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कार्मल कॉन्वेंट हादसा: सिफारिशों पर अमल नहीं, जिंदगियों पर मंडरा रहा खतरा
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चंडीगढ़। कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 250 साल पुराने हेरिटेज पेड़ गिरने से छात्रा हीराक्षी की मौत को दो साल से ज्यादा हो गए मगर हालात अब भी जस के तस हैं। घटना के बाद बनी एक सदस्यीय कमेटी (सेवानिवृत्त जस्टिस जितेंद्र चौहान) ने अहम सिफारिशें दी थीं लेकिन उन पर गंभीरता से अमल नहीं हुआ। नतीजा यह है कि शहर की सड़कों और स्कूलों के आसपास लगे पेड़ अब भी जिंदगियों के लिए खतरा बने हुए हैं।
प्रशासन का दावा है कि खतरनाक पेड़ों को हटाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बना है और 48 घंटे में कार्रवाई हो जाती है मगर हकीकत में आज भी लोगों को निगम, वन और इंजीनियरिंग विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस मानसून में ही सेक्टर-22/23 डिवाइडिंग रोड, सेक्टर-19 और 20 में कई बड़े पेड़ गिर चुके हैं।
जांच रिपोर्ट में नहीं ठहराया गया कोई दोषी
जस्टिस चौहान ने सात महीने की जांच के बाद फरवरी 2023 में रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें किसी को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। स्कूल को क्लीन चिट दी गई और इंजीनियरिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि विभाग ने स्कूल का दौरा नहीं किया और पेड़ों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए प्रोटोकॉल तैयार नहीं किया। विभाग ने सफाई दी कि स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने पर वह निजी संस्थानों में दखल नहीं दे सकते।
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दी गई थीं ये सिफारिशें
ग्रीन बिग्रेड का गठन किया जाए
रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी (आरडब्ल्यूए) को जोड़ा जाए
परिपक्व पेड़ों का अल्ट्रासोनिक मूल्यांकन हो
मृत और सूखे पेड़ों का व्यापक सर्वेक्षण किया जाए
जानमाल के नुकसान से बचने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम हो
हेरिटेज पेड़ों का नियमित निरीक्षण और यूकेलिप्टस पेड़ों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए
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प्रशासन का दावा है कि खतरनाक पेड़ों को हटाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बना है और 48 घंटे में कार्रवाई हो जाती है मगर हकीकत में आज भी लोगों को निगम, वन और इंजीनियरिंग विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस मानसून में ही सेक्टर-22/23 डिवाइडिंग रोड, सेक्टर-19 और 20 में कई बड़े पेड़ गिर चुके हैं।
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जांच रिपोर्ट में नहीं ठहराया गया कोई दोषी
जस्टिस चौहान ने सात महीने की जांच के बाद फरवरी 2023 में रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें किसी को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। स्कूल को क्लीन चिट दी गई और इंजीनियरिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि विभाग ने स्कूल का दौरा नहीं किया और पेड़ों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए प्रोटोकॉल तैयार नहीं किया। विभाग ने सफाई दी कि स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने पर वह निजी संस्थानों में दखल नहीं दे सकते।
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दी गई थीं ये सिफारिशें
ग्रीन बिग्रेड का गठन किया जाए
रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी (आरडब्ल्यूए) को जोड़ा जाए
परिपक्व पेड़ों का अल्ट्रासोनिक मूल्यांकन हो
मृत और सूखे पेड़ों का व्यापक सर्वेक्षण किया जाए
जानमाल के नुकसान से बचने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम हो
हेरिटेज पेड़ों का नियमित निरीक्षण और यूकेलिप्टस पेड़ों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए