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ई-कोर्ट प्रोजेक्ट पूरा होते ही ऑनलाइन दायर होंगे केस: जस्टिस लोकुर

Mon, 04 Apr 2016 04:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 04 Apr 2016 04:32 PM IST
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case will be filed online after e court project: justice lokur
ऑनलाइन - फोटो : demo pics
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के इंचार्ज जस्टिस मदन बी. लोकुर ने कहा है कि ई-कोर्ट प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कोई भी वादी तथा अधिवक्ता कोर्ट में ऑनलाइन केस दायर कर सकता है। ई-कोर्ट से जहां न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, वहीं न्यायालयों के काम में भी तेजी आएगी।
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वे यहां रविवार को चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी में ई-कोर्ट प्रोजेक्ट से संबंधित क्षेत्रीय चर्चा के दौरान चार राज्यों के हाईकोर्ट के न्यायिक अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय और राज्य सरकार को ई-कोर्ट परियोजना में आपसी सहयोग से काम करना चाहिए, ताकि आम जनता के लिए न्यायालय का काम सुविधाजनक हो सके। इससे राज्य के राजकोष में भी करोड़ों रुपये की बचत भी होगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के परामर्श से ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के प्रथम चरण के लिए सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी की ओर से 900 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से अभी तक 700 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि ई-कोर्ट प्रोजेक्ट का उद्देश्य देश में अधीनस्थ न्यायालयों को कंप्यूटरीकृत करने का है, ताकि वादियों और अधिवक्ताओं के साथ मामले से संबंधित जानकारी साझा की जा सके। इससे कार्य में पारदर्शिता, जवाबदेही और मामलों के शीघ्र निपटान में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड में अब तक दो करोड़ 30 लाख लंबित मामलों और दो करोड़ 70 लाख निर्णय हो चुके मामलों का विवरण उपलब्ध है।
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एसएमएस के जरिये ई-फाइलिंग सॉफ्टवेयर देगा मामलों की जानकारी: 
न्यायाधीश लोकुर ने बताया कि ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के लिए 1670 करोड़ रुपये का कुल बजट प्रस्तावित किया गया है। इसमें से साल 2015-16 में हार्डवेयर की खरीद के लिए 200 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने नागरिक केंद्रित सेवाओं, जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में सौर ऊर्जा का प्रयोग करने तथा केस इनफॉमेशन सिस्टम का नया संस्करण प्रयोग करने के निर्देश दिए। ई-फाइलिंग सॉफ्टवेयर अगस्त 2016 तक पूरा होने की उम्मीद है।


इसके बाद केस से संबंधित आम जनता को एसएमएस के माध्यम से उनके मामलों की जानकारी भी मिलती रहेगी। इस दौरान क्षेत्रीय चर्चा में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से न्यायाधीश राजेश बिंदल, न्यायाधीश अरुण पल्ली, न्यायाधीश अमित रावल और जम्मू-कश्मीर उच्चन्यायालय से न्यायाधीश ताशी रबस्टन, हिमाचल प्रदेश उच्चन्यायलय से धर्मचंद चौधरी, न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान, राजस्थान हाईकोर्ट से न्यायाधीश वीएस सिरधाना, केंद्र सरकार के न्याय विभाग से सचिव आईएएस कुसुमजीत सिद्धू, संयुक्त सचिव अतुल कौशिक के अलावा केंद्रीय परियोजना समन्वयक, एनआईसी समन्वयक, सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के सदस्य सचिवों और प्रतिभागी राज्यों के वित्त सचिवों और विधि सचिवों ने भाग लिया। 
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