पूर्व मंत्री आशु की बढ़ीं मुश्किलें: अब नवांशहर में भी केस दर्ज, पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया
जांच में खाद्य आपूर्ति विभाग डिप्टी डायरेक्टर आरके सिंगला की भी भूमिका सामने आई है। इस पूरे खेल का एक हिस्सा सिंगला की जेब में जाता था। डीएफएसई राकेश भास्कर के बाद अब डिप्टी डायरेक्टर आरके सिंगला को भी नामजद कर लिया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ट्रांसपोर्टेशन टेंडर घोटाले में न्यायिक हिरासत में चल रहे पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने अब आशु और उनके पीए मीनू को नवांशहर में हुए टेंडर घोटाले में नामजद किया है। पूर्व मंत्री से पूछताछ के लिए विजिलेंस ने चार दिन का रिमांड भी हासिल किया। मीनू फिलहाल फरार है।
विजिलेंस ब्यूरो ने बताया कि नवांशहर की अनाज मंडी में हुए घोटाले में ठेकेदार तेलूराम ने कई राज उगले थे। उसने बताया कि ठेकेदार यशपाल और अजयपाल को भी ढुलाई के ठेके चाहिए थे। पहले उसने उनकी डीएफएसई राकेश भास्कर से मुलाकात करवाई। उसके बाद उन्हें मंत्री आशु के माध्यम से टेंडर मिलने लगे।
तेलू राम ने इसका विस्तार से जिक्र अपनी डायरी में किया है। उसकी डायरी विजिलेंस के कब्जे में है। इस दौरान जांच एजेंसी ने आरोपियों की मोबाइल कॉल्स की भी जांच की, जिसमें पता चला कि आशु के पीए मीनू से काफी बातचीत होती थी। इस सिलसिले में 22 सितंबर को विजिलेंस ने तेलूराम, यशपाल और अजयपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। तेलू राम पहले से ही लुधियाना मंडी में हुए दो हजार करोड़ के ट्रांसपोर्टेशन टेंडर घोटाले में जेल में है। यशपाल और अजयपाल की गिरफ्तारी के लिए छापे मारे जा रहे हैं।
अजयपाल को 73 फीसदी अधिक रेट पर मिले टेंडर
पता चला है कि साल 2022-23 के टेंडरों में हनी कुमार नामक के शख्स ने लेबर के काम के लिए राहो कलस्टर और नवांशहर कलस्टर में बेसिक रेट पर टेंडर डाले लेकिन जिला अलॉटमेंट समिति ने उन टेंडरों को रद्द कर ठेकेदार अजयपाल को नवांशहर कलस्टर में लेबर कार्यों के लिए 73 फीसदी अधिक और राहो कलस्टर में 72 फीसदी अधिक रेट पर टेंडर दे दिए गए।
नाबालिग मजदूरों के मिले आधार कार्ड
विजिलेंस प्रवक्ता ने बताया कि टेंडर भरते समय उक्त ठेकेदारों द्वारा मुहैया करवाए गए मजदूरों के आधार कार्ड की फोटो कॉपी की जांच की। इसमें कई आधार कार्ड नाबालिग मजदूरों और 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों के हैं। इन तथ्यों के मुताबिक जिला टेंडर समिति द्वारा संबंधित ठेकेदारों की तकनीकी बिड खारिज करनी बनती थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
रकम का एक हिस्सा डिप्टी डायरेक्टर को जाता था
जांच में खाद्य आपूर्ति विभाग डिप्टी डायरेक्टर आरके सिंगला की भी भूमिका सामने आई है। इस पूरे खेल का एक हिस्सा सिंगला की जेब में जाता था। डीएफएसई राकेश भास्कर के बाद अब डिप्टी डायरेक्टर आरके सिंगला को भी नामजद कर लिया गया है।