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हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट न होने पर नहीं होना चाहिए चालान: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:51 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट न होने से वाहनों के धड़ल्ले से कट रहे चालान पर कड़ी आपत्ति जताई है। बुधवार को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने हाईकोर्ट को बताया था कि अभी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को लगाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया जारी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अभी नंबर प्लेटें लगाने का टेंडर नहीं हुआ है तो लोग इन्हें लगवाएं कैसे, और ऐसे में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के कारण किसी का चालान कैसे किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने जैन से कहा कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के कारण कोई चालान नहीं होना चाहिए। जैन ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया कि हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी को प्रशासन तक पहुंचा दिया जाएगा।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील स्वतंत्र राय ने हरियाणा में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठप पड़ा काम दोबारा आरंभ करवाने के आदेश जारी करने की अपील की थी। याची की ओर से दलील दी गई थी कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के कारण अपराध में कमी आएगी और इसका बहुत अधिक फायदा देखने को मिलेगा।
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इस बारे में हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी के पास हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं है। चंडीगढ़ में तो हाल यह है कि जजों की गाड़ियां भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए कतार में हैं।
कोर्ट ने कहा था कि बिना तैयारी और बिना प्लानिंग के यह हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य कर दी गई है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट केवल पुलिसकर्मियों की जेब भरने का जरिया मात्र बनकर रह गया है। एक ओर ठेका लेकर काम पूरा न होने की दलील देकर कंपनियां आर्ब्रिट्रेशन में चली जाती हैं और सरकार से वसूली करती हैं वहीं दूसरी ओर पुलिस ताक में रहती है कि कोई बिना ऐसी नंबर प्लेट वाला मिले और उनकी जेब गर्म हो।
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हाईकोर्ट ने कहा कि अभी नंबर प्लेटें लगाने का टेंडर नहीं हुआ है तो लोग इन्हें लगवाएं कैसे, और ऐसे में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के कारण किसी का चालान कैसे किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने जैन से कहा कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के कारण कोई चालान नहीं होना चाहिए। जैन ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया कि हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी को प्रशासन तक पहुंचा दिया जाएगा।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील स्वतंत्र राय ने हरियाणा में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठप पड़ा काम दोबारा आरंभ करवाने के आदेश जारी करने की अपील की थी। याची की ओर से दलील दी गई थी कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के कारण अपराध में कमी आएगी और इसका बहुत अधिक फायदा देखने को मिलेगा।
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इस बारे में हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी के पास हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं है। चंडीगढ़ में तो हाल यह है कि जजों की गाड़ियां भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए कतार में हैं।
कोर्ट ने कहा था कि बिना तैयारी और बिना प्लानिंग के यह हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य कर दी गई है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट केवल पुलिसकर्मियों की जेब भरने का जरिया मात्र बनकर रह गया है। एक ओर ठेका लेकर काम पूरा न होने की दलील देकर कंपनियां आर्ब्रिट्रेशन में चली जाती हैं और सरकार से वसूली करती हैं वहीं दूसरी ओर पुलिस ताक में रहती है कि कोई बिना ऐसी नंबर प्लेट वाला मिले और उनकी जेब गर्म हो।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को दी नसीहत
highcourt
कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार इसे अनिवार्य बनाया गया है, उसे करने से पहले पूरी तैयारी होनी चाहिए थी। पिछली सुनवाई पर इस पर हाईकोर्ट ने कोर्ट में मौजूद एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन को इस याचिका की कॉपी उपलब्ध करवाने के आदेश दिए।
बुधवार को जैसे ही मामले की सुनवाई आरंभ हुई एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ में वर्तमान में किसी कंपनी के पास हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठेका नहीं है परंतु इसके लिए कई कंपनियों के आवेदन आ चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जब यह प्लेट लग नहीं रही है तो इनके न होने से चालान कैसे काटा जा सकता है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का चालान काटने की अनुमति देकर पुलिस को पैसा बनाने का जरिया मात्र दिया गया। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अगली तिथि पर इस बारे में उनका पक्ष स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को दी नसीहत
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून को किसी की जेब भरने का जरिया नहीं बनने देना चाहिए। प्रशासन को इस बारे में जानकारी है कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का काम फिलहाल नहीं चल रहा है। ऐसे में चालान की प्रक्रिया को रोक देना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि न तो चालान रोके गए और न ही पुलिस का दुर्व्यवहार ही रुका है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि अब तो संजीदगी से इस दिशा में काम करे।
बुधवार को जैसे ही मामले की सुनवाई आरंभ हुई एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ में वर्तमान में किसी कंपनी के पास हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठेका नहीं है परंतु इसके लिए कई कंपनियों के आवेदन आ चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जब यह प्लेट लग नहीं रही है तो इनके न होने से चालान कैसे काटा जा सकता है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का चालान काटने की अनुमति देकर पुलिस को पैसा बनाने का जरिया मात्र दिया गया। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अगली तिथि पर इस बारे में उनका पक्ष स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को दी नसीहत
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून को किसी की जेब भरने का जरिया नहीं बनने देना चाहिए। प्रशासन को इस बारे में जानकारी है कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का काम फिलहाल नहीं चल रहा है। ऐसे में चालान की प्रक्रिया को रोक देना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि न तो चालान रोके गए और न ही पुलिस का दुर्व्यवहार ही रुका है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि अब तो संजीदगी से इस दिशा में काम करे।