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एक्सक्लूसिव: संक्रमित आंखों से लेंस निकाला जाना सही है? पढ़िए एक्सपर्ट का जवाब, बड़े काम आएगा

Wed, 03 Apr 2019 11:15 AM IST
खुशबू गोयल संजय कुमार, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
संजय कुमार, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 03 Apr 2019 11:15 AM IST
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Cataract Surgery Controversy in Haryana, Eye Surgeon Views on Infected EyesTreatment
सांकेतिक तस्वीर
मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद संक्रमण का शिकार हुई आंखों से लेंस निकाला जाना कितना सही है, इस सवाल के जवाब में एक्सपर्ट ने जो जानकारी दी, वह हर किसी को पता होनी चाहिए।
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हरियाणा में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद सुडोमोनाज एरुजिनोसा बैक्टीरिया का शिकार हुए मरीजों की संख्या ने सरकार को हिला कर रख दिया है। अब नेत्र सर्जनों व मरीजों के दिमाग में सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि संक्रमित आंखों से लेंस को निकाला जाना कितना सही है और कितना गलत। पीजीआईएमएस रोहतक व पीजीआईएमआर चंडीगढ़ ने संक्रमित मरीजों की आंखों का स्पेशल ऑपरेशन किया है। अब सभी को चिकित्सा के शीर्ष संस्थानों के परिणाम का इंतजार है।
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पीजीआईएमएस चंडीगढ़ में 21 के करीब मरीजों की आंखों का ऑपरेशन किया गया था। वहीं पीजीआईएमएस रोहतक में अब तक भिवानी, करनाल व झज्जर से 52 मरीज उपचार के लिए आ चुके हैं। इसमें से 41 मरीजों की विटेक्ट्रमी सर्जरी मंगलवार शाम तक नेत्र विभाग के एक्सपर्ट डॉक्टरों ने पूरी कर दी है। दावा है कि रोहतक में किसी मरीज की आंखों से लेंस नहीं निकाला गया है, जबकि सूत्र दावा करते हैं कि चंडीगढ़ की टीम ने खतरा मोल न लेते हुए कुछ मरीजों के लैंस निकाल लिए हैं।
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अब देखना होगा कि दोनों चिकित्सा संस्थानों में हुए ऑपरेशनों में से कितने मरीजों की रोशनी वापस लौटती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि महज दिखाई देने और पूरा दिखाई देने की क्वालिटी में फर्क होता है। हालांकि प्रदेश में चल रही स्थिति को देखते हुए कोई स्पष्ट तौर पर बोलने को तैयार नहीं है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट...

ऑपरेशन के बाद अगर संक्रमण होता है तो 24 से 48 घंटे में इंजेक्शन लगाया जाना चाहिए। आराम न होने पर इसे दोहराया जाता है। फिर भी आराम नहीं होता है तो स्पेशल सर्जरी की जाती है। यहां देखना होता है कि लेंस के बैग में संक्रमण है या नहीं। अगर बैग में संक्रमण पहुंचा है तो लेंस को निकाला जाता है। हालांकि सर्जरी के समय इस बैग में एंटी संक्रमण का टीका दिया जाता है। अगर टीका नहीं दिया गया है तो लेंस निकालने की नौबत आ जाती है। संक्रमण होने के यदि 24 से 48 घंटे में उपचार शुरू कर दिया जाए तो 90 प्रतिशत मरीजों की आंखों को सही किया जा सकता है।
- डॉ. मारकंडेय आहुजा, वरिष्ठ नेत्र सर्जन

हमने 21 मरीजों के आंखों की स्पेशल सर्जरी की है और कोई समस्या नहीं हुई है। किसी मरीज का ऑपरेशन के दौरान लेंस नहीं निकाला गया है। सभी केस इम्प्रूवमेंट पर हैं, ये जब दोबारा जांच के लिए आएंगे तो स्थिति स्पष्ट होगी कि इनकी आंखों की रोशनी कितनी लौटी है।
- डॉ. मंगत राम डोगरा, प्रोफेसर एंड हेड, नेत्र विभाग, पीजीआईएमआर चंडीगढ़
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