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कैग की रिपोर्ट में खुलासा, हरियाणा में नहीं लागू हो सका CCTNS
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 04 Apr 2016 04:32 PM IST
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हरियाणा में अपराध तथा आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) को तीन वर्षों की समाप्ति के बाद भी अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। कैग की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस मामले में गृह विभाग की ओर से न तो जांच अधिकारियों को हार्डवेयर मुहैया कराया जा सका और न ही इसके लिए पुलिस कर्मियों को जरूरी ट्रेनिंग दी जा सकी। इसे रीयल टाइम इंफॉर्मेशन शेयरिंग के लिए पुलिस स्टेशनों और कार्यालयों में लागू किया जाना था, मगर ऐसा संभव नहीं हो सका है।
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पुलिस बल को अपराध नियंत्रण के मामले में सहायक आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के लिहाज से साल 2009 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत सीसीटीएनएस को मिशन मोड परियोजना के रूप में लागू करने की पहल की गई, लेकिन इसके लिए राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के बीच ऑप्लीकेशन सॉफ्टवेयर तथा नेटवर्क सेवाएं मुहैया नहीं की जा सकीं। इस वजह से विभाग को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता का सामना करना पड़ा। नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) की साल 2014-15 की रिपोर्ट में अनियमितताओं का खुलासा हुआ।
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कई मदों में नुकसान: सीसीटीएनएस के जरिये 233 पुलिस स्टेशनों तथा 152 उच्चतर कार्यालयों को कवर करना था, लेकिन इसे भी पूरा नहीं किया जा सका। साल 2009-15 के दौरान 58.94 करोड़ की परियोजना के तहत महज 2.40 करोड़ रुपये ही जारी किए गए। गलतियों के कारण 14.48 लाख रुपये का व्यय बेकार चला गया। 2010-13 में केंद्र सरकार को भेजी गई निधियों से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र में भी कई कमियां दर्शाई गईं। चार वर्ष से अधिक अवधि के दौरान 8.24 करोड़ रुपये रुके और इनका इस्तेमाल भी नहीं किया जा सका। इस कारण सरकार को 2.04 करोड़ रुपये के ब्याज की हानि हुई है।
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डीजी सेट्स थे बेकार, ईंधन भी नहीं मिला: 53 करोड़ की परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए जून 2011 में तकनीकी तथा वाणिज्यिक स्कोर पर आधारित राज्य के हाई पॉवर्ड परचेज कमेटी ने एक कंपनी को सिस्टम इंटीग्रेटर भी नियुक्ति किया। 20 पुलिस स्टेशनों और अभिलेखों में सामने आया कि 29.97 लाख की लागत के डीजी सेट्स पहले से ही बेकार पड़े थे।
कमियां
- गुड़गांव में पहले ही ट्रैफिक पुलिस स्टेशन में 3.39 लाख रुपये की लागत के हार्डवेयर बेकार पड़े थे
- अक्तूबर, 2012 तक 5.98 करोड़ की लागत से 45000 पुलिस कर्मियों को नहीं दी जा सकी ट्रेनिंग
- 20 हजार की जगह महज 10 हजार कर्मियों को ही दिया गया बेसिक कंप्यूटर प्रशिक्षण
- 20 पुलिस स्टेशनों में 407 पुलिस कर्मियों को कोर अप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के यूजर के लिहाज से जरूरी ट्रेनिंग न मिलने के कारण कंप्यूटर ऑपरेटरों से ही काम चलाया गया