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लोकायुक्त का फैसला, और बढ़ी फौजी की मुश्किलें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 12 Feb 2014 12:11 AM IST
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हरियाणा के लोकायुक्त जस्टिस प्रीतम पाल ने मुख्य संसदीय सचिव रामकिशन फौजी के मामले में प्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका रद्द कर दी है।
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इससे फौजी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोकायुक्त ने अपने पुराने फैसले पर कायम रहते हुए कहा कि सीडी में फौजी पांच करोड़ रुपये मांगते हुए नजर आ रहे हैं।
लोकायुक्त कानून में पुनर्विचार का कोई प्रावधान नहीं है इसलिए वे पुराने फैसले पर विचार करने के सरकार के आग्रह को रद्द करते हैं।
लोकायुक्त ने मंगलवार को फैसले में लिखा, ‘मैंने 20 जनवरी, 2014 को जो फैसला सुनाया था। उस पर मुख्य सचिव ने 27 जनवरी को पत्र भेजकर आग्रह किया था कि फैसले में मैंने जो टिप्पणी की थी, उस पर पुनर्विचार करें।
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मगर कानून में पुनर्विचार करने या पुनर्निरीक्षण करने का कोई प्रावधान नहीं है। अगर मेरी टिप्पणी पूरे फैसले को ध्यान में रखकर पढ़ी जाए तो वह पूरी तरह कानून और तथ्यों पर आधारित है।
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कानून का प्राथमिक उद्देश्य ही जनसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर सिफारिश करना है। इस मामले में 20 जनवरी को की गई सिफारिशें भी लोकायुक्त कानून के अनुसार थीं।
सब तथ्यों और कानून को सामने रखते हुए मुझे अपनी पहली सिफारिशों पर दोबारा से विचार करने का कोई कारण नजर नहीं आता। इसलिए मुख्य सचिव की तरफ से भेजा आग्रह रद्द किया जाता है।