कोरोना काल के सात महीने में चंडीगढ़ प्रशासन ने खर्च किया बजट का 48 फीसदी हिस्सा
- कोविड के दौरान प्रशासन ने दफ्तर के नाम पर 40.04 करोड़, छात्रवृत्ति पर महज 3 लाख खर्च किए
- चिकित्सा उपचार के बजट का 42.17 फीसदी तो तनख्वाह के बजट का 61.72 फीसदी किया खर्च
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ प्रशासन ने कोरोना काल के सात महीनों के दौरान अपने बजट का 48 फीसदी पैसा ही खर्च किया है। प्रशासन को कैपिटल और रेवेन्यू हेड के तहत 2020-21 के लिए 5138.10 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से प्रशासन बीते 31 अक्तूबर तक 2466.27 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें रेवेन्यू हेड के तहत मिले 4643.96 करोड़ में से 2340.62 करोड़ जबकि कैपिटल हेड के तहत मिले 494.14 करोड़ में से 125.65 करोड़ खर्च किए गए हैं। यह कुल बजट का 48 फीसदी है।
आम बजट में चंडीगढ़ को इस वर्ष 384 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ 5138.10 करोड़ रुपये मिले हैं। बजट की घोषणा 1 फरवरी को की गई थी। इसके बाद मार्च में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लग गया। प्रशासन को बजट में सबसे ज्यादा तनख्वाह, वेजेज, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) और ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) के लिए कुल 3185.45 करोड़ रुपये मिले थे।
प्रशासन ने इसमें से 1735.38 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। प्रशासन ने वेतन के बजट का 61.72 फीसदी, वेजेज का 55.60 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) का 59.28 फीसदी, सप्लाई व मैटीरियल का 45.93 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) का 35.22 फीसदी खर्च किया है।
वहीं, ऑफिस के खर्चे के नाम पर 114.12 करोड़ में से 40.04 करोड़ रुपये इस्तेमाल किया है। खर्चों की यह जानकारी 1 अप्रैल 2020 से 31 अक्तूबर 2020 तक की है। गौरतलब है कि प्रशासन ने कोविड फंड से भी सिर्फ 47.8 फीसदी राशि खर्च की है। इस पर वित्त सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि प्रशासन के पास कई तरह की सुविधाएं पहले से ही मौजूद थीं, इसलिए प्रशासन को कम खर्च करना पड़ा।
विदेश यात्रा के बजट में से एक रुपया भी नहीं हुआ खर्च
कोरोना वायरस की वजह से कई महीनों तक यात्रा पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहा। हालांकि अनलॉक की प्रक्रिया के शुरू होने के बाद केंद्र सरकार ने अनुमति के आधार पर यात्राओं की मंजूरी दे दी गई थी लेकिन प्रशासन की तरफ से की गई सख्तियों की वजह से इस साल विदेश यात्रा के लिए मिले 80 लाख रुपये के बजट में से एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा सका।
वहीं, घरेलू यात्रा के 3.06 करोड़ के बजट में से 26 लाख ही खर्च किया गया। यह 8.5 फीसदी है। प्रशासन को छात्रवृत्ति व वजीफे के लिए मिले 5.63 करोड़ के बजट में से तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं, यानी महज 0.53 प्रतिशत। कैपिटल बजट में मोटर वाहन के लिए मिले 30.31 करोड़ में से सिर्फ 83 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रशासन ने कोरोना के दौरान नई गाड़ियों की खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया था।
वित्त वर्ष 2021-22 के लिए चंडीगढ़ ने मांगे 5670.31 करोड़ रुपये
यूटी प्रशासन ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 5670.31 करोड़ रुपये की मांग की है। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 5300 करोड़ रुपये बजट में मांगे गए थे लेकिन केंद्र ने 5138.10 करोड़ ही चंडीगढ़ की झोली में डाला था। इस वर्ष कोरोना वायरस की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन ने पिछले साल से 370.31 करोड़ रुपये ज्यादा मांगे हैं।
वहीं, अक्तूबर माह में संशोधित बजट में प्रशासन ने 36.11 करोड़ रुपये की मांग की है। इसके साथ प्रशासन का मौजूदा वित्तीय वर्ष का कुल बजट 5174.21 करोड़ रुपये हो गया है। गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक पत्र जारी कर केंद्र शासित प्रदेशों से 30 सितंबर तक रिवाइज्ड एस्टीमेट की मांग की थी। वर्ष 2020-21 के लिए मिले बजट के खर्चे, वर्तमान स्थिति और जरूरत को देखने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन हर साल रिवाइज्ड एस्टीमेंट की मांग करता है। स्थिति का आकलन करने के बाद केंद्र सरकार जरूरत के अनुसार बजट जारी करता है।
अप्रैल से हर तिमाही के खर्चे में 20 प्रतिशत की कटौती
कोरोना के प्रभाव को देखते हुए प्रशासन अप्रैल से हर तिमाही के खर्चे में 20 प्रतिशत की कटौती कर रहा है। प्रशासन ने सभी विभागों को अपने खर्चों को सीमित करने की भी सलाह दी है। विभागों के खर्चों में प्रशासन ने अप्रैल में 8 प्रतिशत, मई में 6, जून में 6 प्रतिशत, जुलाई में 8 प्रतिशत, अगस्त में 6 प्रतिशत, सितंबर में 6 प्रतिशत, अक्तूबर में 8 प्रतिशत, नवंबर में 6 प्रतिशत और दिसंबर में 6 प्रतिशत की कटौती की है।
इसके अलावा नए वाहनों की खरीद व एलटीए पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया है। सभी ठेका कर्मचारियों का डीसी रेट्स फ्रीज करने, भर्तियों को टालने व इंजीनियरिंग विभाग को मौजूदा प्रोजेक्ट पर ही ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार इन्हीं दिशा-निर्देशों के तहत प्रशासन ने इस बार अभी तक बजट का 48 फीसदी ही खर्च कर पाया है।