40 दिन का काम 4 साल लटकाया: तीन साल पहले पंजाब जा चुके पीसीएस हरजीत संधू की पेशी, लिखित में चेतावनी जारी
सेक्टर-9डी के मकान नंबर 305 की 50 फीसदी हिस्सेदारी के ट्रांसफर में चार साल से अधिक की देरी पर चंडीगढ़ राइट टू सर्विस कमीशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए एस्टेट ऑफिस के पूर्व असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर (एईओ) पीसीएस हरजीत सिंह संधू को रिकॉर्डेबल चेतावनी जारी की है।
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चंडीगढ़ सेक्टर-9 के एक मकान की 50 फीसदी हिस्सेदारी के ट्रांसफर का मामला चार साल तक एस्टेट ऑफिस में लटका रहा। इस मामले में राइट टू सर्विस कमीशन ने तीन साल पहले पंजाब जा चुके पीसीएस अधिकारी को पेशी पर बुलाया और सवाल-जवाब किए। उन्हें लिखित में चेतावनी जारी की गई। अन्य दो कर्मियों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। क्लर्क ने नोटिंग शीट से छेड़छाड़ भी की, इस पर विभागीय कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं।
सेक्टर-9डी के मकान नंबर 305 की 50 फीसदी हिस्सेदारी के ट्रांसफर में चार साल से अधिक की देरी पर चंडीगढ़ राइट टू सर्विस कमीशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए एस्टेट ऑफिस के पूर्व असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर (एईओ) पीसीएस हरजीत सिंह संधू को रिकॉर्डेबल चेतावनी जारी की है।
संधू चंडीगढ़ में डेपुटेशन पर थे और तीन साल पहले चंडीगढ़ से जा चुके हैं और पंजाब सरकार में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दरअसल, दीपा दुग्गल ने अपनी बेटी गुनीता ग्रोवर के नाम 50 फीसदी हिस्सेदारी ट्रांसफर करने के लिए 27 जनवरी 2021 को एस्टेट ऑफिस में आवेदन दिया था। नियम के मुताबिक 40 दिनों में यह प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए थी लेकिन चार साल बाद भी फैसला नहीं हुआ, जिसके बाद इन्होंने ने 22 जून 2025 को राइट टू सर्विस कमीशन में शिकायत दर्ज कराई।
सीबीआई के पास फाइल, संपर्क करने में ही 10 महीने लगाए
सुनवाई में पता चला कि मकान की मूल फाइल दिसंबर 2015 में सीबीआई ने एक अन्य केस में जब्त की थी। एस्टेट ऑफिस ने अक्तूबर 2021 में सीबीआई को पत्र लिखकर फाइल लौटाने का अनुरोध किया, जिस पर सीबीआई ने जवाब दिया कि फाइल स्पेशल जज सीबीआई कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर जमा है। कमीशन ने पाया कि जनवरी 2021 में आवेदन मिलने के बाद एस्टेट ऑफिस ने सीबीआई से संपर्क करने में ही 10 महीने लगा दिए और आवेदक को फाइल जब्त होने की जानकारी समय पर नहीं दी। साथ ही नोटिंग शीट की जांच में पता चला कि पूर्व एईओ हरजीत सिंह संधू ने अलग-अलग मौकों पर फाइल आगे बढ़ाने में कुल 35 दिन की देरी की। आयोग ने हरजीत सिंह संधू को रिकॉर्डेबल चेतावनी दी और एस्टेट ऑफिस को निर्देश दिया कि देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश की जाए।
62 दिन तक फाइल लेकर बैठा रहा सीनियर असिस्टेंट, 3000 रुपये जुर्माना
इस मामले में कमीशन ने सीनियर असिस्टेंट शिव कुमार को भी नोटिस जारी किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने 62 दिन की देरी की। शिव कुमार ने भी सीबीआई के पास फाइल होने का तर्क दिया, जिसे कमीशन ने उचित नहीं माना और 3000 रुपये का जुर्माना लगाया। कमीशन ने माना कि सीबीआई की जब्ती का मामला इस मामले से बिल्कुल अलग है, इसलिए इसे विवादित बताकर समय सीमा नहीं बढ़ाई जा सकती।
क्लर्क राकेश पर नोटिंग शीट से छेड़छाड़ का आरोप, 7000 रुपये जुर्माना
कमीशन ने इस मामले की भी जांच की है कि सीबीआई को 10 महीने बाद क्यों मकान की फाइल के लिए लिखा गया। इस पर पता चला कि क्लर्क राकेश ने 28 दिन तक अधिकारी के पास फाइल ही नहीं भेजी। इसके अलावा कुल उन पर 154 दिनों की देरी का आरोप लगा। साथ ही नोटिंग शीट पर कटिंग व ओवरराइटिंग का आरोप लगा, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों ने भी माना। इस पर कमीशन ने 7000 रुपये का जुर्माना लगाया और कागजों में छेड़छाड़ के लिए विभागीय जांच और कार्रवाई के लिए लिखा। इसके लिए एईओ नवीन को तीन महीने का समय दिया गया है।