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कैप्टन अमरिंदर सिंह के भाई कांग्रेस में हुए शामिल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 15 Mar 2014 04:27 PM IST
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पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह आखिरकार अपने भाई राजा मालविंदर सिंह को कांग्रेस में वापस ले ही आए हैं। शुक्रवार को कई कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में मालविंदर ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली।
भाई की वापसी से उत्साहित कैप्टन ने कहा कि मेरे भाई तो मेरे पास लौट आए हैं। कैप्टन द्वारा बुलाई गई इस बैठक की विशेष बात यह भी रही कि मालविंदर को पार्टी में ज्वाइन कराने प्रदेशाध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा नहीं पहुंचे।
मालविंदर ने इस मौके पर कहा कि कोई भी कोई भी मतभेद हो, वह हल हो जाता है। वह अकाली दल में गए पर वैचारिक तौर पर उनके जैसे नहीं हो सके।
हलका इंचार्जों को प्रशासन की कमान देने का फैसला उन्हें ठीक नहीं लगा। जुलाई 2012 में वह सोनिया गांधी से मिले तो उन्होंने पार्टी में लौटने को कहा था। 24 जनवरी 2014 को फिर मिले तो लौटने का फैसला लिया।
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1977 में कैप्टन ही उन्हें कांग्रेस में लाए थे। निजी कारणों से छोटी, वह बात खत्म हो गई है। पार्टी का जो हुक्म होगा मानेंगे। मालविंदर के चुनाव प्रचार के सवाल पर कैप्टन ने कहा कि हम सब परिवार हैं, मिल कर प्रचार करेंगे।
बैठक में नहीं पहुंचे बाजवा
मालविंदर सिंह के कांग्रेस ज्वाइन करने के अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और उनके गुट के नेता मौजूद नहीं थे।
इस मौके पर कैप्टन गुट के नेता ही दिखाई दिए, जिनमें खडूर साहिब से लोकसभा उम्मीदवार हरमिंदर गिल, विधायक हरदयाल कंबोज, सुखजिंदर रंधावा, चरनजीत सिंह चन्नी, तृप्त राजिंदर बाजवा, मोहम्मद सदीक, अजायब सिंह भट्टी व साधू सिंह धरमसोत, पूर्व विधायक सुरजीत धीमान व मक्खन सिंह भी थे।
अजनाला में शहीदी स्मारक के लिए कमेटी जरूरी नहीं : अमरिंदर
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि अजनाला के कुएं में जिन शहीदों की अस्थियां मिली हैं, उनके बारे में फैसला लेने के लिए किसी कमेटी की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार की कमेटी जरूरी नहीं है। सब कुछ रिकॉर्ड में मौजूद है।
26 नेटिव इनफेंटरी की मियां मीर में चार पलटन थीं। मारे गए सिपाई उच्च जाति के ब्राह्मण थे। जल्द से जल्द सेना को इनका अंतिम संस्कार करना चाहिए। सरकार को इनकी याद में एक छोटा मंदिर बनाना चाहिए।
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भाई की वापसी से उत्साहित कैप्टन ने कहा कि मेरे भाई तो मेरे पास लौट आए हैं। कैप्टन द्वारा बुलाई गई इस बैठक की विशेष बात यह भी रही कि मालविंदर को पार्टी में ज्वाइन कराने प्रदेशाध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा नहीं पहुंचे।
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मालविंदर ने इस मौके पर कहा कि कोई भी कोई भी मतभेद हो, वह हल हो जाता है। वह अकाली दल में गए पर वैचारिक तौर पर उनके जैसे नहीं हो सके।
हलका इंचार्जों को प्रशासन की कमान देने का फैसला उन्हें ठीक नहीं लगा। जुलाई 2012 में वह सोनिया गांधी से मिले तो उन्होंने पार्टी में लौटने को कहा था। 24 जनवरी 2014 को फिर मिले तो लौटने का फैसला लिया।
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1977 में कैप्टन ही उन्हें कांग्रेस में लाए थे। निजी कारणों से छोटी, वह बात खत्म हो गई है। पार्टी का जो हुक्म होगा मानेंगे। मालविंदर के चुनाव प्रचार के सवाल पर कैप्टन ने कहा कि हम सब परिवार हैं, मिल कर प्रचार करेंगे।
बैठक में नहीं पहुंचे बाजवा
मालविंदर सिंह के कांग्रेस ज्वाइन करने के अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और उनके गुट के नेता मौजूद नहीं थे।
इस मौके पर कैप्टन गुट के नेता ही दिखाई दिए, जिनमें खडूर साहिब से लोकसभा उम्मीदवार हरमिंदर गिल, विधायक हरदयाल कंबोज, सुखजिंदर रंधावा, चरनजीत सिंह चन्नी, तृप्त राजिंदर बाजवा, मोहम्मद सदीक, अजायब सिंह भट्टी व साधू सिंह धरमसोत, पूर्व विधायक सुरजीत धीमान व मक्खन सिंह भी थे।
अजनाला में शहीदी स्मारक के लिए कमेटी जरूरी नहीं : अमरिंदर
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि अजनाला के कुएं में जिन शहीदों की अस्थियां मिली हैं, उनके बारे में फैसला लेने के लिए किसी कमेटी की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार की कमेटी जरूरी नहीं है। सब कुछ रिकॉर्ड में मौजूद है।
26 नेटिव इनफेंटरी की मियां मीर में चार पलटन थीं। मारे गए सिपाई उच्च जाति के ब्राह्मण थे। जल्द से जल्द सेना को इनका अंतिम संस्कार करना चाहिए। सरकार को इनकी याद में एक छोटा मंदिर बनाना चाहिए।