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Hindi News ›   Chandigarh ›   Chandigarh: 3329 bodies reached in mortuary of GMCH-32 during Corona period, only 2154 cremated 

खुलासा: चंडीगढ़ में कोरोना काल में जीएमसीएच-32 की मोर्चरी में पहुंचे 3329 शव, श्मशान घाट में जले 2154, बाकी 1175 का हिसाब नहीं 

Tue, 15 Feb 2022 10:00 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 15 Feb 2022 10:00 AM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल में देश में कोविड शव के अंतिम संस्कार का एक प्रोटोकॉल लागू था, जिसके अंतर्गत जहां संक्रमित मरीज की मौत हो रही थी, उसका अंतिम संस्कार भी वहीं किया जा रहा था।

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Chandigarh: 3329 bodies reached in mortuary of GMCH-32 during Corona period, only 2154 cremated 
जीएमसीएच 32 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोविड के दौरान चंडीगढ़ में हुई मौतों की संख्या एक बार फिर आंकड़ों में उलझ गई है। प्रशासन ने आंकड़ों में कलाबाजी करने का प्रयास किया है, जिसका खुलासा एक आरटीआई के जवाब में मिला है। प्रशासन ने एक तरफ जीएमसीएच-32 की मोर्चरी में कोविड के दौरान जनवरी 2020 से मई 2021 के बीच 3329 शवों को रखने की बात कही है। दूसरी तरफ प्रशासन के अनुसार इस दौरान शहर के श्मशान घाटों में 2154 कोविड शवों का ही अंतिम संस्कार किया गया है। ऐसे में 1175 शवों का क्या हुआ, इसके बारे में कोई बताने वाला नहीं है। 

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विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल में देश में कोविड शव के अंतिम संस्कार का एक प्रोटोकॉल लागू था, जिसके अंतर्गत जहां संक्रमित मरीज की मौत हो रही थी, उसका अंतिम संस्कार भी वहीं किया जा रहा था। ऐसे में अगर 1175 शवों को अन्य जगह की बताकर वहां भेजे जाने की बात करें तो यह प्रोटोकॉल के विपरीत होगा। स्वास्थ्य विभाग इसे जीएमसीएच-32 का मामला बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। वहीं जीएमसीएच-32 प्रशासन उन 1175 शवों को नॉन कोविड मरीजों का बता रहा है जबकि उस दौरान न तो अस्पतालों की ओपीडी चल रही थी और न इमरजेंसी में मरीज पहुंच रहे थे। 

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मौत के आंकड़ों पर प्रशासन स्वीकार कर चुका है गलती

शहर में कोरोना से हुई मौतों पर प्रशासन एक बार पहले ही गलती स्वीकार कर चुका है। दिसंबर 2021 में जब कोरोना से मौत का आंकड़ा 829 था। उस दौरान प्रशासन ने आंकड़ों में संशोधन करते हुए 247 मृतकों की सूची और शामिल की थी, जिसके बाद मृतकों की संख्या 829 से बढ़कर 1076 हो गई थी। उस दौरान भी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। नहीं तो जीएमसीएच-32 की मोर्चरी के गुमशुदा 1175 शवों की भी हकीकत अब तक सामने आ चुकी होती। 

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गनीमत है इसमें पीजीआई के आंकड़े नहीं शामिल 

आरटीआई कार्यकर्ता आरके गर्ग का कहना है कि कोविड से मौत के आंकड़ों को लेकर प्रशासन गोलमोल जवाब दे रहा है। अगर दो साल गुजरने के बाद भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही है तो यह बेहद गंभीर है। आरके गर्ग का कहना है कि उन्होंने आरटीआई में सिर्फ जीएमसीएच-32 के मोर्चरी का ही ब्योरा मांगा है, तब आंकड़ों में प्रशासन उलझकर रह गया है। अगर इसमें पीजीआई में हुई मौतें भी शामिल होतीं तो आंकड़ा जाने क्या होता। उन्होंने बताया कि मौतों की आंकड़ेबाजी पर अगस्त 2021 में मुद्दा उठाया था। उस वक्त कहा गया था कि आंकड़ों को दुरुस्त किया जा रहा है, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर मौतें हुई कितनी हैं।  चंडीगढ़ जैसे सीमित, साक्षर और हाईटेक शहर का ये हाल होना शर्मनाक है। प्रशासन को तो एक-एक मौत का आंकड़ा वेबसाइट पर अपडेट रखना चाहिए था।

अमर उजाला ने पहले ही किया था आगाह

कोरोना की मौत को लेकर प्रशासन की आंकड़ेबाजी पर अमर उजाला ने 13 मई 2021 का खबर प्रकाशित की थी। इसमें श्मशान घाट पर जली चिताओं और प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों में काफी अंतर पाया गया था, लेकिन उस समय आंकड़ों की कलाबाजी कर मामले को रफ दफा कर दिया गया था। लेकिन अब प्रशासन धीरे धीरे उस हकीकत स्वीकारता जा रहा है। 

सरकारी दस्तावेज के आंकड़े ही एक-दूसरे से विपरीत

  • जीएमसीएच-32 की मोर्चरी में एक जनवरी 2020 से 27 मई 2021 तक 3329 शव रखे गए
  • शहर के विभिन्न श्मशान घाटों में दिसंबर 2021 तक 2154 कोविड शवों का हुआ अंतिम संस्कार 
  • शहर में एक जनवरी 2020 से 27 मई 2021 के बीच कोविड से हुई मौतों की संख्या- 879 
  • रेडक्रास सोसाइटी के अनुसार शहर में कोविड से हुई मौतों की संख्या- 633

प्रशासन के अनुसार कोविड की मौजूदा स्थिति 

कुल मौतें- 1152
कुल संक्रमित- 91,338
अब तक इतने हुए ठीक- 89,563

कोट
यह मामला जीएमसीएच-32 का है, इसलिए इसे वे ही स्पष्ट कर पाएंगे। जहां तक कोविड से हुई मौतों की बात है तो अचानक इतनी ज्यादा संख्या नहीं हो सकती। - डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य


 

उस दौरान मोर्चरी में रखे गए 3329 शव में सभी कोविड के ही शव हों, यह जरूरी नहीं है, क्योंकि इमरजेंसी में भी काफी मरीजों की मौत होती हैं और उनके शव भी मोर्चरी में ही रखे जाते हैं। - डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच-32

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