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Hindi News ›   Chandigarh ›   Chaitra Navratri 2023 Chaitra Navratri begins from March 22

Chaitra Navratri 2023: इस बार बन रहे कई महायोग, सुख और समृद्धि में होगी वृद्धि, जानें कलश स्थापना व पूजा विधि

Mon, 20 Mar 2023 02:33 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 20 Mar 2023 02:33 PM IST
सार

नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। घरों में मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योति प्रज्जवलित की जाती है और कलश स्थापित किया जाता है। नवरात्रियों में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।

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Chaitra Navratri 2023 Chaitra Navratri begins from March 22
Chaitra Navratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस बार की चैत्र नवरात्रि का त्योहार 22 मार्च से शुरू होगा। नवरात्र का शुभारंभ मीन लग्न व चंद्र राशि मीन में उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में हो रहा है। यह कहना है चंडीगढ़ के सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री का। उन्होंने कहा कि उत्तरा भाद्रपत नक्षत्र को ज्ञान, सौभाग्य, सुख व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 

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चंडीगढ़ की राशि भी मीन है इसलिए यह संयोग अति शुभ कारक है। 30 मार्च को श्री रामनवमी होगी। साथ ही इस बार के नवरात्र में कई महायोग का निर्माण हो रहा है। यह चंडीगढ़ के लोगों के लिए फलदायी है। इससे सुख, शांति और समृद्धि की वृद्धि होगी। हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत बड़ा महत्व है। ये नौ दिन आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए शुभ कारक माने जाते हैं। 
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नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। घरों में मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योति प्रज्जवलित की जाती है और कलश स्थापित किया जाता है। नवरात्रियों में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नवरात्रि का आरंभ होता है। 22 मार्च को कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त प्रात: 6:25 बजे से 9:05 बजे तक, मीन लग्न व मेष लग्न, लाभ एवं अमृत का चौघड़िया। स्थिर लग्न वृष लग्न 9:00 से 10:56 तक होगा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:15 से दोपहर 12:05 तक। अबकी बार नवरात्रि में कई महायोगों का निर्माण हो रहा है।

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इन महायोगों का हो रहा निर्माण

  • 22 मार्च को बुध-आदित्य योग एवं शुक्ल योग।
  • 23 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग एवं ऐंद्र योग।
  • 24 मार्च को रवि योग व श्री मत्स्य जयंती।
  • 26 मार्च को रवि योग एवं श्री पंचमी।
  • 27 मार्च को स्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृतसिद्धि योग।
  • 28 मार्च को द्विपुष्कर योग।
  • 29 मार्च को रवि योग।

30 मार्च को गुरु-पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग तथा श्रीराम नवमी। इन सभी योगों में किया गया अनुष्ठान या किसी भी कारोबार का प्रारंभ सिद्धि प्रदान करने वाला होता है।

मंदिरों में होंगे भव्य आयोजन
देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि नवरात्र में सभी मंदिरों में विभिन्न प्रकार के उत्सवों का आयोजन किया जाता है। मंदिरों को खूब सजाया जाता है, पूजा पाठ शुरू हो जाते हैं। सभी मंदिरों में नवरात्रि के दिनों में प्रतिदिन मां दुर्गा की पूजा आरती होगी। श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। प्रतिदिन महिला मंडल की ओर से संकीर्तन किया जाएगा।

चैत्र नवरात्रि में नौ दिन तक माता के नौ स्वरूपों की पूजा

  • 22 मार्च प्रतिपदा - मां शैलपुत्री की पूजा
  • 23 मार्च द्वितीया - मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
  • 24 मार्च तृतीया - मां चंद्रघंटा की पूजा
  • 25 मार्च चतुर्थी - मां कुष्माण्डा की पूजा
  • 26 मार्च को पंचमी मां स्कंदमाता पूजा
  • 27 मार्च षष्ठी - मां कात्यायनी पूजा
  • 28 मार्च सप्तमी - मां कालरात्री पूजा
  • 29 मार्च अष्टमी - मां महागौरी पूजा
  • 30 मार्च नवमी - मां सिद्धीदात्री पूजा श्री राम नवमी


कलश स्थापन विधि
सेक्टर-30 के शिवशक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि एक चौड़ा पात्र लेकर उसमें रेत-मिट्टी डालें, जौ और गेहूं को मिलाकर उसमें बीज दें। तांबे या मिट्टी के कलश को गंगाजल मिश्रित जल से भरकर बीजे हुए पात्र पर स्थापित करें। कलश में गंगाजल, अक्षत, लौंग, इलायची, सुपारी, दूर्वा, एक सिक्का और चावल डालें। आम के पत्ते कलश में डालकर उसके ऊपर नारियल को बैठा दें। नारियल पर लाल कपड़ा लपेटें या मोली लपेटें। सारे तीर्थों एवं देवताओं का ध्यान कर मुख्य रूप से वरूण देव का पूजन करें। कलश की स्थापना अपने ईशान कोण में करें। अखंड ज्योति को अग्नि कोण में स्थान दें।

मां दुर्गा की पूजा विधि
देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि एक सुंदर चौकी पर मां श्री दुर्गा जी की सोने, चांदी या अन्य धातु की प्रतिमा स्थापित करें। माता का ध्यान करें। दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, पंचामृत से स्नान कराएं। फिर शुद्ध स्नान कराएं। वस्त्र धारण कराएं, केसर तिलक लगाएं, पुष्पमाला अर्पित करें, माता रानी को पंचमेवा का भोग लगाएं। आरती उतारें, प्रार्थना करें। स्तोत्रों से माता की स्तुति करें, श्री दुर्गा चालीसा का पाठ करें। यदि आप नौ दिन तक व्रत कर सकते हैं तो फलाहार लेकर व्रत रखें।

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