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विवादः कैप्टन ने आमने-सामने बिठाए मनप्रीत बादल और मुख्य सचिव, डेढ़ घंटा सुनी दोनों की बातें
Tue, 26 May 2020 10:45 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 26 May 2020 10:45 AM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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एक्साइज पॉलिसी को लेकर मुख्य सचिव करण अवतार सिंह और कैबिनेट मंत्रियों की बीच हुए विवाद का निपटारा करने की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को दोनों पक्षों को आखिरकार आमने-सामने बिठा ही लिया। सिसवां स्थित अपने फार्म हाउस पर मुख्यमंत्री ने सोमवार को फिर से चुनिंदा मंत्रियों को लंच पर बुलाया था।
इस लंच कार्यक्रम में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और मुख्य सचिव करण अवतार सिंह की मौजूदगी के अलावा तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी, खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी के साथ-साथ श्री आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी मौजूद थे। हालांकि विवाद से जुड़े केवल तीन लोगों को ही मुख्यमंत्री ने बुलाया, क्योंकि पिछले हफ्ते उन्होंने जिन चुनिंदा मंत्रियों को लंच पर बुलाया था।
उनमें मुख्य सचिव का खुलकर विरोध करने और उन्हें हटाने की मांग करने वाले सुखजिंदर सिंह रंधावा और मुख्यमंत्री के सलाहकार विधायक राजा वड़िंग शामिल थे। तब मुख्यमंत्री ने उन दोनों की बात ध्यान से सुनी और विवाद के प्रत्यक्ष पात्र रहे मनप्रीत सिंह बादल से बातचीत करके हल निकालने का भरोसा दिया था। सोमवार को मुख्यमंत्री ने फिर लंच कार्यक्रम रखा और उसमें मनप्रीत बादल और चरणजीत चन्नी को बुला लिया।
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पता चला है कि पहले तो मनप्रीत और चन्नी की काफी देर तक मुख्यमंत्री के साथ बातचीत होती रही और बाद में मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव करण अवतार सिंह को भी बुला लिया।
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इस लंच कार्यक्रम में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और मुख्य सचिव करण अवतार सिंह की मौजूदगी के अलावा तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी, खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी के साथ-साथ श्री आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी मौजूद थे। हालांकि विवाद से जुड़े केवल तीन लोगों को ही मुख्यमंत्री ने बुलाया, क्योंकि पिछले हफ्ते उन्होंने जिन चुनिंदा मंत्रियों को लंच पर बुलाया था।
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उनमें मुख्य सचिव का खुलकर विरोध करने और उन्हें हटाने की मांग करने वाले सुखजिंदर सिंह रंधावा और मुख्यमंत्री के सलाहकार विधायक राजा वड़िंग शामिल थे। तब मुख्यमंत्री ने उन दोनों की बात ध्यान से सुनी और विवाद के प्रत्यक्ष पात्र रहे मनप्रीत सिंह बादल से बातचीत करके हल निकालने का भरोसा दिया था। सोमवार को मुख्यमंत्री ने फिर लंच कार्यक्रम रखा और उसमें मनप्रीत बादल और चरणजीत चन्नी को बुला लिया।
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पता चला है कि पहले तो मनप्रीत और चन्नी की काफी देर तक मुख्यमंत्री के साथ बातचीत होती रही और बाद में मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव करण अवतार सिंह को भी बुला लिया।
पूरी बैठक करीब डेढ़ घंटा चली
