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कैंसर कारक रसायन के मामले में याची को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

Tue, 12 Apr 2016 09:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़ Updated Tue, 12 Apr 2016 09:49 PM IST
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Cancer-causing chemicals, Punjab-Haryana High Court, petitioner
woman fighting cancer - फोटो : daily mail
कैंसर कारक रसायन कारसिनोजेंस पर रोक लगाने की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले चंडीगढ़ के हेमंत गोस्वामी को मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस एसएस सारों व गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने कड़ी फटकार लगाई।
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हालांकि गोस्वामी की ओर से बिना शर्त माफी मांगने पर फिलहाल सुनवाई स्थगित कर दी गई। फिलहाल बेंच ने पंजाब, हरियाणा और यूटी से स्थिति रिपोर्ट मांगी है कि अभी तक कारसिनोजेंस की रोकथाम पर क्या कदम उठाए गए हैं।  
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हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और यूटी को कैंसर कारक रसायन कारसिनोजेंस ढूंढने के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने और बैठक करने को कहा था। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि कमेटी में हेमंत गोस्वामी को भी शामिल किया जाए।
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हरियाणा सरकार ने बताया कि हेमंत गोस्वामी ने पहले ई-मेल पर सुझाव भेजे और बैठक रखी गई, जिसमें उन्हें बुलाया गया। वह बैठक में शामिल भी पहुंचे, लेकिन उन्होंने अटेंडेंस शीट पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

उधर, गोस्वामी ने पैरवी करते हुए कहा कि बैठक नहीं हुई। बेंच को यह भी बताया कि उन्होंने लिखित सुझाव भी हरियाणा स्वास्थ्य विभाग को भेजे थे। बेंच ने फटकार लगाते हुए गोस्वामी से पूछा कि बैठक में दो आईएएस अफसर, डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विस और अन्य के शामिल होने की बात हरियाणा सरकार कह रही है तो क्या सरकार झूठ बोल रही है।


बेंच ने टिप्पणी करते हुए गोस्वामी से कहा कि अधिकारी के कहने पर भी अटेंडेंस शीट पर हस्ताक्षर करना जुर्म है। इस जुर्म में उन्हें सजा सुनाई जा सकती है।

बेंच ने कहा कि बैठक हुई या नहीं, इसका फैसला बाद में ट्रायल कोर्ट के दौरान हो सकता है। मामला भले ही जनहित का हो, लेकिन इससे गोस्वामी को पैरवी से रोकते हुए पीजीआई के किसी एक्सपर्ट को एमिकस क्यूरी लगाया जा सकता है। इसी बीच गोस्वामी की ओर से एडवोकेेट एपीएस शेरगिल ने पैरवी करते हुए कहा कि गोस्वामी बिना शर्त माफी मांगते हैं।
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