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रिटायरमेंट के बाद कहां रहेंगे और क्या करेंगे लेफ्टिनेंट जनरल, पढ़ें इंटरव्यू
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 31 Jul 2016 07:14 PM IST
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लेफ्टिनेंट जनरल के जे सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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वेस्टर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह रिटायर हो गए। अब वे कहां रहेंगे और आगे जिंदगी में उनका क्या लक्ष्य रहेगा। ये राज उन्होंने इंटरव्यू में खोले। उन्होंने बताया कि वह पंचकूला में ही रहेंगे। डीएलएफ में उनका फ्लैट है। पहले वे गुड़गांव में बसने जा रहे थे। लेकिन चंडीगढ़ और पंचकूला के लोगों का प्यार और सत्कार देखकर इरादा बदल गया है। रिटायर होने के बाद वे पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़ेंगे।
पंजाब यूनिवर्सिटी ने उन्हें महाराजा रणजीत सिंह चेयरशिप का ऑफर दिया है। 31 जुलाई होने वाली सिंडीकेट की मीटिंग में उनके नाम का प्रस्ताव लाया जाएगा। वे यूनिवर्सिटी में डिफेंस सिक्योरिटी के डिपार्टमेंट से जुड़ेंगे। इसके अलावा उन्होंने आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में भी अप्लाई किया है। रिटायरमेंट से पहले उन्होंने चंडी मंदिर के वीरस्मृति में शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उसके बाद उन्हें सैन्य रीति-रिवाजों के साथ रिटायरमेंट की विदाई दी गई।
सेना के आभारी हैं
लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने बताया कि वह सेना के आभारी हैं कि उन्हें देश की सबसे महत्वपूर्ण कमान का नेतृत्व करने को मिला। उनका पूरा कार्यकाल चुनौती भरा रहा। दुश्मन ने आतंकवादी हमले बढ़ाए। चाहे अरनिया हमला हो या सांबा। दीनानगर अटैक हो या फिर पठानकोट एयरबेस हमला। सभी हमले में मुंहतोड़ जवाब दिया गया। इन हमलों से निपटने में नागरिकों का बहुत सहयोग मिला। कार्यकाल से वह पूरी तरह से संतुष्ट हैं।
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पंजाब यूनिवर्सिटी ने उन्हें महाराजा रणजीत सिंह चेयरशिप का ऑफर दिया है। 31 जुलाई होने वाली सिंडीकेट की मीटिंग में उनके नाम का प्रस्ताव लाया जाएगा। वे यूनिवर्सिटी में डिफेंस सिक्योरिटी के डिपार्टमेंट से जुड़ेंगे। इसके अलावा उन्होंने आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में भी अप्लाई किया है। रिटायरमेंट से पहले उन्होंने चंडी मंदिर के वीरस्मृति में शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उसके बाद उन्हें सैन्य रीति-रिवाजों के साथ रिटायरमेंट की विदाई दी गई।
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सेना के आभारी हैं
लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने बताया कि वह सेना के आभारी हैं कि उन्हें देश की सबसे महत्वपूर्ण कमान का नेतृत्व करने को मिला। उनका पूरा कार्यकाल चुनौती भरा रहा। दुश्मन ने आतंकवादी हमले बढ़ाए। चाहे अरनिया हमला हो या सांबा। दीनानगर अटैक हो या फिर पठानकोट एयरबेस हमला। सभी हमले में मुंहतोड़ जवाब दिया गया। इन हमलों से निपटने में नागरिकों का बहुत सहयोग मिला। कार्यकाल से वह पूरी तरह से संतुष्ट हैं।
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जनरल चीमा मुझसे अच्छा काम करेंगे
लेफ्टिनेंट जनरल के जे सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी कमान की जिम्मेदारी अब लेफ्टिनेंट जनरल जगबीर सिंह चीमा को दी गई है। हालांकि अभी उनकी अस्थाई तौर पर नियुक्ति की गई है। विदाई समारोह के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने कहा कि वे रिटायर हो रहे हैं, लेकिन वेस्टर्न कमांड कभी रिटायर नहीं होती। जनरल चीमा के पास काफी अनुभव है। वे पूरी तरह से क्वालिफाई हैं। उन्हें उम्मीद है कि वे उनसे अच्छा काम करेंगे।
पुराने टैंक के साथ बिताएंगे कुछ समय
उन्होंने बताया कि जब वे आर्म्ड रेजिमेंट में थे, तो उन्हें जेड एक्स 1685 टैंक की जिम्मेदारी गई थी। वह टैंक अभी अमृतसर के खासा में है। रविवार को वह अपना कुछ समय टैंक के साथ बिताएंगे। जब उनसे पूछा गया कि वेस्टर्न कमांड की क्या खासियत है तो उन्होंने कहा कि यहां के नागरिक बहुत ही अच्छे हैं। हर काम में उनका सपोर्ट मिला है। वेस्टर्न कमांड की यही खासियत है।
पंचकूला में रहते हैं कई सैन्य अधिकारी
सेना के कई पूर्व अधिकारी पंचकूला को ही अपना आशियाना बनाते हैं। सेना के पूर्व अध्यक्ष वीपी मलिक, वेस्टर्न कमांड के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल विजय ओबराय, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पीएन हून, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग व पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एसआर बोस सहित कई सैन्य अधिकारी पंचकूला में रहते हैं।
पुराने टैंक के साथ बिताएंगे कुछ समय
उन्होंने बताया कि जब वे आर्म्ड रेजिमेंट में थे, तो उन्हें जेड एक्स 1685 टैंक की जिम्मेदारी गई थी। वह टैंक अभी अमृतसर के खासा में है। रविवार को वह अपना कुछ समय टैंक के साथ बिताएंगे। जब उनसे पूछा गया कि वेस्टर्न कमांड की क्या खासियत है तो उन्होंने कहा कि यहां के नागरिक बहुत ही अच्छे हैं। हर काम में उनका सपोर्ट मिला है। वेस्टर्न कमांड की यही खासियत है।
पंचकूला में रहते हैं कई सैन्य अधिकारी
सेना के कई पूर्व अधिकारी पंचकूला को ही अपना आशियाना बनाते हैं। सेना के पूर्व अध्यक्ष वीपी मलिक, वेस्टर्न कमांड के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल विजय ओबराय, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पीएन हून, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग व पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एसआर बोस सहित कई सैन्य अधिकारी पंचकूला में रहते हैं।