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चंडीगढ़ मेट्रो: बजट जुटाने के लिए पेट्रोल पर मेट्रो सेस की तैयारी

Tue, 12 Apr 2016 12:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 12 Apr 2016 12:50 PM IST
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chandigarh administration will be cast Metro cess on petrol for metro budget
चंडीगढ़़ मेट्रो परियोजना - फोटो : demo pics

ट्रैक पर उतरने से पहले ही मेट्रो रेल सवालों के घेरे में हैं। मेट्रो चलती भी है तो इसका भार ट्राइसिटी के बाशिंदों की जेब पर ही पड़ेगा। फंड जुटाने के लिए प्रशासन अलग से सेस लगाने की तैयारी में है। पेट्रोल पर मेट्रो सेस लगेगा।

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साथ ही नए कामर्शियल वाहनों पर भी ग्रीन एंट्री सेस लगाया जाएगा। सेस लगाने का प्रावधान क्या होगा यह अभी तय नहीं हुआ है। साथ ही फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) बढ़ाने की भी तैयारी है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय पहले ही प्रशासन से फंड कहां से जुटाने का सवाल पूछ चुका है।
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मेट्रो का पूरा प्रोजेक्ट करीब 13, 909 करोड़ रुपये में पूरा होना है। देरी केकारण यह बजट बढ़ता ही जा रहा है। 2012 में मेट्रो की जो डीपीआर तैयार हुई थी, वह 10,900 करोड़ रुपये के बजट एस्टीमेट की थी। लेकिन देरी होने से यह बजट 3 हजार करोड़ तक बढ़ गया है।
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चंडीगढ़ केसाथ मेट्रो मोहाली और पंचकूला को भी कवर करेगी। ऐसे में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार पूरे प्रोजेक्ट में पार्टनर हैं। बात फंड की करें तो पूरे प्रोजेक्ट फंड का 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, 25 प्रतिशत चंडीगढ़ प्रशासन और बचा 25 प्रतिशत पंजाब और हरियाणा को देना है। हालांकि पंजाब और हरियाणा पूरे प्रोजेक्ट पर अपनी लिखित सहमति दे चुकेहैं। लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन के सामने फंड जुटाने की समस्या बनी हुई है।

ऑक्शन का भी नहीं मिलेगा फायदा
4 साल पहले जब मेट्रो की डीपीआर तैयार करने का काम शुरू हुआ था, उस समय प्रशासन ने अपनी जमीन की ऑक्शन से फंड जुटाने की बात सोच रखी थी। लेकिन बाद में स्मार्ट सिटी के लिए भी फंड की आवश्यक्ता आ पड़ी। स्मार्ट सिटी के लिए प्रशासन को करीब 500 करोड़ रुपये अपनी तरफ से जुटाने हैं। इसकेलिए भी प्रशासन जमीन की ऑक्शन से ही यह बजट जुटाने की बात कह रहा है। ऐसे में दोनों में से एक प्रोजेक्ट केलिए ही ऑक्शन से बजट जुटाया जा सकता है। दूसरे के लिए फंड जुटाने के अलग रास्ते तलाशने होंगे।

फ्रांस कर चुका है मदद की पेशकश
मेट्रो प्रोजेक्ट केलिए प्रशासन फ्रांस और जापान से आर्थिक मदद लेगा। जापान की कंपनी से इसके लिए लोन लेने की बात चल रही है। फ्रांस पहले ही मेट्रो प्रोजेक्ट में मदद की पेशकश कर चुका है। फ्रांस की कई कंपनियां चंडीगढ़ मेट्रो में अपनी रुचि भी दिखा चुकी हैं। साथ ही अधिकारियों से इसको लेकर मीटिंग भी हो चुकी है।


सांसद नहीं चाहती शहर में मेट्रो
सांसद किरण खेर चंडीगढ़ में मेट्रो चलाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। वह कई बार यह बात स्पष्ट कर चुकी हैं। मेट्रो की बजाए वह मोनो रेल चलाए जाने की दलील दे चुकी हैं। खर्चीला प्रोजेक्ट होने के साथ शहर का ढांचा बिगड़ने की बात कहकर कई अन्य लोग भी मेट्रो चलने के पक्ष में नहीं है।

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