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने इसके बाद दोनों पक्षों, जिसमें एक तरफ मनप्रीत और चन्नी थे और दूसरी तरफ मुख्य सचिव थे, को आमनेृ-सामने बिठा लिया और दोनों पक्षों की बातें बड़े ध्यान से सुनीं। यह पूरी बैठक करीब डेढ़ घंटा चली। खास बात यह भी रही कि मुख्यमंत्री ने लंच पर मौजूद राणा सोढी और मनीष तिवारी को इस मामले से अलग ही रखा।
यह भी पता चला है कि बैठक के लिए पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ को भी बुलाया गया था लेकिन वे किसी कारणवश नहीं पहुंचे। उल्लेखनीय है कि पिछली कैबिनेट बैठक के दौरान मनप्रीत बादल ने मुख्यमंत्री से साफ कह दिया था कि अगर बैठक में करण अवतार सिंह शामिल होंगे तो वे उस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। तब चन्नी ने भी मनप्रीत का समर्थन किया था और बाकी मंत्रियों ने भी इस विवाद को सुलझाने की मांग संबंधी एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा था।
सोमवार को पहला मौका था, जब मनप्रीत-चन्नी और मुख्य सचिव आमने-सामने एक ही बैठक में मौजूद थे। बैठक का अंतर केवल यह था कि इस मौके पर आर्बिटर के तौर पर मुख्यमंत्री खुद हाजिर थे। इस बीच, बैठक का क्या नतीजा निकला, इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। मुख्यमंत्री या बाकी दोनों पक्षों की तरफ से इस बैठक को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है।
फिर भी, सूत्रों ने बैठक के माहौल से यह अनुमान लगाया है कि मुख्यमंत्री का रवैया आज भी मुख्य सचिव के प्रति काफी नरम रहा है। संभव है कि उन्हें पद से हटाया न जाए। कैप्टन ने दोनों पक्षों की बात सुन ली है और अगले कुछ दिन में यह विवाद आपसी रजामंदी से हल हो सकता है।
यह भी पता चला है कि बैठक के लिए पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ को भी बुलाया गया था लेकिन वे किसी कारणवश नहीं पहुंचे। उल्लेखनीय है कि पिछली कैबिनेट बैठक के दौरान मनप्रीत बादल ने मुख्यमंत्री से साफ कह दिया था कि अगर बैठक में करण अवतार सिंह शामिल होंगे तो वे उस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। तब चन्नी ने भी मनप्रीत का समर्थन किया था और बाकी मंत्रियों ने भी इस विवाद को सुलझाने की मांग संबंधी एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा था।
सोमवार को पहला मौका था, जब मनप्रीत-चन्नी और मुख्य सचिव आमने-सामने एक ही बैठक में मौजूद थे। बैठक का अंतर केवल यह था कि इस मौके पर आर्बिटर के तौर पर मुख्यमंत्री खुद हाजिर थे। इस बीच, बैठक का क्या नतीजा निकला, इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। मुख्यमंत्री या बाकी दोनों पक्षों की तरफ से इस बैठक को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है।
फिर भी, सूत्रों ने बैठक के माहौल से यह अनुमान लगाया है कि मुख्यमंत्री का रवैया आज भी मुख्य सचिव के प्रति काफी नरम रहा है। संभव है कि उन्हें पद से हटाया न जाए। कैप्टन ने दोनों पक्षों की बात सुन ली है और अगले कुछ दिन में यह विवाद आपसी रजामंदी से हल हो सकता है।
कैप्टन ने मनप्रीत के पहुंचने पर बुलाया मुख्य सचिव को
सिसवां स्थित फार्म हाउस पर मुख्यमंत्री के बुलावे पर सबसे पहले मनीष तिवारी और खेल मंत्री राणा सोढी पहुंचे। कुछ ही मिनटों बाद चरनजीत चन्नी भी पहुंच गए और मुख्यमंत्री के साथ तीनों की बैठक काफी देर तक चलती रही। करीब आधे घंटे बाद मनप्रीत बादल भी फार्म हाउस पहुंच गए, जिनके पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को भी बुलावा भेज दिया। अगले 15 मिनट के भीतर ही मुख्य सचिव करण अवतार सिंह भी फार्म हाउस पहुंच गए और इसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक मनप्रीत, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के बीच बैठक चली।