{"_id":"67535958849ea1788f061ba7","slug":"cat-ordered-to-re-review-the-promotion-process-of-two-teachers-chandigarh-news-c-16-pkl1043-578991-2024-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: कैट ने दिया दो शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया पर दोबारा समीक्षा का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: कैट ने दिया दो शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया पर दोबारा समीक्षा का आदेश
विज्ञापन
चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने साल 2019 में दो साइंस शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया की यूटी प्रशासन को दोबारा समीक्षा का आदेश दिया है। शिक्षकों ने दावा किया था कि सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी होने के बावजूद उन्हें लेक्चरर (पीजीटी) पद के लिए पदोन्नति में शामिल नहीं किया गया।
शिक्षक राजेश बंसल और शशि वर्मा ने कैट में सुनवाई के दौरान बताया कि वे 2009 और 2010 में टीजीटी साइंस शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे। चंडीगढ़ शिक्षा सेवा (स्कूल कैडर) भर्ती नियमों के अनुसार लेक्चरर पदों का 45 प्रतिशत पदोन्नति के माध्यम से भरा जाता है। हालांकि, 28 फरवरी 2019 को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में वाणिज्य विषय में आठ में से केवल छह पदों पर पदोन्नति की गई। इसमें इन दोनों शिक्षकों को पदोन्नति के लिए नहीं चुना गया था। हालांकि, इन दोनों शिक्षकों के पास सभी योग्यताएं थीं, जो पदोन्नति के लिए जरूरी थीं। इसमें न्यायाधिकरण ने पाया कि पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रह गई थी, जो पूर्ण रूप से गलत था। ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को आदेश दिया कि वे विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक कर दोबारा समीक्षा आयोजित करें। यदि ये पात्र हों तो शिक्षकों को उसी तारीख से पदोन्नत करें, जिस दिन से अन्य शिक्षकों को पदोन्नति मिली थी।
विज्ञापन
शिक्षक राजेश बंसल और शशि वर्मा ने कैट में सुनवाई के दौरान बताया कि वे 2009 और 2010 में टीजीटी साइंस शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे। चंडीगढ़ शिक्षा सेवा (स्कूल कैडर) भर्ती नियमों के अनुसार लेक्चरर पदों का 45 प्रतिशत पदोन्नति के माध्यम से भरा जाता है। हालांकि, 28 फरवरी 2019 को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में वाणिज्य विषय में आठ में से केवल छह पदों पर पदोन्नति की गई। इसमें इन दोनों शिक्षकों को पदोन्नति के लिए नहीं चुना गया था। हालांकि, इन दोनों शिक्षकों के पास सभी योग्यताएं थीं, जो पदोन्नति के लिए जरूरी थीं। इसमें न्यायाधिकरण ने पाया कि पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रह गई थी, जो पूर्ण रूप से गलत था। ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को आदेश दिया कि वे विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक कर दोबारा समीक्षा आयोजित करें। यदि ये पात्र हों तो शिक्षकों को उसी तारीख से पदोन्नत करें, जिस दिन से अन्य शिक्षकों को पदोन्नति मिली थी।
विज्ञापन