जागा चंडीगढ़ प्रशासन: मनचंदा बुक स्टोर समेत 10 दुकानों की जांच, सभी को कारण बताओ नोटिस जारी
डीईओ ने निजी स्कूलों को निर्देश जारी किया है कि सभी स्कूल किताबों और यूनिफार्म की डिटेल कक्षा के अनुसार नोटिस बोर्ड पर चस्पा और वेबसाइट पर अपलोड करें। इसके साथ यह भी लिखा जाए कि अभिभावक जहां से चाहें किताबें और ड्रेस खरीद सकते हैं।
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ग्राहकों को बिल न देने की शिकायत पर सोमवार को आबकारी एवं कराधान विभाग ने शिक्षा विभाग की टीम के साथ सेक्टर-19 स्थित मनचंदा बुक स्टोर समेत कॉपी-किताब व यूनिफॉर्म बेचने वाली दस प्रमुख दुकानों की जांच की। शहर में एक साथ इतनी दुकानों की जांच से हड़कंप मच गया। जांच में कुछ मामलों में मिली अनियमितताओं के बाद प्रशासन ने सभी दुकान संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। इनकी कुल कीमत करीब दो लाख रुपये बताई गई है।
बता दें कि कोरोना काल के बाद सोमवार से शहर के स्कूल खुल गए हैं। नए शैक्षणिक सत्र के लिए कॉपी-किताब व यूनिफॉर्म की दुकानों पर अभिभावकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। शिकायत के बाद प्रशासन की आंखें खुली हैं और कार्रवाई शुरू की गई है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई अभी जारी रहेगी। सोमवार को हुई जांच ईटीओ शिखा कोचर, आशीष शर्मा, निर्पजीत कौर और अमनप्रीत सिंह ने की है।
सेक्टर-19 स्थित मनचंदा बुक स्टोर पर सोमवार को आबकारी एवं कराधान विभाग ने शिक्षा विभाग की टीम के साथ शटर बंद कर चेकिंग की। कुछ देर बाद फिर से दुकान के कर्मचारी ग्राहकों के साथ किताबों का लेनदेन करने लगे। किताब खरीदने के लिए शाम तक दुकान के बाहर अभिभावकों की लंबी कतार लगी रही।
कर्मचारियों ने पहले की तरह टोकन के आधार पर अभिभावकों को किताबें दीं। जिला शिक्षा अधिकारी प्रभजोत कौर ने बताया कि टीम नियमित जांच के लिए गई थी। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। विभागीय अधिकारियों की टीम स्टोर की ओर से किसी ग्राहक को बिल नहीं देने की शिकायत पर जांच करने गई थी।
इन दुकानों की हुई जांच
आबकारी और कराधान विभाग के अधिकारियों ने सेक्टर-22 के पॉपुलर बुक डिपो, हैप्पी बुक डिपो, मॉडर्न बुक स्टोर, सेक्टर-23 के रमेश बुक स्टोर, सेक्टर-19 के मनचंदा मिक्स बैग, सुरेंद्र स्टेशनर्स, कृष्णा ट्रेडर्स, मनीमाजरा के बाबा गारमेंट्स, नवीन होजरी और सेक्टर-46 के पॉल बुक डिपो की जांच की।
शहर में सिर्फ पांच दुकानों पर ही क्यों मिल रहीं किताबें: पार्षद हरप्रीत कौर बबला
भाजपा पार्षद हरप्रीत कौर बबला ने सोमवार को प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल को पत्र लिखकर कहा है कि तीन दिन से देख रहे हैं कि परिजन दुकानों के बाहर लाइन लगाकर बच्चों की किताबें व ड्रेस खरीद रहे हैं। शहर में किताब खरीदने के लिए सिर्फ पांच दुकानें हैं। प्रशासन चुपचाप तमाशा देख रहा है।
स्कूल प्रबंधक अभिभावकों को यह कहते हैं कि इन्हीं दुकानों से किताबें खरीदें। वहीं, दुकानदार मनमाना दाम वसूलते हैं। इसी तरह स्कूलों की ड्रेस भी चुनिंदा दुकानों पर ही मिलती हैं। किताब और ड्रेस के नाम पर परिजनों को लूटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि किताबें और ड्रेस शहर की हर स्टेशनरी की दुकान पर मिलें।
स्कूल किताबों और यूनिफार्म की डिटेल नोटिस बोर्ड पर लगाएं
डीईओ ने निजी स्कूलों को निर्देश जारी किया है कि सभी स्कूल किताबों और यूनिफार्म की डिटेल कक्षा के अनुसार नोटिस बोर्ड पर चस्पा और वेबसाइट पर अपलोड करें। इसके साथ यह भी लिखा जाए कि अभिभावक जहां से चाहें किताबें और ड्रेस खरीद सकते हैं। विभाग को जानकारी मिली है कि कुछ स्कूल किताबें, स्टेशनरी और ड्रेस के लिए अभिभावकों को तय दुकानों से ही खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसको लेकर विभाग ने पहले भी निर्देश जारी किए हैं। आदेश की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक किसी तरह की परेशानी होने पर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
टीमों को अपने-अपने क्षेत्र में पड़ने वाले सभी बुक डिपुओं की जांच के आदेश दिए गए थे। विभाग का उद्देश्य है कि किसी भी सामान के खरीद में बिलिंग ठीक से हो, इसलिए मनचंदा बुक डिपो पर सोमवार को नियमित जांच की गई। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। मंगलवार को रिपोर्ट के आने की उम्मीद है। रिपोर्ट में यदि कोई अनियमितता मिली तो चालान किया जाएगा। - रणधीर सिंह, सहायक आबकारी एवं कराधान आयुक्त