चंडीगढ़: लीज होल्ड नीति में बदलाव करेगा प्रशासन, सभी संपत्तियों को फ्री होल्ड कर होगी नीलामी
अगर कन्वर्जन को केंद्र सरकार मंजूरी दे देती है तो इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री हो सकेगी। नई इंडस्ट्री के लिए चंडीगढ़ में आने की संभावना बढ़ेगी, क्योंकि लीज होल्ड प्रॉपर्टी पर लोन नहीं होता।
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यूटी प्रशासन लीज होल्ड नीति में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि मंगलवार को एक बैठक के दौरान ये फैसला लिया गया है कि अब भविष्य में जिन संपत्तियों की नीलामी होगी, वह फ्री होल्ड होंगे। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसे जल्द ही प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
शहर में आवासीय संपत्तियों को छोड़ लगभग सभी संपत्तियों की नीलामी लीज होल्ड के आधार पर की जाती है। इसका नुकसान प्रशासन को पिछले काफी समय से उठाना पड़ रहा है, क्योंकि लीज होल्ड होने की वजह से लोग इनमें रुचि नहीं दिखाते और सालों-साल प्रशासन की व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियां बिक नहीं पाती हैं।
शहर के कई इलाकों में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, नगर निगम और एस्टेट ऑफिस की संपत्तियां हैं, जो खाली पड़ी हैं और उन्हें कोई खरीदार नही मिला है। इसमें कई सेक्टरों में बने बूथ भी हैं। इंडस्ट्रियल एरिया की संपत्ति भी इसमें शामिल है। इस वजह से सलाहकार धर्मपाल ने सभी अधिकारियों के साथ एक बैठक की और ये फैसला लिया गया कि भविष्य में अस्पताल, व्यावसायिक व अन्य संपत्तियों के लिए जो नीलामी की जाएगी, वह सभी फ्री होल्ड होंगी। धर्मपाल ने कहा कि इससे संपत्तियों को खरीदार ज्यादा मिलेंगे और लोग भी रुचि दिखाएंगे। बताया कि प्रस्ताव तैयार किया गया है और जल्द ही प्रशासक के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
केंद्र सरकार को भी भेजा गया है प्रस्ताव
चंडीगढ़ प्रशासन ने इंडस्ट्रियल प्लॉट को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, काफी समय से इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इसलिए प्रशासन ने नई संपत्तियों की नीलामी के लिए नीति में बदलाव करने का मन बना लिया है। इसके पीछे कई कारण हैं।
इज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर केंद्र सरकार जितनी बार रैंकिंग जारी करता है, उसमें चंडीगढ़ पीछे ही रहा है। लीज होल्ड से फ्री होल्ड कन्वर्जन को मंजूरी मिलने के बाद एक तरफ इज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहन मिलेगा। इसे प्रशासन को जहां ज्यादा राजस्व मिलेगा, वहीं चंडीगढ़ की अर्थव्यवस्था में भी तेजी आएगी और निवेश भी बढ़ेगा।
लीज पर 80 फीसदी व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्ति
पिछले कई साल से चंडीगढ़ के उद्योगपति, कारोबारी चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार से प्रॉपर्टी कन्वर्जन को शुरू करने की मांग उठा रहे हैं। चंडीगढ़ में करीब 80 फीसदी व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्ति लीज पर है। अगर कन्वर्जन को केंद्र सरकार मंजूरी दे देती है तो इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री हो सकेगी। नई इंडस्ट्री के लिए चंडीगढ़ में आने की संभावना बढ़ेगी, क्योंकि लीज होल्ड प्रॉपर्टी पर लोन नहीं होता।