जानिए, कैप्टन ने रैली में आखिर किसे 'ललकारा'?
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कैप्टन की ललकार रैली ने आखिर ललकारा किसे? यही सवाल पंजाब की फिजा में है। शनिवार को अमृतसर में इस रैली का का निशाना, प्रत्यक्ष रूप से तो नशे के मुद्दे पर अकाली-भाजपा गठबंधन था, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से इसका टार्गेट पार्टी के भीतर ही बैठे कैप्टन विरोधी थे।
सियासी माहिर इस रैली को लोकसभा में कांग्रेस पक्ष के उप नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह की एक सोची समझी सियासी चाल करार दे रहे हैं, जिसमें वह काफी कामयाब रहे। इसने पंजाब कांग्रेस की भविष्य की राजनीति की भी झलक प्रस्तुत की है।
गठबंधन सरकार थी निशाने पर
कैप्टन ने रैली के दौरान अपने संबोधन और बॉडी-लेंगुएज से जिस प्रकार गठबंधन सरकार पर निशाना साधा और 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने स्तर पर ही बिगुल फूंका, उसने पार्टी के उनके प्रतिद्वंद्वियों को स्पष्ट संकेत दे दिया कि वह पंजाब कांग्रेस की लीडरशिप के मुद्दे पर किसी के साथ भी टक्कर लेने को तैयार हैं।
इससे सियासी हलकों में कांग्रेस की गुटबाजी से संबंधित चर्चाओं को और हवा भी मिली है। वहीं, पार्टी आला कमान भी सोचने पर मजबूर हो गया है कि अब पंजाब कांग्रेस के संकट का हल कैसे निकाला जाए।
भविष्य का खाका बनाना
बहरहाल, शनिवार की रैली के दौरान प्रदेश कांग्रेस की खुलकर सामने आई गुटबाजी ने आगामी चुनावों के संबंध में प्रदेश कांग्रेस के सियासी भविष्य का एक खाका भी खींच दिया।
पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल गुटों के रैली में शामिल न होने का कार्यकर्ताओं में जो संदेश गया है, उसने भी हाईकमान की चिंता बढ़ाई है।
अगले महीने होने वाले नगर निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से भी इसे जोड़ कर देखा जा रहा है। नतीजा वक्त बताएगा, लेकिन कैप्टन ने इस रैली में पंजाब के अधिकतर कांग्रेसी विधायकों की शमूलियत दिखाकर प्रदेश कांग्रेस में अपनी पकड़ की झलक दिखा दी है।
लोगों को लोकप्रियता दिखाना
रैली में जुटी भीड़ और उसके उत्साह ने भी कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर की लोकप्रियता की झलक प्रस्तुत की। आमतौर पर चुनावी मौसम के दौरान जिस तरह की भीड़ या उत्साह जनसभाओं में दिखाई पड़ता है, लगभग वैसा ही जोश इस रैली में आए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में दिखाई दे रहा था। इस नजरिए से भी इसे कैप्टन की एक और कामयाबी सियासी माहिर करार दे रहे हैं।