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Hindi News ›   Chandigarh ›   Bureau of Indian Standards made certification mandatory for toys in order to curb import of Chinese toys

BIS Mark: खिलौनों को सर्टिफिकेशन के दायरे में लाया भारतीय मानक ब्यूरो, चाइना से आयात में 70 फीसदी की कमी

Sat, 06 Jan 2024 12:08 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 06 Jan 2024 12:08 PM IST
सार

खिलौने देश के हर घर में जाते हैं। ये बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं, क्योंकि बच्चे खिलौनों को मुंह में भी लगाते हैं। इसलिए इसे सर्टिफिकेशन के दायरे में लाने का फैसला किया गया। अब भारतीय मानक ब्यूरो खिलौना बनाने वाली इकाइयों को लाइसेंस देता है। इसके लिए उनके कारखानों में जाकर उत्पादन और परीक्षण प्रक्रिया जांची जाती है।

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Bureau of Indian Standards made certification mandatory for toys in order to curb import of Chinese toys
toys - फोटो : social media

विस्तार

चीनी खिलौनों की आवक और घटिया खिलौनों पर लगाम लगाने के मकसद से भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने खिलौनों के लिए भी सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। 
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बीआईएस उत्तरी क्षेत्र के डिप्टी डायरेक्टर जनरल राजीव पी (वैज्ञानिक-जी) ने बताया कि खिलौनों को सर्टिफिकेशन के दायरे में लाने के बाद से चीनी खिलौनों का निर्यात 70 फीसदी तक कम हुआ है। देश अब इस स्थिति में आ गया है कि भारतीय मानकों पर खरे उतरने वाले खिलौने अब निर्यात भी होने लगे हैं।

राजीव पी ने बताया कि खिलौने देश के हर घर में जाते हैं। ये बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं, क्योंकि बच्चे खिलौनों को मुंह में भी लगाते हैं। इसलिए इसे सर्टिफिकेशन के दायरे में लाने का फैसला किया गया। अब भारतीय मानक ब्यूरो खिलौना बनाने वाली इकाइयों को लाइसेंस देता है। इसके लिए उनके कारखानों में जाकर उत्पादन और परीक्षण प्रक्रिया जांची जाती है। खिलौनों को बीआईएस की प्रयोगशालाओं या बीआईएस से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच कर देखा जाता है कि वे भारतीय मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। किसी को भी ऐसे खिलौने बनाने, आयात करने, बेचने या बांटने, भंडारण करने, लीज पर देने या प्रदर्शित करने की इजाजत नहीं है, जो भारतीय मानकों पर खरे नहीं उतरते या जिन पर बीआईएस का ठप्पा नहीं लगा होता।
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उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेशन के दायरे में लाने का एक मकसद मेड इन इंडिया खिलौने को भी बढ़ावा देना है। पिछले वर्षों के मुकाबले चीन से खिलौनों के आयात में 70 फीसदी की कमी आई है। जो खिलौने मानकों के आधार पर खरे नहीं उतरते, उन्हें बिकने नहीं दिया जाता है। देश में 600 इकाइयों को खिलौने बनाने का लाइसेंस दे दिया गया है, जिससे मेड इन इंडिया खिलौने बन रहे हैं। अब स्थिति यह है कि भारत खिलौनों को विदेशों में भी भेजा जा रहा है।
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इस वर्ष 234 उत्पादों पर अनिवार्य होगा बीआईएस मार्क
बीआईएस उत्तरी क्षेत्र के डिप्टी डायरेक्टर जनरल राजीव पी (वैज्ञानिक-जी) ने बताया कि इस वर्ष 234 उत्पादों के लिए सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर किया जाएगा। सभी उत्पादों की सूची तैयार कर ली गई है और अलग-अलग तिथियों पर उनकी घोषणा की जाएगी। इसमें मुख्य रूप से प्लाईवुड सामान, बच्चों के डायपर, नैपकिन, सेनेटरी पैड, साइकिल ट्यूब, स्मार्ट मीटर, वेल्डिंग के सामान, नट और बोल्ट्स, इलेक्ट्रिक सीलिंग फैन, पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र, पीएनजी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घरेलू गैस स्टोव, स्टेनलेस स्टील कुकवेयर, पेय पदार्थों के लिए एल्यूमीनियम के डिब्बे, दरवाजे का हैंडल, बोतलबंद पानी निकालने की मशीन, औद्योगिक सुरक्षा हेलमेट, पुलिस बल के लिए गैर-धातु हेलमेट समेत अन्य हैं।


37 से 40 फीसदी नियम अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे
वरिष्ठ निदेशक एवं चंडीगढ़ शाखा कार्यालय के प्रमुख दीपक अग्रवाल (वैज्ञानिक-ई) ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो, अंतरराष्ट्रीय मानकों के 37 से 40 फीसदी तक पहुंच गया है लेकिन भारतीय बाजार की मांग को देखते हुए कई नियमों को अलग रखा जाता है। भारत देश की स्थिति काफी अलग है। यहां के बाजार पर अंतरराष्ट्रीय नियम नहीं थोपे जा सकते इसलिए जरूरतों को देखते हुए ही बीआईएस मानक तय करता है। हालांकि, नियमित तौर पर विभिन्न शाखाओं में समीक्षा की जाती है।
 
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