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इस नई तकनीक से होगा सफेद मोतिया का इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 22 May 2014 12:10 PM IST
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देश में कैटरेक्ट (मोतियाबिंद) सर्जरी के एक नए दौर की शुरुआत करते हुए क्षेत्र के प्रमुख नेत्र चिकित्सा अस्पताल, ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट भारत में पहली एक बार एक क्रांतिकारी और अत्याधुनिक आईएफएस कैटरेक्ट सर्जरी की तकनीक लाए हैं।
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कैटरेक्ट सर्जरी में एक नई एप्लीकेशन को शामिल करते हुए, सीसीआई, क्लीयर कार्नियल इंसीजंस एक नई तकनीक है जो कि सफेद मोतिया के इलाज में सर्जनों को बेहद उच्चस्तर की दक्षता के साथ सटीक, सुरक्षित और बेहतर परिणाम वाले इलाज की सुविधा देती है।
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आईएफएस लेजर के साथ सर्जन मनचाहे आकार और पैट्रन में सटीक सर्जरी कर सकते हैं। लेजर की सहायता से अब सर्जन कट की सही स्थिति, चौड़ाई, गहराई और गोलाई तय कर सकते हैं, जो कि पारंपरिक तकनीक में लगभग असंभव है।
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आईएफएस लेजर नेत्र चिकित्सा से संबंधित सर्जरी में सटीक कट, आकार, गोलाई, चौड़ाई और गहराई की सुविधा प्रदान करता है। इस अत्याधुनिक तकनीक से ब्लेड फ्री कैटरेक्ट सर्जरी का एक नया दौर शुरू होगा जो एक कम दर्ददायक सर्जरी बन जाती है। इससे रिकवरी में कम समय लगता है। वहीं ये सुरक्षित, सटीक और प्रभावी भी है।
ये लैंस को सटीकता के साथ फिटकरता है और पुराने लैंस को निकालने के लिए भी कम ताकत लगती है। ये नई एडवांस तकनीक सटीकता और कुशलता के नए मानक तय करते हुए कैटरेक्ट सर्जरी को मरीजों के लिए पूरी तरह से लाभदायक बनाती है।
ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट के सीईओ डा.एसपीएस ग्रेवाल ने कहा कि कैटरेक्ट सर्जरी में एडवांसमेंट से मरीजों को अपने मोतियाबिंद के आप्रेशन के दौरान जीईआई में नवीनतम तकनीक प्राप्त होगी। जीईआई में हमारा उद्देश्य अपने सभी मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध बेहतरीन इलाज प्रदान करना है।’’