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पूर्व फौजियों के मार्च में कैप्टन, बदनौर को सौंपा ज्ञापन, ये हैं प्रमुख मांगे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 Sep 2016 08:11 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह चंडीगढ़ में पूर्व फौजियों के मार्च में हुए शामिल
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह पूर्व फौजियों के मार्च में शामिल हुए। यह मार्च लेक क्लब से राजभवन तक निकाला गया। इसका मकसद सातवें वेतन आयोग पर तीनों सेनाओं के प्रमुखों के स्टैंड का समर्थन करना था।
मार्च के बाद राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को ज्ञापन भी दिया गया। मार्च की अगुवाई सबसे सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल एसएस बराड़ ने की। इसमें कई रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल, मेजर जनरल, ब्रिगेडियर, कर्नल, जेसीओ व फौजी शामिल हुए।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव आशा कुमारी और हरीश चौधरी भी मार्च में शामिल हुए। राष्ट्रपति के नाम दिए ज्ञापन में कहा गया है कि देश भर के पूर्व फौजी सातवें वेतन आयोग पर तीनों सेनाओं के प्रमुखों द्वारा लिए स्टैंड के पक्ष में हैं।
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मार्च के बाद राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को ज्ञापन भी दिया गया। मार्च की अगुवाई सबसे सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल एसएस बराड़ ने की। इसमें कई रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल, मेजर जनरल, ब्रिगेडियर, कर्नल, जेसीओ व फौजी शामिल हुए।
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कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव आशा कुमारी और हरीश चौधरी भी मार्च में शामिल हुए। राष्ट्रपति के नाम दिए ज्ञापन में कहा गया है कि देश भर के पूर्व फौजी सातवें वेतन आयोग पर तीनों सेनाओं के प्रमुखों द्वारा लिए स्टैंड के पक्ष में हैं।
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कैप्टन बोले, फौजियों के साथ पक्षपात करना गलत
कैप्टन अमरिंदर सिंह चंडीगढ़ में पूर्व फौजियों के मार्च में हुए शामिल
- फोटो : अमर उजाला
कैप्टन ने कहा कि यह सिर्फ ब्यूरोक्रेट्स का फौजियों के साथ पक्षपात है। जिस पर सत्ता में बैठी हुई पार्टियों ने आंखें बंद कर ली हैं, तभी यह स्थिति पैदा हुई है। मुलाजिमों और पेंशनरों में सबसे बड़ा हिस्सा फौजियों का है, लेकिन फैसले लेने में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
मुट्ठी भर ब्यूरोक्रेट फैसले लेकर फौजियों पर थोप देते हैं। आजादी के बाद से फौजियों के साथ पक्षपात जारी है। लगातार ऐसे फैसलों से फौजियों का मनोबल गिरेगा। चीन और पाकिस्तान के होते हुए भारत एक हतोत्साहित फौज नहीं वहन कर सकता।
फौजी अनुशासित हैं, इसका मतलब यह नहीं कि उनके साथ पक्षपात किया जाए। उन्होंने कहा कि फौजियों का वेतनमान निर्धारित करने वाले ब्यूरोक्रेट्स को एक दिन के लिए सियाचिन में ड्यूटी करवानी चाहिए। तभी उन्हें पता चलेगा कि फौजी किन हालातों में सेवा निभाते हैं।
यह सिर्फ वेतन की बात नहीं, बल्कि पुलिस व प्रशासन के समकक्ष फौजियों के रुतबे का भी सवाल है। मार्च में लेफ्टिनेंट टीएस शेरगिल, लेफ्टिनेंट जनरल एसएस बराड़, लेफ्टिनेंट जनरल एएस सेखों, लेफ्टिनेंट जनरल एसआर घोष भी शामिल हुए।
मुट्ठी भर ब्यूरोक्रेट फैसले लेकर फौजियों पर थोप देते हैं। आजादी के बाद से फौजियों के साथ पक्षपात जारी है। लगातार ऐसे फैसलों से फौजियों का मनोबल गिरेगा। चीन और पाकिस्तान के होते हुए भारत एक हतोत्साहित फौज नहीं वहन कर सकता।
फौजी अनुशासित हैं, इसका मतलब यह नहीं कि उनके साथ पक्षपात किया जाए। उन्होंने कहा कि फौजियों का वेतनमान निर्धारित करने वाले ब्यूरोक्रेट्स को एक दिन के लिए सियाचिन में ड्यूटी करवानी चाहिए। तभी उन्हें पता चलेगा कि फौजी किन हालातों में सेवा निभाते हैं।
यह सिर्फ वेतन की बात नहीं, बल्कि पुलिस व प्रशासन के समकक्ष फौजियों के रुतबे का भी सवाल है। मार्च में लेफ्टिनेंट टीएस शेरगिल, लेफ्टिनेंट जनरल एसएस बराड़, लेफ्टिनेंट जनरल एएस सेखों, लेफ्टिनेंट जनरल एसआर घोष भी शामिल हुए।