वाली कमेटी जो निर्णय करेगी उसके अनुसार आगे का फैसला लिया जाएगा।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
प्रशासन की ओर से अगले तीन माह के फंड की स्वीकृति मिल गई है। इस बार प्रत्येक माह के लिए 30 करोड़ रुपये का ही फंड मिला है। रेवेन्यू बढ़ाने वाली कमेटी जो निर्णय करेगी उसके अनुसार आगे का फैसला लिया जाएगा।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम