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Your Honor Web Series: वेब सीरीज ‘योर ऑनर’ के खिलाफ याचिका पर केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश
Sat, 11 Feb 2023 08:09 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 11 Feb 2023 08:09 AM IST
सार
चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने वेब सीरीज ‘योर ऑनर’ के खिलाफ याचिका पर केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। वेब सीरीज ‘योर ऑनर’ को न्यायपालिका की गरिमा को आहत करने वाला बताते हुए इस पर पाबंदी लगाने के लिए याचिका दायर की गई है।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सोनी लिव पर दिखाई जा रही वेब सीरीज ‘योर ऑनर’ को न्यायपालिका की गरिमा को आहत करने वाला बताते हुए इस पर पाबंदी लगाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार व पंजाब सरकार को 19 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
मोहाली के एडवोकेट सुखचरण सिंह गिल ने एडवोकेट हरलव सिंह राजपूत के माध्यम से सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए इस वेब सीरीज पर रोक लगाने की मांग की थी। 21 सितंबर 2020 को सिंगल बेंच ने इस मामले को बेहद ही गंभीर करार देते हुए इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया था।
याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाए जा रहे कंटेंट पर केंद्र सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। यही कारण है कि इनमें और इस तरह दिखाई जा रही वेब-सीरीज में दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों में अश्लीलता और हिंसा को दिखाया जाता है और यहां तक कि कई तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
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मोहाली के एडवोकेट सुखचरण सिंह गिल ने एडवोकेट हरलव सिंह राजपूत के माध्यम से सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए इस वेब सीरीज पर रोक लगाने की मांग की थी। 21 सितंबर 2020 को सिंगल बेंच ने इस मामले को बेहद ही गंभीर करार देते हुए इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया था।
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याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाए जा रहे कंटेंट पर केंद्र सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। यही कारण है कि इनमें और इस तरह दिखाई जा रही वेब-सीरीज में दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों में अश्लीलता और हिंसा को दिखाया जाता है और यहां तक कि कई तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
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याचिकाकर्ता ने खासतौर पर वेब सीरीज योर ऑनर के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में न्यायपालिका की गरिमा को आहत किया जा रहा है, जिससे सामान्य लोगों में न्यायपालिका के प्रति सम्मान को ठेस पहुंचती है। इतना ही नहीं इस कार्यक्रम में पंजाब के दो वर्गों के बारे में सही चित्रण नहीं किया गया है, जिससे सामाजिक समरसता आहत हो रही है।
लिहाजा इस पर रोक लगाने और ऐसे कार्यक्रमों के कॉन्टेंट पर नियंत्रण लाने की हाईकोर्ट से मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की है कि फिल्म और टीवी कार्यक्रमों की तरह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कॉन्टेंट पर सेंसर बोर्ड की तरह ही किसी संस्था का नियंत्रण स्थापित किया जाए।