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हाईकोर्ट में 224 औद्योगिक प्लॉटों की अलॉटमेंट रद्द
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 28 Nov 2015 08:59 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोहतक में 224 औद्योगिक प्लॉटों की अलॉटमेंट रद्द कर दी है। यह अलॉटमेंट 2009 में विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक दो दिन पहले हुई थी।
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आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चुनाव में लाभ लेने के लिए ऐसे चहेतों को प्लॉट दिए, जो इसकी योग्यता नहीं रखते थे।
हाईकोर्ट में मुलख राज धमीजा ने एडवोकेट सुशील जैन के माध्यम से प्लॉट अलॉटमेंट को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि प्लॉट आवंटन के लिए आर्थिक व तकनीकी पैमाना नहीं अपनाया गया। आवंटन ऐसे व्यक्तियों को कर दिया गया, जिनके पास औद्योगिक क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं था।
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आरोप था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस के आला नेताओं तक पहुंच रखने वालों को इसलिए प्लॉट दिए गए ताकि विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
याचिका पर हरियाणा सरकार से जवाब मांगा था। सरकार ने कहा था कि विजिलेंस जांच की जा रही है, लेकिन हाईकोर्ट ने तीन आईएएस अधिकारियों की कमेटी गठित कर रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना था कि उस वक्त अलॉटमेंट केलिए पुख्ता प्रक्रिया तय नहीं की गई थी।
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कमेटी ने यह भी कहा है कि अब प्रक्रिया तय कर ली गई है और भविष्य में ऐसे मामलों में ध्यान रखा जाएगा। इसके बाद जस्टिस हेमंत गुप्ता की डिवीजन बेंच अलॉटमेंट रद्द कर दी।
प्लॉट धारकों को मुआवजा देने का आदेश: याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन को निर्देश दिया है कि जो प्लॉट खाली पड़े हैं, उन्हें तुरंत कब्जे में ले लिया जाए। जहां निर्माण हुआ है, लेकिन औद्योगिक इकाइयां नहीं चल रहीं, ऐसे प्लॉट तीन महीने में जब्त किए जाएं और जहां औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं उनसे छह महीने में प्लॉट वापस लें। बेंच ने प्लॉट धारकों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है और मुकम्मल प्रक्रिया अपनाकर प्लॉट फिर से अलॉट करने को कहा है।