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चंडीगढ़ में जल्द लागू हो जाएगी दो साल से लटकी नई पार्किंग पॉलिसी, जानिए क्या है मुख्य बातें
Thu, 18 Jul 2019 11:21 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 18 Jul 2019 11:21 AM IST
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फाइल फोटो
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चंडीगढ़ में बढ़ रहे वाहनों के दबाव को कम करने के लिए प्रशासन जल्द ही पार्किंग पॉलिसी को अंतिम रूप देने पर विचार कर रहा है। एडवाइजर मनोज परिदा के निर्देश पर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट जल्द ही अर्बन प्लानिंग, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट, आर्किटेक्ट, नगर निगम और ट्रांसपोर्ट विभाग से जुड़े अफसरों की एक उच्चस्तरीय मीटिंग बुला ली गई है।
बताते चलें कि कई कमियों के चलते पार्किंग पॉलिसी बीते दो साल से अधर में लटकी है। शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या को देखते हुए यूटी प्रशासन ने पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट दो साल पहले तैयार किया था। इसका मकसद शहर में बढ़ती गाड़ियों की संख्या पर लगाम लगाना था। लेकिन कई कमियों के चलते यह पॉलिसी अब तक अस्तित्व में नहीं आ सकी है। उधर, हालात यह हैं कि शहर में अब पार्किंग के लिए स्पेस तक नहीं बचा है। लोग रोड और फुटपाथ पर वाहन पार्क कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन ने एक बार फिर नई पार्किंग पॉलिसी को लागू करने की कवायद शुरू की है।
कंपनियों ने जताया था विरोध
अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट के अधिकारियों की मानें तो पार्किंग पॉलिसी के ड्राफ्ट में मल्टीनेशनल कंपनियों को लेकर भी एक प्वाइंट शामिल है। इसमें यह शर्त रखी गई है कि जिस कंपनी में 50 से ऊपर कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें अपने कर्मचारियों के लिए अलग से स्टाफ बस रखना अनिवार्य होगा। ड्राफ्ट में शामिल इस प्वाइंट पर भी कई कंपनियों ने आपत्ति जताई है। इन कंपनियों का कहना है कि हर इंपलाइज को ट्रांसपोर्ट अलाउंस दिया जाता है, इसके अलावा महिला कर्मचारियों के लिए कैब सर्विस भी शुरू की है। इसकी जगह कंपनियों ने इस कंडीशन को बदलने के लिए कहा है।
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बताते चलें कि कई कमियों के चलते पार्किंग पॉलिसी बीते दो साल से अधर में लटकी है। शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या को देखते हुए यूटी प्रशासन ने पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट दो साल पहले तैयार किया था। इसका मकसद शहर में बढ़ती गाड़ियों की संख्या पर लगाम लगाना था। लेकिन कई कमियों के चलते यह पॉलिसी अब तक अस्तित्व में नहीं आ सकी है। उधर, हालात यह हैं कि शहर में अब पार्किंग के लिए स्पेस तक नहीं बचा है। लोग रोड और फुटपाथ पर वाहन पार्क कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन ने एक बार फिर नई पार्किंग पॉलिसी को लागू करने की कवायद शुरू की है।
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कंपनियों ने जताया था विरोध
अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट के अधिकारियों की मानें तो पार्किंग पॉलिसी के ड्राफ्ट में मल्टीनेशनल कंपनियों को लेकर भी एक प्वाइंट शामिल है। इसमें यह शर्त रखी गई है कि जिस कंपनी में 50 से ऊपर कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें अपने कर्मचारियों के लिए अलग से स्टाफ बस रखना अनिवार्य होगा। ड्राफ्ट में शामिल इस प्वाइंट पर भी कई कंपनियों ने आपत्ति जताई है। इन कंपनियों का कहना है कि हर इंपलाइज को ट्रांसपोर्ट अलाउंस दिया जाता है, इसके अलावा महिला कर्मचारियों के लिए कैब सर्विस भी शुरू की है। इसकी जगह कंपनियों ने इस कंडीशन को बदलने के लिए कहा है।
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रोड साइड पार्किंग पर एक हजार का हो चालान
भेजे गए सुझाव में 25 से 30 के करीब लोग ऐसे हैं, जिन्होंने सड़क किनारे गलत जगह गाड़ी पार्क करने पर प्रतिदिन एक हजार रुपये चालान राशि को बढ़ाने का सुझाव दिया है ताकि ट्रैफिक जाम से बचा जा सके।
50 प्रतिशत ज्यादा पार्किंग फीस
पार्किंग पॉलिसी ड्राफ्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा में रजिस्टर्ड वाहनों को छोड़कर अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को पार्किंग के लिए 50 प्रतिशत अधिक पार्किंग फीस देनी होगी। इसके अलावा जिन घरों में पार्किंग की पर्याप्त जगह हैं, उन्हें प्रापर्टी टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
