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स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ीं, कारनामा देख PM मोदी को झटका लगेगा

Sat, 23 Sep 2017 09:02 AM IST
विनीत तोमर/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
विनीत तोमर/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Sat, 23 Sep 2017 09:02 AM IST
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canteen running in public toilets in mdu rohtak, violence of pm modi swachhta abhiyan
PM MODI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की धज्जियां जमकर उड़ाई जा रही हैं। कारनामा भी ऐसा किया गया है, देखकर पीएम साहब को झटका लगा जाएगा। स्वच्छता अभियान को लेकर नित नयी योजनाएं शुरू कर रहे हैं। भारी-भरकम बजट खर्च कर लोगों में स्वच्छता की अलख जगाई जा रही है। घर-घर शौचालय के निर्माण हो रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच एक विश्वविद्यालय ऐसा भी है जिसमें एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है।
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हैरान करने वाली बात तो यह है कि दशक पहले शौचालय तो बने थे, लेकिन उनका कभी शौचालय के रूप में इस्तेमाल ही नहीं हुआ। किसी में कैंटीन चल रही है तो किसी में सूचना केंद्र और सिक्योरिटी कार्यालय। बात हो रही है ए ग्रेड दर्जा हासिल करने वाले महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है।
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इतने बड़े विश्वविद्यालय में जहां हर रोज हजारों की तादात में विद्यार्थियों का आना-जाना होता है, वहां पर एक भी सार्वजनिक शौचालय ही नहीं है। हालांकि विश्वविद्यालय के विभागों में शौचालय जरूर है। कोई बाहर से विद्यार्थी या कोई अन्य व्यक्ति आता है तो सार्वजनिक शौचालय न होने पर उसे परेशानी होती है।
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समस्या उठाने पर बने थे तीन शौचालय

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Public Toilets
करीब एक दशक पहले यह समस्या उठी थी। उस समय कुलपति रहे प्रो. राज सिंह धनखड़ ने विश्वविद्यालय परिसर में तीन सार्वजनिक शौचालय बनाए थे। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय तो बने, लेकिन काफी दिनों तक उन पर ताले लटके रहें और बाद में उन्हें शौचालय की बजाय अन्य कामों में इस्तेमाल कर दिया। जब विश्वविद्यालय के अधिकारियों से इस संबंध में बात की गई तो वे जवाब देने की बजाय बात को टालते नजर आए।

यहां बनाए गए थे शौचालय
गेट नंबर एक के पास जहां पर फिलहाल प्रकाशन प्रकोष्ठ का सेल काउंटर एवं सूचना केंद्र चल रहा है, उसका निर्माण कभी शौचालय के लिए हुआ था। गेट नंबर दो के पास बनाए गए शौचालय में सिक्योरिटी एजेंसी का कार्यालय, टैगोर सभागार और हॉस्टल के नजदीक जहां पर कैंटीन है उसका निर्माण भी शौचालय के लिए ही हुआ था।

बड़े आयोजन में होती है परेशानी
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को तो पता है कि विभाग में कहां-कहां शौचालय है, लेकिन समस्या उस समय ज्यादा होती है जब विश्वविद्यालय में कोई बड़ा आयोजन हो। ऐसे में बाहर से आने वाले लोगों को यह तक पता नहीं होता कि शौचालय कहां है।
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