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Chandigarh News: खालिस्तान समर्थकों और गैंगस्टरों के गठजोड़ को बढ़ावा दे रहा कनाडा

Wed, 14 Jan 2026 07:03 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 07:03 PM IST
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Canada is promoting the nexus between Khalistan supporters and gangsters.
-भारतीय दूतावास ने दिखाया आईना, बोले- 40 साल से खालिस्तानी कर रहे कनाडा का इस्तेमाल
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सुरिंदर पाल
जालंधर। कनाडा की धरती बीते चार दशकों से खालिस्तान समर्थकों, आतंकियों और अलगाववादी संगठनों के लिए सुरक्षित ठिकाना मानी जाती रही है। अब यह खतरा और गंभीर हो गया है क्योंकि खालिस्तानी नेटवर्क का सीधा गठजोड़ संगठित अपराध और गैंगस्टरों से हो चुका है जिनके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े बताए जाते हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के बार-बार आगाह करने और पुख्ता सबूत सौंपने के बावजूद कनाडा सरकार की कार्रवाई बेहद ढीली रही है जिससे भारत की आंतरिक सुरक्षा को सीधी चुनौती मिल रही है।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार कनाडा में कम से कम नौ ऐसे खालिस्तान समर्थक और अलगाववादी संगठन सक्रिय हैं जो भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इन संगठनों को न केवल खुली छूट मिली हुई है बल्कि भारत के प्रत्यर्पण (निर्वासन) अनुरोधों को भी लगातार नजरअंदाज किया गया है।
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कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक संगठन
कनाडा में वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएसओ), खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ), सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) और बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे संगठनों की गतिविधियां लंबे समय से चर्चा में हैं। इन पर भारत विरोधी प्रचार, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने, आतंकी फंडिंग जुटाने और नेटवर्क को लॉजिस्टिक समर्थन देने के गंभीर आरोप हैं।एसएफजे की ओर से वैंकूवर, टोरंटो समेत कई शहरों में तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह कराए गए जिन्हें कनाडाई प्रशासन ने रोकने की कोई ठोस कोशिश नहीं की।
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निर्वासन के अनुरोध, लेकिन कार्रवाई शून्य
भारत ने जिन प्रमुख आरोपियों के खिलाफ कनाडा को सबूत और डोजियर सौंपे उनमें गुरवंत सिंह (1990 के दशक की आतंकी गतिविधियों में संलिप्त), आतंकी मामलों में वांछित गुरप्रीत सिंह, 16 आपराधिक मामलों में वांछित अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला और पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने वाला सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ शामिल हैं। लेखक और सुरक्षा मामलों के जानकार जोगिंदर सिंह का कहना है कि भारत ने कूटनीतिक स्तर पर कई बार स्पष्ट किया है कि कनाडा की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंक और संगठित अपराध के लिए हो रहा है लेकिन वहां की कार्रवाई अपेक्षाकृत कमजोर और ढुलमुल रही है। यह नेटवर्क भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
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