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Chandigarh News: स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण को मंजूरी के आदेश को चुनौती, मुख्य सचिव को नोटिस जारी
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हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों से जवाब दाखिल करने को कहा
-गुरुग्राम पर पहले से जनसंख्या का अतिबोझ, मंजूरी से मुश्किलें बढ़ने की दलील
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम में स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण को मंजूरी देने को चुनौती देते हुए दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव सहित अन्य प्रतिवादियों को नाेटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। गुरुग्राम निवासी हरिंदर बंसी ने एडवोकेट हिम्मत सिंह देओल के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि गुरुग्राम में स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण को मंजूरी पर सरकार ने रोक लगा दी थी। इसके बाद एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया था जिसे स्टिल्ट प्लस फोर को लेकर रिपोर्ट सौंपनी थी। याची ने बताया कि कमेटी ने इसे मंजूरी न देने की सिफारिश की थी। इसकी सिफारिशों को नजरअंदाज करते हुए सरकार ने फिर से स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण को मंजूरी दे दी है। याची ने बताया कि गुरुग्राम की पानी की क्षमता 570 मिलियन लीटर प्रतिदिन है जबकि जरूरत 875 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इतना अंतर होने के चलते लोग भू-जल का प्रयोग कर रहे हैं और यह बहुत तेजी से नीचे जा रहा है। कुछ यही हाल सीवेज का भी है, शहर की सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता 388 एमएलडी है जबकि सीवेज इससे कहीं अधिक है। क्षमता कम होने के चलते अक्सर ब्लॉकेज और बैक फ्लो हो जाता है। याची ने कहा कि इस नीति से बिल्डिंग प्लान मंजूर होने से शहर में लोगों की संख्या बढ़ेगी और इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही याची ने बताया कि अधिकारियों से मिलीभगत कर बिल्डर बिल्डिंग प्लान गलत तरीके से मंजूर करवा लेते हैं। इससे लोगों के लिए असुरक्षित माहौल बनता है। गुरुग्राम में 95 प्रतिशत इमारतों के निर्माण में अनियमित्ताएं मिलेंगी। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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-गुरुग्राम पर पहले से जनसंख्या का अतिबोझ, मंजूरी से मुश्किलें बढ़ने की दलील
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम में स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण को मंजूरी देने को चुनौती देते हुए दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव सहित अन्य प्रतिवादियों को नाेटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। गुरुग्राम निवासी हरिंदर बंसी ने एडवोकेट हिम्मत सिंह देओल के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि गुरुग्राम में स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण को मंजूरी पर सरकार ने रोक लगा दी थी। इसके बाद एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया था जिसे स्टिल्ट प्लस फोर को लेकर रिपोर्ट सौंपनी थी। याची ने बताया कि कमेटी ने इसे मंजूरी न देने की सिफारिश की थी। इसकी सिफारिशों को नजरअंदाज करते हुए सरकार ने फिर से स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण को मंजूरी दे दी है। याची ने बताया कि गुरुग्राम की पानी की क्षमता 570 मिलियन लीटर प्रतिदिन है जबकि जरूरत 875 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इतना अंतर होने के चलते लोग भू-जल का प्रयोग कर रहे हैं और यह बहुत तेजी से नीचे जा रहा है। कुछ यही हाल सीवेज का भी है, शहर की सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता 388 एमएलडी है जबकि सीवेज इससे कहीं अधिक है। क्षमता कम होने के चलते अक्सर ब्लॉकेज और बैक फ्लो हो जाता है। याची ने कहा कि इस नीति से बिल्डिंग प्लान मंजूर होने से शहर में लोगों की संख्या बढ़ेगी और इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही याची ने बताया कि अधिकारियों से मिलीभगत कर बिल्डर बिल्डिंग प्लान गलत तरीके से मंजूर करवा लेते हैं। इससे लोगों के लिए असुरक्षित माहौल बनता है। गुरुग्राम में 95 प्रतिशत इमारतों के निर्माण में अनियमित्ताएं मिलेंगी। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।