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विधानसभा चुनाव 2022 : सियासत में पैर जमाने चले चढूनी को अब पंजाब से करिश्मे की आस
Sun, 16 Jan 2022 05:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 16 Jan 2022 05:03 AM IST
सार
पंजाब में खुद नहीं लड़ेंगे साथियों को उतारेंगे चुनाव में, अकेले दाल न गलती देख राजेवाल के साथ सीट बंटवारे पर चल रही है बात।
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गुरनाम सिंह चढूनी
- फोटो : Self
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विस्तार
हरियाणा की सियासत में पांव नहीं जमा सके भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी को अब पंजाब से करिश्मे की आस है। उन्होंने पड़ोसी राज्य के चुनावी दंगल में ताल ठोकने के लिए संयुक्त संघर्ष पार्टी बनाई है। उनका दावा तो सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का था, लेकिन अकेले दाल न गलती देख अब बलबीर सिंह राजेवाल पर सीट बंटवारे को लेकर डोरे डाल रहे हैं।
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सीट बंटवारे पर बात रविवार तक सिरे चढ़ सकती है। उसके बाद चढूनी अपने चुनावी पत्ते खोलेंगे। अपने मूल प्रदेश हरियाणा में चढूनी व उनकी पत्नी ने एक-एक चुनाव लड़ा पर नतीजे उत्साहजनक नहीं रहे। चढूनी की पत्नी बलविंदर कौर ने 2014 में आप की टिकट पर कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से ताल ठोकी थी। उन्हें जीत तो नहीं मिली, लेकिन 79 हजार वोट ले गईं। गुरनाम चढूनी ने 2019 में लाडवा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा पर करारी हार झेलनी पड़ी। वह सातवें स्थान पर रहे। भाकियू के कुछ नेताओं ने ही उनका साथ नहीं दिया था।
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राजेवाल ने की है 10 सीट की पेशकश
किसान आंदोलन से बने माहौल के बाद अब चढूनी ने पंजाब का रुख किया है। वह खुद तो चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन संयुक्त संघर्ष पार्टी के बैनर तले अपने पंजाब के साथियों को लड़ाएंगे ताकि पंजाब की सियासत में किसानों का दखल बढ़ा सकें। इसमें वह कितना सफल रहेंगे यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन सीट बंटवारे में उन्हें राजेवाल खेमा अधिक तवज्जो नहीं दे रहा। वह 25 सीट कम से कम चाह रहे, जबकि उन्हें अधिकतम 10 सीटों की पेशकश है। जिससे पेंच फंसा हुआ है।
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आज साफ होगी तस्वीर
भाकियू हरियाणा के प्रेस सचिव राकेश बैंस का कहना है कि रविवार को पंजाब में सीट बंटवारे पर तस्वीर साफ होगी। उनके बाद आगामी फैसले लेंगे। गुरनाम चढूनी अभी पंजाब के किसान नेताओं के साथ अंतिम सहमति बनाने में लगे हैं। उनकी छवि जुझारू किसान नेता की है। उनका मकसद देश की राजनीति में बदलाव लाना है, जिसके लिए पंजाब से अच्छी शुरूआत कोई नहीं हो सकती।
पूंजीवाद की जगह किसानवाद लाना उद्देश्य : चढूनी
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि ज्यादातर राजनीतिक पार्टियों पर पैसे वाले लोग काबिज हैं। देश में पूंजीवाद लगातार बढ़ता जा रहा है, अमीर और गरीब के बीच बड़ी खाई बन रही है। उनका उद्देश्य पूंजीवाद की जगह किसानवाद लाना है। उनकी पार्टी ग्रामीण, शहरी, मजदूर, किसान, रेहड़ी, पटरी वालों के साथ आम इंसान को तरजीह देगी। वह शुरू से बदलाव की राजनीति करते आए हैं। हरियाणा और पंजाब की सियासत में काफी अंतर है। किसान आंदोलन के बाद किसानों में अपने हकों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। वह बदलाव के लिए राजनीति में भी अपनी हिस्सेदारी पाना चाहते हैं।
मजबूत आधार न होना कमजोर कड़ी
संयुक्त संघर्ष पार्टी पंजाब में चुनाव से ठीक पहले अस्तित्व में आई है। गुरनाम सिंह चढूनी पंजाब की राजनीति में कोई बड़ा चेहरा नहीं हैं। उनकी पूरे प्रदेश में अपनी पैठ नहीं है। किसान आंदोलन के चलते ही वह किसानों के बीच चेहरा बने। उनके साथ पंजाब का कोई बड़ा सियासी नाम नहीं जुड़ा हुआ है। किसानों को उनकी ताकत माना जा सकता है, लेकिन वे भी अनेक धड़ों में बंटे हुए हैं। सबके अपने राजनीतिक निहितार्थ हैं।