देना होगा पार्किंग स्पेस सर्टिफिकेट
गाड़ी खरीदते समय लोगों को पार्किंग स्पेस सर्टिफिकेट देना होगा। यहीं गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के वक्त ये सर्टिफिकेट देना जरूरी होगा कि इस गाड़ी को आप कहां खड़ा करेंगे, आपके पास इसको खड़ा करने के लिए जगह है या नहीं। अगर आपके पास गाड़ी पार्क करने की जगह नहीं होगी, तो आप अपनी गाड़ी की रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकेंगे।
प्लाट के बाहर गाड़ी पार्क करने पर जुर्माना
पार्किंग पॉलिसी के ड्राफ्ट के मुताबिक, शहर में एक कनाल या उससे ऊपर के प्लाट के बाहर सड़क पर या सड़क के किनारे गाड़ी पार्क करने पर पूरी तरह पाबंदी होगी। ऐसे करने पर वाहन जब्त कर चालान करने का प्रावधान होगा।
50 प्रतिशत ज्यादा पार्किंग फीस
पार्किंग पॉलिसी ड्राफ्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा में रजिस्टर्ड वाहनों को छोड़कर अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को पार्किंग के लिए 50 प्रतिशत अधिक पार्किंग फीस देनी होगी। इसके अलावा जिन घरों में पार्किंग की पर्याप्त जगह हैं, उन्हें प्रापर्टी टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
देना होगा पार्किंग स्पेस सर्टिफिकेट
गाड़ी खरीदते समय लोगों को पार्किंग स्पेस सर्टिफिकेट देना होगा। यहीं गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के वक्त ये सर्टिफिकेट देना जरूरी होगा कि इस गाड़ी को आप कहां खड़ा करेंगे, आपके पास इसको खड़ा करने के लिए जगह है या नहीं। अगर आपके पास गाड़ी पार्क करने की जगह नहीं होगी, तो आप अपनी गाड़ी की रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकेंगे।
प्लाट के बाहर गाड़ी पार्क करने पर जुर्माना
पार्किंग पॉलिसी के ड्राफ्ट के मुताबिक, शहर में एक कनाल या उससे ऊपर के प्लाट के बाहर सड़क पर या सड़क के किनारे गाड़ी पार्क करने पर पूरी तरह पाबंदी होगी। ऐसे करने पर वाहन जब्त कर चालान करने का प्रावधान होगा।
ये है पार्किंग पॉलिसी के कुछ प्वाइंट
- पॉलिसी लागू होने के बाद वाहन मालिकों को तीन महीने के अंदर यह एफिडेविट देना होगा कि वे पॉलिसी के नियमों का पालन करेंगे।
- घर में पहले से अगर गाड़ी है और आप दूसरी गाड़ी खरीद रहे हैं, जिसकी कीमत 10 लाख रुपये से ऊपर है तो आपको गाड़ी की 50 प्रतिशत कीमत रोड टैक्स देनी होगी।
-चंडीगढ़ में गाड़ी खरीदने, चलाने और रजिस्टर्ड कराने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ एंटाइटलमेंट देना होगा जोकि 10 साल के लिए वैध होगा।
- जिन लोगों के पास गाड़ी नहीं है और उनके घर में पार्किंग एरिया है, वह अपने पार्किंग एरिया को किराए पर देकर कमाई कर सकते हैं।
- शहर के सभी स्कूल, कॉलेज, सरकारी व प्राइवेट संस्थानों को पिक एंड ड्रॉप ऑफ जोन डिक्लेयर करने होंगे। जहां पर स्कूल के बच्चों को छोड़ा जाएगा और वहां से लाया जाएगा।
निगम तय करेगा फीस
यूटी प्रशासन ने पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर दिया है। पॉलिसी की मंजूरी के बाद इसे लागू करने का जिम्मा नगर निगम का होगा। एक बार पार्किंग फीस तय होने के बाद दो साल तक फीस रिवाइज नहीं की जा सकेगी। दो साल के बाद नगर निगम चाहे तो पार्किंग फीस के स्ट्रक्चर में प्रशासन के टेक्निकल एक्सपर्ट की मंजूरी के बाद बदलाव कर सकता है। पार्किंग पॉलिसी ड्राफ्ट में बाकायदा इसके लिए फार्मूला तैयार किया गया है।
- घर में पहले से अगर गाड़ी है और आप दूसरी गाड़ी खरीद रहे हैं, जिसकी कीमत 10 लाख रुपये से ऊपर है तो आपको गाड़ी की 50 प्रतिशत कीमत रोड टैक्स देनी होगी।
-चंडीगढ़ में गाड़ी खरीदने, चलाने और रजिस्टर्ड कराने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ एंटाइटलमेंट देना होगा जोकि 10 साल के लिए वैध होगा।
- जिन लोगों के पास गाड़ी नहीं है और उनके घर में पार्किंग एरिया है, वह अपने पार्किंग एरिया को किराए पर देकर कमाई कर सकते हैं।
- शहर के सभी स्कूल, कॉलेज, सरकारी व प्राइवेट संस्थानों को पिक एंड ड्रॉप ऑफ जोन डिक्लेयर करने होंगे। जहां पर स्कूल के बच्चों को छोड़ा जाएगा और वहां से लाया जाएगा।
निगम तय करेगा फीस
यूटी प्रशासन ने पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर दिया है। पॉलिसी की मंजूरी के बाद इसे लागू करने का जिम्मा नगर निगम का होगा। एक बार पार्किंग फीस तय होने के बाद दो साल तक फीस रिवाइज नहीं की जा सकेगी। दो साल के बाद नगर निगम चाहे तो पार्किंग फीस के स्ट्रक्चर में प्रशासन के टेक्निकल एक्सपर्ट की मंजूरी के बाद बदलाव कर सकता है। पार्किंग पॉलिसी ड्राफ्ट में बाकायदा इसके लिए फार्मूला तैयार किया गया है।