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Hindi News ›   Chandigarh ›   CBI prepared list of DEEOs for fraud of fake admissions of children in government schools in Haryana

सरकारी स्कूलों में फर्जी दाखिला मामला: हरियाणा के कई जिलो के डीईईओ को जांच में शामिल करेगी सीबीआई

Wed, 03 Jul 2024 02:46 PM IST
निवेदिता वर्मा हरीश कोचर, संवाद, चंडीगढ़
हरीश कोचर, संवाद, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 03 Jul 2024 02:46 PM IST
सार

जून 2015 में शिक्षा विभाग ने 719 गेस्ट टीचर्स को हटाने का नोटिस जारी किया था। इसके चलते इन गेस्ट टीचर्स ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सरकार ने पक्ष रखते हुए कहा कि स्कूलों में विद्यार्थी घट गए हैं। जब कोर्ट ने सरकार से स्कूलों में बच्चों के दाखिलों का रिकॉर्ड मांगा तो 22 लाख में से चार लाख बच्चों के स्कूल छोड़ने का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

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CBI prepared list of DEEOs for fraud of fake admissions of children in government schools in Haryana
सीबीआई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

हरियाणा में वर्ष 2014 से 2016 के बीच सरकारी स्कूलों में 4 लाख बच्चों के नाम पर फर्जी दाखिलों के फर्जीवाड़े में मौलिक शिक्षा अधिकारियों के अलावा आईएएस व एचसीएस अफसरों की भी मुश्किलें बढ़ना तय है। इस मामले में सीबीआई ने इन तीन सालों में प्रदेश के कई जिलों में तैनात रहे जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों(डीईईओ) की सूची तैयार कर ली है, जिन्हें जांच में शामिल किया जाएगा। 
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इसके अलावा विजिलेंस द्वारा वर्ष 2018-19 में दर्ज मामलों में जांच में शामिल मौलिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक आरपी सांगवान, और संयुक्त निदेशक निदेशक मौलिक शिक्षा हरियाणा दिलबाग सिंह को भी सीबीआई जांच में शामिल कर इनके बयान दर्ज करेगी। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी और यह दोनों अधिकारी एसआईटी के समक्ष उपस्थित हुए, लेकिन इनके द्वारा या शिक्षा विभाग ने जांच में कोई खास सहयोग नहीं किया। दरअसल, जून 2015 में शिक्षा विभाग ने 719 गेस्ट टीचर्स को हटाने का नोटिस जारी किया था। इसके चलते इन गेस्ट टीचर्स ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सरकार ने पक्ष रखते हुए कहा कि स्कूलों में विद्यार्थी घट गए हैं। 
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जब कोर्ट ने सरकार से स्कूलों में बच्चों के दाखिलों का रिकॉर्ड मांगा तो 22 लाख में से चार लाख बच्चों के स्कूल छोड़ने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। मामले में जांच करने के आदेश दिए गए। इसके बाद हरियाणा विजिलेंस ने वर्ष 2014 से 2016 तक का प्रदेश के कई जिलों में शिक्षा विभाग का रिकॉर्ड खंगाला। 
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विजिलेंस की इस जांच में 12924 सरकारी स्कूलों में ऐसी गड़बड़ियां सामने आईं, जिसमें कागजों में ही बच्चों को स्कूल छोड़ने की बात सामने आई, लेकिन इस रिकॉर्ड में केवल बच्चों का नाम था, उनका कोई गांव का अता-पता नहीं था। इस मामले में अंबाला, करनाल और पंचकूला रेंज के करीब एक दर्जन जिलों के मौलिक शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई। इसके बाद विजिलेंस ने इन 4 लाख फर्जी दाखिलों को लेकर इन तीनों रेंज के विजिलेंस थानों में 30 मार्च 2018 को कुल सात एफआईआर दर्ज की गई थी।


तीन जिलों से शुरू हुई थी स्कूलों में रैंडम जांच
मामले का खुलासा होने के बाद रोहतक, हिसार और गुरुग्राम के तीनों एसएसपी द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में प्रत्येक जिले में सभी प्राथमिक विद्यालयों का रिकॉर्ड जांचने के लिए मौके पर जाकर सत्यापन किया गया। इस दौरान रोहतक रेंज के 5 विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में 472 का अंतर पाया गया। इसी प्रकार हिसार रेंज के 5 स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में 581 का अंतर पाया गया जबकि ग्रामीण रेंज के 6 स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में 58 का अंतर पाया गया। इतना बड़ा अंतर बिना किसी स्पष्टीकरण था। स्कूलों के रिकॉर्ड में केवल लंबे समय से अनुपस्थित रहने के कारण नाम काटे गए दिखाए गए हैं, जबकि नाम काटने का कारण स्पष्ट नहीं था। इसके अलावा विद्यार्थियों के पते अधूरे थे जिससे उनकी वेरिफिकेशन असंभव थी।
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