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Chandigarh: 800 लोगों से ठगी से मचा हड़कंप, प्रशासन व निगम पर उठे सवाल, मेयर ने प्रशासक को लिखा पत्र

Thu, 23 May 2024 01:57 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 23 May 2024 01:57 PM IST
सार

मंगलवार को मलोया सहित आसपास की कई कॉलोनियों के सैकड़ों लोगों ने पुराने सचिवालय में जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया था। इनका आरोप था कि मोहाली के झामपुर निवासी ठेकेदार सिमर खेरवाल ने चंडीगढ़ बागवानी विभाग में नौकरी देने के नाम पर उनसे करोड़ों रुपये ठग लिए। सभी को काम पर रखकर छह महीने तक काम कराया लेकिन तनख्वाह केवल एक महीने की दी।

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case of cheating 800 people of about six crore rupees in name of jobs in chandigarh
चंडीगढ़ में प्रदर्शन करते लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में बागवानी विभाग में नौकरी के नाम पर 800 लोगों से करीब छह करोड़ रुपये की ठगी के मामले पर पूरे शहर में हलचल मची है। खुलासे से बाद बुधवार को प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा ने सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय में एक आपात बैठक बुलाई।

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इसमें नगर निगम और प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। सलाहकार ने पूरे मामले की जानकारी ली और अधिकारियों को सतर्क रहने की नसीहत के साथ चेतावनी भी दी। उधर, मेयर कुलदीप कुमार ने मामले में प्रशासक को पत्र लिखकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं।
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बैठक में सलाहकार राजीव वर्मा ने अधिकारियों से पूछा कि शहर में इतनी बड़ी संख्या में लोगों से नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा हो गया। सभी कर्मचारियों की तरह पूरे शहर में काम करते रहे लेकिन प्रशासन और नगर निगम के किसी भी फील्ड स्टाफ को भनक तक नहीं लगी, आखिर क्यों? नगर निगम की तरफ से बताया गया कि जहां-जहां यह कर्मचारी काम कर रहे थे, वह नगर निगम का एरिया नहीं है। बैठक में आउटसोर्सिंग कर्मियों के नियम व शर्तों को सख्त करने के साथ फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की जिओ फेंसिंग समेत अन्य निर्देश जारी किए।
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एरिया को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि शहर में अभी भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां अब तक तय नहीं है कि वहां सफाई नगर निगम करेगा या अन्य कोई विभाग। कई इलाकों में पार्क के रखरखाव को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। यही वजह है कि ऐसे ठग लूप होल निकालते हैं और फिर वहां फर्जी कर्मचारी तैनात कर ठगी को अंजाम देते हैं। सलाहकार ने इन सभी कमियों को दूर करने के साथ भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी दी। सूत्रों के अनुसार, सलाहकार ने पुलिस को भी निर्देश दिए हैं कि मामले की गंभीरता से जांच की जाए और इसमें कर्मचारियों-अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

अधिकारियों और बीजेपी नेताओं की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता फर्जीवाड़ा : मेयर
मामले में मेयर कुलदीप कुमार ने सेक्टर-35 में प्रेसवार्ता कर कई सवाल उठाए। कहा कि भाजपा कार्यकाल में हुए घोटाले अब उजागर हो रहे हैं। पिछले साल पार्किंग घोटाला सामने आया था। उसके बाद स्कूलों में सफाई कर्मचारी रखने के नाम पर गरीब लोगों से नौकरी के नाम पर ठेकेदार द्वारा पैसे ठगे गए और अब वाल्मीकि समाज और अन्य वर्गों के लोगों के साथ सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। मेयर ने आरोप लगाया कि यह फर्जीवाड़ा केवल एक ठेकेदार ने नहीं किया है। सरकारी अधिकारियों और बीजेपी नेताओं की मिलीभगत के बिना ये नहीं हो सकता। कहा कि प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह से आंखें बंद करके बैठे हैं, जिन्हें इस फर्जीवाड़े के बारे में मेयर प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित को एक पत्र लिखकर विजिलेंस जांच कराने की मांग की है।

ठेकेदार और एजेंट की संपत्ति खंगालेगी पुलिस
आठ सौ लोगों से ठगी के आरोपी ठेकेदार सिमर खेरवाल और उसके साथी एजेंट को पुलिस ने बुधवार को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को दो दिन के रिमांड पर भेज दिया गया। अब पुलिस दोनों से ठगी की रकम बरामद करेगी। साथ ही दोनों की संपत्तियां खंगालेगी। बता दें कि मंगलवार को मलोया सहित आसपास की कई कॉलोनियों के सैकड़ों लोगों ने पुराने सचिवालय में जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया था। इनका आरोप था कि मोहाली के झामपुर निवासी ठेकेदार सिमर खेरवाल ने चंडीगढ़ बागवानी विभाग में नौकरी देने के नाम पर उनसे करोड़ों रुपये ठग लिए। सभी को काम पर रखकर छह महीने तक काम कराया लेकिन तनख्वाह केवल एक महीने की दी।


आरोपी ने उन्हें पार्क, ग्रीन फील्ड व चौक-चौराहों पर सफाई की नौकरी पर रख रखा था। बाकायदा उनकी रोजाना हाजिरी लगाई जाती थी। वेतन नहीं मिलने से खफा सैकड़ों लोगों की भीड़ ने जब सचिवालय में पहुंचकर हंगामा किया तो पता चला कि सिमर खेरवाल को नगर निगम, बागवानी या अन्य किसी सरकारी विभाग से कोई टेंडर ही नहीं मिला है। सैकड़ों लोगों से ठगी का खुलासा होने पर मलोया थाना पुलिस ने केस दर्ज कर ठेकेदार और उसके साथी एजेंट को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सरकारी अफसरों की मिलीभगत भी सामने आई है इसलिए पुलिस ने आरोपियों को दो दिन के रिमांड पर लिया है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी ठेकेदार ने अलग-अलग जगहों पर करोड़ों रुपये के मकान व अन्य संपत्तियां खरीदी हैं।

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