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Chandigarh News: पुलिस में भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले हेड कांस्टेबल को कैट से राहत
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चंडीगढ़। पुलिस विभाग में खरीद-फरोख्त के बिलों में कथित रूप से भ्रष्टाचार की शिकायत उच्चाधिकारियों को देने वाले चंडीगढ़ पुलिस के हेड कांस्टेबल को कैट ने राहत प्रदान की है। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की चंडीगढ़ बेंच ने हेड कांस्टेबल के खिलाफ डीएसपी ऑपरेशंस की ओर से की जा रही जांच के मामले में अंतिम आदेश देने पर रोक बरकार रखने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि कैट ने बीते सप्ताह हेड कांस्टेबल को इस मामले में स्टे दिया था, जिसके बाद बुधवार को सुनवाई के दौरान विभाग को याचिकाकर्ता द्वारा मांगे जा रहे दस्तोवेजों को 18 जुलाई तक उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं। हेड कांस्टेबल जगजीत सिंह ने अधिवक्ता डॉ. सुमति जुंद के माध्यम से दायर याचिका पर कैट ने यह आदेश पारित किया है।
आवेदन में हेड कांस्टेबल ने बीते 22 मई के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ नियमित विभागीय जांच शुरू की गई थी। आवेदक ने कहा कि वह यूटी पुलिस में पदोन्नति, साप्ताहिक अवकाश, आवास, व्यवस्थित कक्ष प्रणाली, स्थानांतरण नीति और कथित भ्रष्टाचार के बुनियादी मुद्दों को लेकर सवाल उठाया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उसने जनहित में विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर उच्चाधिकारियों को शिकायत की थी लेकिन उनकी शिकायत पर कार्रवाई के बजाय उनके खिलाफ ही विभागीय जांच शुरू कर दी गई। उन्होंने दावा किया कि आज तक उन्हें न तो उस आदेश की प्रति जारी की गई है, जिसमें प्रारंभिक जांच करने के निर्देश दिए गए थे और न ही उस आदेश की प्रति जिसके तहत वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनके खिलाफ नियमित विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश जारी किए गए थे।
याचिकाकर्ता की वकील की दलीलों को सुनने के बाद कैट ने डीएसपी ऑपरेशंस को 18 जुलाई तक मामले में अंतिम आदेश पारित न करने के आदेश दिए हैं। बेंच ने कहा कि आवेदक को भी जांच में सहयोग करना चाहिए।
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आवेदन में हेड कांस्टेबल ने बीते 22 मई के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ नियमित विभागीय जांच शुरू की गई थी। आवेदक ने कहा कि वह यूटी पुलिस में पदोन्नति, साप्ताहिक अवकाश, आवास, व्यवस्थित कक्ष प्रणाली, स्थानांतरण नीति और कथित भ्रष्टाचार के बुनियादी मुद्दों को लेकर सवाल उठाया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उसने जनहित में विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर उच्चाधिकारियों को शिकायत की थी लेकिन उनकी शिकायत पर कार्रवाई के बजाय उनके खिलाफ ही विभागीय जांच शुरू कर दी गई। उन्होंने दावा किया कि आज तक उन्हें न तो उस आदेश की प्रति जारी की गई है, जिसमें प्रारंभिक जांच करने के निर्देश दिए गए थे और न ही उस आदेश की प्रति जिसके तहत वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनके खिलाफ नियमित विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश जारी किए गए थे।
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याचिकाकर्ता की वकील की दलीलों को सुनने के बाद कैट ने डीएसपी ऑपरेशंस को 18 जुलाई तक मामले में अंतिम आदेश पारित न करने के आदेश दिए हैं। बेंच ने कहा कि आवेदक को भी जांच में सहयोग करना चाहिए।
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