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हर जिले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कब तक स्थापित होगी हेल्पलाइन : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मेंटेनेंस ऑफ पेरेंट्स एंड वेलफेयर ऑफ सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत राज्य के सभी जिलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन स्थापित करने पर हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने हलफनामे के माध्यम से यह भी बताने को कहा है कि कब तक सभी जिलों में हेल्पलाइन स्थापित हो जाएगी।
जनहित याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी रामपाल मल्होत्रा ने वैधानिक एल्डर हेल्पलाइन के कार्यान्वयन के साथ-साथ हेल्पलाइन के विनियमन के लिए समर्पित कार्यान्वयन एजेंसी की नियुक्ति की मांग की गई थी। याचिका में बताया गया कि हरियाणा और पश्चिम बंगाल ही दो ऐसे भारत के राज्य हैं जहां वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन की स्थापना एवं प्रबंधन के लिए समर्पित कार्यान्वयन एजेंसी की नियुक्ति नहीं की गई है। टोल-फ्री सेवा आपातकालीन सहायता, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों के बारे में पूछताछ का माध्यम बनती है। हेल्पलाइन को पूरे भारत में 26 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने का निर्णय लिया गया था। याचिका में कहा गया है कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 1999, 2011 और 2021 में तीन नीतियां भी तैयार की गई हैं, जो हेल्पलाइन स्थापित करने की सरकार की मंशा को दर्शाती हैं, हालांकि, आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू एवं न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए केंद्र व हरियाणा सरकार से हलफनामा दायर कर यह बताने का आदेश दिया है कि कितने जिलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन स्थापित की गई है। न्यायालय ने कहा कि यदि यह स्थापित नहीं की गई है, तो सरकार को इसका कारण बताना होगा। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को बुजुर्ग हेल्पलाइन की स्थापना के लिए समय-सीमा बताने का भी निर्देश दिया है। मामला अब 18 फरवरी के लिए सूचीबद्ध है।
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जनहित याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी रामपाल मल्होत्रा ने वैधानिक एल्डर हेल्पलाइन के कार्यान्वयन के साथ-साथ हेल्पलाइन के विनियमन के लिए समर्पित कार्यान्वयन एजेंसी की नियुक्ति की मांग की गई थी। याचिका में बताया गया कि हरियाणा और पश्चिम बंगाल ही दो ऐसे भारत के राज्य हैं जहां वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन की स्थापना एवं प्रबंधन के लिए समर्पित कार्यान्वयन एजेंसी की नियुक्ति नहीं की गई है। टोल-फ्री सेवा आपातकालीन सहायता, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों के बारे में पूछताछ का माध्यम बनती है। हेल्पलाइन को पूरे भारत में 26 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने का निर्णय लिया गया था। याचिका में कहा गया है कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 1999, 2011 और 2021 में तीन नीतियां भी तैयार की गई हैं, जो हेल्पलाइन स्थापित करने की सरकार की मंशा को दर्शाती हैं, हालांकि, आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू एवं न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए केंद्र व हरियाणा सरकार से हलफनामा दायर कर यह बताने का आदेश दिया है कि कितने जिलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन स्थापित की गई है। न्यायालय ने कहा कि यदि यह स्थापित नहीं की गई है, तो सरकार को इसका कारण बताना होगा। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को बुजुर्ग हेल्पलाइन की स्थापना के लिए समय-सीमा बताने का भी निर्देश दिया है। मामला अब 18 फरवरी के लिए सूचीबद्ध है।
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